मादक पदार्थों का सेवन व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार एवं समाज पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डालता है: सिविल सर्जन

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राँची में नशा मुक्ति जागरूकता अभियान के अंतर्गत कार्यशाला का आयोजन

संध्या फेरी एवं माइकिंग के माध्यम से दिया गया जन-जागरूकता का संदेश

नशा मुक्ति जागरूकता अभियान के अंतर्गत जिले में 10 जून से 24 जून 2026 तक

RANCHI: मादक पदार्थों के सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से बुधवार को सिविल सर्जन कार्यालय, राँची के तत्वावधान में संध्या फेरी सह जागरूकता अभियान के तहत कार्यशाला एवं माइकिंग के माध्यम से प्रचार प्रसार का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, राँची के दिशा निर्देश में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (NTCP) एवं नशा मुक्ति अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में एएनएमटीसी, राँची की लगभग 50 छात्राओं सहित स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों एवं कर्मियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

संध्या फेरी सदर अस्पताल से प्रारंभ होकर फिरायालाल चौक तक निकाली गई।

इस दौरान प्रतिभागियों ने तंबाकू, शराब एवं अन्य मादक पदार्थों के सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों के संबंध में आम लोगों को जागरूक किया।

माइकिंग एवं नारों के माध्यम से नशामुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया गया तथा लोगों से नशे से दूर रहने की अपील की गई।

कार्यशाला के दौरान सिविल सर्जन, राँची डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि मादक पदार्थों का सेवन व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार एवं समाज पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नशे के स्वरूप एवं प्रकारों में व्यापक परिवर्तन आया है।

नशीले पदार्थों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है—

1. प्राकृतिक नशा (Natural Drugs):

ये नशीले पदार्थ सीधे पौधों अथवा प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त होते हैं। उदाहरणस्वरूप अफीम, गांजा, चरस एवं तंबाकू। प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त होने के बावजूद ये अत्यधिक नशे वाले एवं लत लगाने वाले पदार्थ हैं।

2. अर्ध-प्राकृतिक (Semi-Synthetic Drugs):

ये पदार्थ प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त तत्वों को रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से परिवर्तित अथवा अधिक प्रभावी बनाकर तैयार किए जाते हैं। हेरोइन, मॉर्फिन एवं कोडीन इसके प्रमुख उदाहरण हैं। रासायनिक प्रसंस्करण के कारण ये प्राकृतिक नशों की तुलना में अधिक खतरनाक एवं तीव्र प्रभाव वाले होते हैं।

3. कृत्रिम अथवा सिंथेटिक नशा (Artificial/Synthetic Drugs):

ये पूरी तरह मानव निर्मित नशीले पदार्थ होते हैं, जिन्हें प्रयोगशालाओं में विभिन्न रसायनों के संयोजन से तैयार किया जाता है।

फेंटानिल, मेथामफेटामाइन, स्पाइस (Spice/K2) एवं बाथ साल्ट्स इसके प्रमुख उदाहरण हैं। ये पदार्थ अत्यंत घातक माने जाते हैं तथा कई मामलों में प्राकृतिक नशों की तुलना में 50 से 100 गुना अधिक शक्तिशाली होते हैं।

इनकी अल्प मात्रा भी जानलेवा साबित हो सकती है।

एनटीसीपी कंसल्टेंट सुशांत कुमार ने तंबाकू एवं अन्य मादक पदार्थों से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों तथा उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी।

वहीं जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम)श्री प्रवीण कुमार सिंह ने नशा मुक्ति अभियान के उद्देश्यों, जनसहभागिता तथा जागरूकता कार्यक्रमों के महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी, चिकित्सकगण , स्वास्थ्य कर्मी, एएनएमटीसी की छात्राएं एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।

सभी प्रतिभागियों ने नशामुक्त समाज के निर्माण तथा मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जन-जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

उल्लेखनीय है कि नशा मुक्ति जागरूकता अभियान के अंतर्गत जिले में 10 जून से 24 जून 2026 तक विभिन्न जन-जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।

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