बोफोर्स के नाम पर राजीव गांधी को बदनाम करने की राजनीति अब बेनकाब : आलोक कुमार दूबे
बोफोर्स मामला: दशकों बाद भी राजनीतिक आरोपों पर कांग्रेस का पलटवार, राजीव गांधी के खिलाफ साजिशनरेटिव खत्म होने का दावा
RANCHI: प्रदेश कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दुबे ने बोफोर्स मामले को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि जिस तरह से तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और कांग्रेस पार्टी के खिलाफ भ्रष्टाचार को लेकर देश में एक माहौल बनाया गया था, वह अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है।
उन्होंने कहा कि समय के साथ यह भी स्पष्ट हो गया है कि कई आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित थे और जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।
आलोक दुबे ने कहा कि सीबीआई की कार्यप्रणाली भी अब लोगों के सामने “एक्सपोज” हो चुकी है और कई मामलों में जांच की दिशा और निष्कर्षों को लेकर गंभीर बहस होती रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा उठाए गए कई मुद्दों और दावों को लेकर भी समय-समय पर सवाल खड़े होते रहे हैं।
उन्होंने बोफोर्स से जुड़े एक चर्चित पुस्तक और उसमें लगाए गए आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में जिस तरह से दलाली और भ्रष्टाचार के आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया, उसने देश की राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित किया।
दुबे ने कहा कि यदि उस समय तथ्यों की निष्पक्ष जांच और सही मूल्यांकन हुआ होता तो राजनीतिक इतिहास की दिशा कुछ और हो सकती थी।
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि कारगिल युद्ध के दौरान बोफोर्स तोपों की भूमिका महत्वपूर्ण रही, और भारतीय सेना ने इन्हीं हथियारों के दम पर कई मोर्चों पर प्रभावी प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि यह भी एक तथ्य है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
आलोक दुबे ने कहा कि भले ही राजनीतिक रूप से कुछ दलों को उस समय बढ़त मिली हो, लेकिन कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार को लंबे समय तक इन आरोपों का राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सामना करना पड़ा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में देश बिना ठोस प्रमाण के किसी भी तरह के आरोपों को स्वीकार नहीं करेगा और केवल जांच व न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निष्कर्ष निकाले जाएंगे।
उन्होंने कहा कि यह पूरा प्रकरण भारतीय राजनीति के लिए एक सबक है कि आरोप और वास्तविकता के बीच अंतर को समझना लोकतंत्र की मजबूती के लिए बेहद जरूरी है।
