September 11, 2026

आत्महत्या पर बदलती सोच – चुप्पी तोड़ें, बातचीत शुरू करें

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रिम्स रांची मनोचिकित्सा विभाग ने विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर जागरूकता वार्ता का आयोजन किया गया 

RANCHI: राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची के मनोचिकित्सा विभाग ने विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर चिकित्सा इंटर्न, मरीजों और परिजनों के लिए एक जागरूकता वार्ता आयोजित की, जिसका उद्देश्य आत्महत्या के जोखिम की पहचान और खुली बातचीत को बढ़ावा देना था।

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस प्रतिवर्ष 10 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम संघ (IASP) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के तत्वावधान में मनाया जाता है।

वर्ष 2024–2026 के लिए त्रैवार्षिक विषय है “आत्महत्या पर कथानक बदलना,” जिसका आह्वान है “बातचीत की शुरुआत करें”, मूल लक्ष्य है कलंक को दूर करना और यह समझ बढ़ाना कि आत्महत्या रोकी जा सकती है।

WHO के अनुमान के अनुसार विश्व भर में प्रतिवर्ष 7 लाख 20 हज़ार से अधिक लोग आत्महत्या से मृत्यु को प्राप्त होते हैं, और 15 से 29 वर्ष के युवाओं में यह मृत्यु का तीसरा प्रमुख कारण है। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार भारत में आत्महत्या की दर प्रति एक लाख जनसंख्या पर 12.3 है।

प्रो. (डॉ.) मेजर अजय कुमार बाखला, और डॉ विद्या के. एल., मनोचिकित्सा विभाग, रिम्स रांची ने चिकित्सा इंटर्न के साथ-साथ ओपीडी और वार्डों में मरीजों तथा परिजनों को संबोधित किया,

जिसमें आत्महत्या के जोखिम की पहचान, आम भ्रमों, खुली बातचीत के महत्व और रिम्स में उपलब्ध सेवाओं पर चर्चा की गई।

प्रो. बाखला ने कहा, “आत्महत्या को रोका जा सकता है। इसके लिए किसी विशेषज्ञ की ज़रूरत नहीं; हर आम इंसान आत्महत्या रोकथाम में एक “गेटकीपर” बन सकता है।

गेटकीपर वह पहला व्यक्ति है जो सही समय पर सुनता है, ध्यान देता है, और किसी की जान बचाने में मदद करता है।“

गेटकीपर बनें

आत्महत्या रोकने के लिए हर कोई गेटकीपर बन सकता है – आम इंसान भी । इसके लिए RQPR मॉडल अपनाया जा सकता है:

• पहचानें (Recognize): संकट में फंसे व्यक्ति के संकेतों को पहचानें

• सहानुभूतिपूर्वक पूछें (Question): बिना झिझक, सहानुभूति के साथ सीधे पूछें

• मदद लेने हेतु प्रेरित करें (Persuade): व्यक्ति को सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करें

• उचित संसाधन तक पहुंचाएं (Refer): उपयुक्त सहायता या विशेषज्ञ के पास भेजें

आत्महत्या से जुड़े मिथक और तथ्य

मिथक: आत्महत्या के बारे में पूछने से यह प्रोत्साहित होती है।

तथ्य: सहानुभूति के साथ सीधे पूछना संवाद खोलकर जोखिम को कम करता है।

मिथक: जो लोग इसके बारे में बात करते हैं, वे करते नहीं।

तथ्य: अधिकांश लोग प्रयास से पहले कोई संकेत देते हैं।

मिथक: आत्महत्या बिना किसी चेतावनी के होती है।

तथ्य: अधिकांश लोग पहले चेतावनी संकेत दिखाते हैं।

मिथक: यह केवल मानसिक बीमारी वालों को प्रभावित करती है।

तथ्य: अत्यधिक तनाव या संकट में भी आत्महत्या हो सकती है।

मिथक: निर्णय लेने के बाद कोई नहीं रोक सकता।

तथ्य: संकट अक्सर अल्पकालिक होते हैं; समय पर सहायता मदद करती है।

मिथक: केवल विशेषज्ञ ही आत्महत्या को रोक सकते हैं।

तथ्य: कोई भी मदद कर सकता है: सुनें, देखभाल दिखाएं, आशा दें।

आत्महत्या को रोका जा सकता है। समय पर पहचान और खुला संवाद – चिकित्सकों, मरीजों और परिजनों द्वारा – जीवन बचा सकता है। रिम्स ओपीडी में सभी कार्यदिवसों पर निःशुल्क मनोरोग परामर्श उपलब्ध है।

Suicide helpline number: 14416 (Tele MANAS, 24/7)

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