रिम्स-2 निर्माण को लेकर एडीबी टीम के साथ उच्चस्तरीय बैठक
4200 करोड़ रुपये से बनेगा वर्ल्ड क्लास अस्पताल, 2600 करोड़ देगा एडीबी
दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 से शुरू हो सकता है निर्माण कार्य
RANCHI: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक और विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में सोमवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में रिम्स-2 निर्माण परियोजना को लेकर एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) की टीम के साथ उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।
एडीबी की टीम राज्य में प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना के लिए फैक्ट फाइंडिंग मिशन पर रांची पहुंची है।
बैठक के दौरान टीम ने परियोजना की वर्तमान स्थिति, निर्माण प्रक्रिया, योजना निर्माण, वित्तीय प्रबंधन, सामाजिक एवं पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों, अस्पताल की क्षमता, भवन संरचना तथा भविष्य की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विस्तृत समीक्षा की।
बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री अजय कुमार सिंह ने कहा कि रिम्स-2 को केवल एक अस्पताल के रूप में नहीं, बल्कि अत्याधुनिक चिकित्सा, चिकित्सा शिक्षा, रिसर्च और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं से युक्त एक समग्र स्वास्थ्य संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि झारखंड के लोगों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े और उन्हें अपने ही राज्य में विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि रिम्स-2 का निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किया जाएगा। अस्पताल का डिजाइन, इंफ्रास्ट्रक्चर, मेडिकल सुविधाएं, तकनीकी व्यवस्था और कंसल्टेंसी पूरी तरह वर्ल्ड क्लास स्तर की होगी। साथ ही निर्माण कार्य में गुणवत्ता और समय सीमा दोनों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
बैठक में बताया गया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक द्वारा लगभग 2600 करोड़ रुपये का लोन उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि इस पर 4200 करोड़ का पूरा खर्च आएगा।
एडीबी की टीम ने परियोजना की क्षमता, तकनीकी आवश्यकताओं तथा प्रशासनिक तैयारियों का आकलन कर कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।
जानकारी दी गई कि आने वाले छह महीनों में लोन प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताओं को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इसके बाद दिसंबर 2026 अथवा जनवरी 2027 से निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि निर्माण कार्य दो वर्षों के भीतर पूरा कर लिया जाए, ताकि जल्द से जल्द राज्यवासियों को इसका लाभ मिल सके।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना के प्रत्येक चरण की मॉनिटरिंग गंभीरता से की जाए और कार्य में किसी प्रकार की देरी न हो।
बैठक में अस्पताल को “सेल्फ सस्टेनिंग मॉडल” पर विकसित करने को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई।
इस दौरान यह विचार किया गया कि अस्पताल की संचालन व्यवस्था ऐसी हो, जिससे भविष्य में संस्थान आर्थिक रूप से भी मजबूत बना रहे और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं का निरंतर विस्तार किया जा सके।
बैठक में मुख्य रूप से लोन रेडीनेस, कंसल्टेंट चयन की समयसीमा, ईएमई वर्कशॉप से प्राप्त प्रमुख सीख, फाइनेंशियल ड्यू डिलिजेंस, फंड फ्लो मैनेजमेंट, फाइनेंशियल सस्टेनेबिलिटी एनालिसिस, एनवायरमेंटल सेफगार्ड,
स्टाफिंग पैटर्न, तकनीकी विशेषज्ञों एवं कंसल्टेंट्स की नियुक्ति सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के उप सचिव ध्रुव प्रसाद, जेएसबीसीसीएल के अधिकारी, विभागीय पदाधिकारी तथा एडीबी के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
