आयुष्मान भारत में मोतियाबिंद सेवायें निजी अस्पताल से हटे तो बढ़ेगा अंधापन

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मोतियाबिंद (कैटरेक्ट) सेवाओं में निजी अस्पतालों की भागीदारी पर सेमिनार का आयोजन 

RANCHI: आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) के अंतर्गत मोतियाबिंद (कैटरेक्ट) सेवाओं में निजी अस्पतालों की भागीदारी को यथावत बनाए रखने के उ‌द्देश्य से आज IMA बिल्डिंगरांची में एक सेमिनार का आयोजन किया गया।

इस सेमिनार का आयोजन झारखंड प्राइवेट हॉस्पिटल ब्लाइंडनेस कंट्रोल सोसायटी ‌द्वारा किया गया।

इस कार्यक्रम में राज्य के लगभग 36 निजी अस्पतालों के डॉक्टर ओनर, प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

सेमिनार में यह महत्वपूर्ण चर्चा हुई कि यदि मोतियाबिंद सर्जरी को सरकारी अस्पताल के लिए आरक्षित किया गया तो झारखंड में हो रही कुल सर्जरी का लगभग 70-80% प्रभावित होगा और अंधापन बढ़ेगा।

विशेष रूप से ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि सरकरी अस्पताल में बेड, डॉक्टर, संसाधान का अभाव, और अन्य कारणो से मरीज को बार बार दौड़ना पड़ेगा। यह देखते हुए यह जरूरी है कि निजी अस्पतालों

की भागीदारी को कम करने के बजाय और बढ़ाया जाए, ताकि अधिक से अधिक गरीब और जरूरतमंद लोगों को समय पर इलाज मिल सके और अंधापन दूर हो।

सेमिनार में यह भी बताया गया कि वर्तमान में झारखंड में हर साल लगभग 3.5 लाख से 4.92 लाख मोतियाबिंद सर्जरी की आवश्यकता है, जबकि अभी करीब 2 लाख सर्जरी ही हो पा रही हैं। ऐसे में निजी अस्पतालों की भूमिका अत्यत महत्वपूर्ण है।

सेमिनार में सर्वसम्मति से यह मांग रखी गई कि आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों में मोतियाबिंद सर्जरी की सुविधा पहले की तरह जारी रखी जाए और इसे और मजबूत किया जाए, ताकि “अंधापन मुक्त झारखंड का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से थर्ड आई क्लिनिक एलएनजेपी आई हॉस्पिटल, दृष्टि नेत्रालय, कमल आइ केयर, देवकी हॉस्पिटल, आई हॉस्पिटल महागाना,

जैनिल आई केयर, सिटि हॉस्पिटल, संजीवनी आइ केयर, श्री गणेश आइ हॉस्पिटल, के अलावे कई हॉस्पिटल के प्रतिनिधि शामिल हुए शामिल हुए।

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