August 30, 2026

चाईबासा में DMFT फंड के पैसे को हेमंत सरकार ने लुटवा दिया : बाबूलाल मरांडी

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75.68 प्रतिशत राशि खर्च, परंतु इलाकों की बुनियादी समस्याएं जस की तस, यह आर्थिक अपराध

कोल्हान क्षेत्र में व्याप्त गरीबी, बेरोजगारी और बढ़ते पलायन के लिए हेमंत सरकार जिम्मेदार : बाबूलाल मरांडी

RANCHI: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जिस उद्देश्य के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीएमएफटी फंड बनाया था, चाईबासा जिले में उस फंड का कोई लाभ खदान प्रभावित इलाकों के लोगों को होता नहीं दिख रहा है।

राज्य सरकार और प्रशासन के संरक्षण में इस फंड की केवल बंदरबांट और लूट हुई है। श्री मरांडी ने कहा कि उन्होंने तीन दिनों तक इस इलाके का दौरा किया और विस्तारपूर्वक लोगों से जमीनी हकीकत समझने की कोशिश की परंतु जो तस्वीर और जानकारी सामने आई है वह काफी भयावह एवं पीड़ादायक है।

आज झारखंड और कोल्हान के इलाके में जो गरीबी और बेरोजगारी व्याप्त है, इसके लिए सिर्फ और सिर्फ हेमंत सोरेन सरकार जिम्मेवार है। यहां उनके मंत्री और प्रशासन सहित तमाम लोग जनता की चिंता छोड़ अपनी तिजोरी भरने में लगे हुए हैं।

डीएमएफटी फंड को लेकर राज्य सरकार को श्वेत पत्र जारी करनी चाहिए। श्री मरांडी चाईबासा के जिला भाजपा कार्यालय में प्रेस मीडिया को सम्बोधित कर रहे थे।

श्री मरांडी ने कहा कि पूर्व की सरकारों ने तो खदान प्रभावित इलाकों की कभी कोई चिंता ही नहीं की। 2014 में जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने डीएमएफटी फंड बनाया।

इसके पूर्व गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के कारण खदान इलाकों के संकट से वे भली-भांति परिचित थे। डीएमडी फंड का अध्यक्ष डीसी को बनाया गया।

इस फंड से खदान इलाकों में विकास कार्य हो, इस योजना का यह मुख्य उद्देश्य है। लेकिन हमें अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान कहीं भी इस इलाके में विकास दिखाई नहीं दिया।

श्री मरांडी ने कहा कि चाईबासा जिले में 10 वर्षों में 3742.15 करोड़ रूपया डीएमएफटी फंड में मिला है।

आश्चर्यजनक बात यह है कि सरकार द्वारा 75.68 प्रतिशत राशि खर्च भी कर दिया है परंतु प्रभावित इलाकों की बुनियादी समस्याएं जस की तस हैं।

हेमंत सोरेन सरकार ने इस फंड का पैसा यूं ही लूटा दिया है। यह एक प्रकार का आर्थिक अपराध है।

उन्होंने कहा कि खर्च की गई राशि को पोर्टल में डालना था ताकि इस फंड की पारदर्शिता बनी रहे। आम लोग भी देख सके कि यह राशि उनके हित में या अहित में खर्च की जा रही है।

परंतु राज्य सरकार ने खर्च का ब्यौरा पोर्टल में नहीं डाला। श्री मरांडी ने पत्रकारों से कहा कि आप लोग भी मामले की तहकीकात करिए और डीसी से पूछिए कि खर्च का ब्यौरा पोर्टल में क्यों नहीं डाला गया है। खर्च कहां-कहां हुआ है और इसके लिए कौन जिम्मेवार हैं ?

श्री मरांडी ने कहा कि देश भर में 434 खदानों की नीलामी हुई है। वहीं झारखंड में मात्र तीन खदान का ही ऑक्शन हुआ है, वह ऑक्शन भी झारखंड सरकार ने नहीं बल्कि भारत सरकार के द्वारा हुआ है।

झारखंड में एक भी खदान का ऑक्शन नहीं किया गया। राज्य सरकार बताए कि इसके लिए कौन जिम्मेवार है ? अगर झारखंड सरकार ऑक्शन करती तो यहां से युवाओं और मजदूरों का पलायन नहीं होता।

आज स्थिति यह है कि रोजगार के अभाव में छोटे-छोटे बच्चे तक पलायन करने को मजबूर हैं। अनेक खदानें नीलामी नहीं होने के कारण वर्षों से बंद पड़ी हैं, जिससे स्थानीय लोगों के रोजगार के अवसर समाप्त हो गए हैं।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, पूर्व मंत्री बड़कुंवर गगराई, पूर्व प्रदेश प्रवक्ता जेबी तुबिद, प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय शर्मा आदि भी उपस्थित रहे।

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