वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम को जन-आंदोलन बनायें, सभी विभाग मिलकर कार्य करें : अपर मुख्य सचिव
राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक
विभागों की जिम्मेदारियां निर्धारित कर सहयोग करने का निर्देश
RANCHI: स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार द्वारा मलेरिया, लिम्फेटिक फाइलेरिया तथा अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक गुरुवार को नेपाल हाउस, डोरंडा स्थित योजना एवं विकास विभाग के सभागार में आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव ने की।
बैठक में राज्य में वेक्टर जनित रोगों की वर्तमान स्थिति, संचालित रोकथाम एवं नियंत्रण गतिविधियों, अंतर-विभागीय समन्वय तथा आगामी रणनीतियों की समीक्षा की गई।
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि मलेरिया, लिम्फेटिक फाइलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, कालाजार और जापानी इंसेफेलाइटिस जैसे वेक्टर जनित रोगों का नियंत्रण केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है।
इन रोगों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ ग्रामीण विकास, पंचायती राज, नगर विकास एवं आवास, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता,
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास तथा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को समन्वित रूप से कार्य करना होगा।
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि मलेरिया, लिम्फेटिक फाइलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, कालाजार और जापानी इंसेफेलाइटिस जैसे वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम को जन-आंदोलन बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वित रूप से कार्य करना होगा।
उन्होंने विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियां स्पष्ट करते हुए औपचारिक पत्र जारी करने तथा जिला से पंचायत स्तर तक प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि जून 2026 तक राज्य में मलेरिया के 16,728 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें पूर्वी सिंहभूम (6,527) और पश्चिमी सिंहभूम (6,172) में लगभग 76 प्रतिशत मामले पाए गए।
वहीं, जून 2026 में डेंगू के 77 मामले दर्ज हुए, जिनमें सर्वाधिक 27 मामले रांची से हैं। उच्च मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में समय पर जांच, त्वरित एवं पूर्ण उपचार, दवाओं की उपलब्धता, नियमित निगरानी, मच्छर नियंत्रण और जन-जागरूकता अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए।
लिम्फेटिक फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान में केवल दवा वितरण नहीं, बल्कि पात्र लाभार्थियों को प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति में दवा का सेवन सुनिश्चित कराया जाए।
साथ ही फाइलेरिया रोगियों के लिए रुग्णता प्रबंधन, एमएमडीपी किट, हाइड्रोसील उपचार और नियमित फॉलो-अप को भी मजबूत करने पर जोर दिया गया।
बैठक में ग्रामीण विकास, पंचायती राज, नगर विकास, पेयजल एवं स्वच्छता, शिक्षा तथा श्रम विभागों की भूमिकाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। ग्रामसभा, स्कूल-कॉलेज, शहरी निकाय,
स्वयं सहायता समूह, औद्योगिक क्षेत्रों और कार्यस्थलों के माध्यम से जन-जागरूकता बढ़ाने, जल-जमाव रोकने, स्वच्छता अभियान चलाने तथा मलेरिया जांच, उपचार और फाइलेरिया रोधी दवा सेवन को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के क्षेत्रीय निदेशक श्री रविशंकर, एनएचएमके मैनेजिंग डायरेक्टर श्री शशि प्रकाश झा, उप सचिव श्री अश्विनी कुमार और
विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन, पीरामल और सिनी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
सहयोगी संस्थाओं ने रोग निगरानी, तकनीकी सहयोग, क्षमता निर्माण, सामुदायिक सहभागिता और कार्यक्रम की नियमित समीक्षा में सहयोग जारी रखने की सहमति व्यक्त की।
