अस्पतालों में हिंसा पर सख्ती की मांग, IMA-HBI और AHPI ने सुरक्षित स्वास्थ्य व्यवस्था का लिया संकल्प
RANCHI: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन–हॉस्पिटल बोर्ड ऑफ इंडिया (IMA-HBI) और एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) (AHPI) की संयुक्त ऑनलाइन बैठक में झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने पर जोर दिया गया।
बैठक में चिकित्सकों, अस्पतालों, मरीजों और उनके परिजनों के बीच संवाद और विश्वास को मजबूत करने का संकल्प लिया गया।
दोनों संगठनों ने कहा कि राज्य के अधिकांश चिकित्सक पूरी निष्ठा और पेशेवर नैतिकता के साथ मरीजों की सेवा कर रहे हैं। हालांकि हाल की कुछ घटनाओं ने अस्पतालों में सुरक्षा और बेहतर संवाद की आवश्यकता को उजागर किया है।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सकों का सुरक्षित कार्य वातावरण एक-दूसरे के पूरक हैं। अस्पतालों में हिंसा, धमकी, जबरन वसूली, ब्लैकमेल, अवैध हस्तक्षेप और सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं का प्रसार पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए नुकसानदायक है।
बैठक में रांची के सम्फोर्ड, राज और विवेकानंद अस्पताल से जुड़ी हालिया घटनाओं पर भी चिंता जताई गई।
विवेकानंद अस्पताल के मामले का उल्लेख करते हुए कहा गया कि जिस व्यक्ति की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत्यु हो चुकी थी और जिसे भर्ती भी नहीं किया गया था,
उस मामले में अस्पताल परिसर में हंगामा किया गया तथा सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार किया गया। संगठनों ने ऐसे मामलों में दोषियों की पहचान कर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
बैठक में छह प्रमुख निर्णय लिए गए, जिनमें मरीजों से बेहतर संवाद, चिकित्सा सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना, शिकायतों का कानूनी समाधान,
स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता अभियान चलाना, जांच एजेंसियों को सहयोग देना और अस्पतालों में हिंसा व अवैध हस्तक्षेप का संगठित विरोध शामिल है।
IMA-HBI और AHPI ने सरकार, प्रशासन, मीडिया, नागरिक समाज, मरीजों और चिकित्सकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि विश्वास, संवाद, पारदर्शिता और पारस्परिक सम्मान ही सुरक्षित और सशक्त स्वास्थ्य व्यवस्था की असली आधारशिला हैं।
