अपर मुख्य सचिव से मुलाकात — चिकित्सकों की लंबित मांगों पर ज्ञापन सौंपा
2009 बैच की समस्या को जायज माना, अगले सप्ताह फिर बैठक
RANCHI: झारखंड राज्य स्वास्थ्य सेवाएं संघ (झासा) के प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह से उनके कार्यालय कक्ष में मुलाकात की और चिकित्सकों की लंबित मूलभूत मांगों के निराकरण हेतु ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दे:
1. विशेषज्ञ चिकित्सकों के डायनेमिक एसीपी की नियमावली का अभाव
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि विशेषज्ञ सेवा (नियुक्ति) नियमावली 2015 में ही बन गई थी और विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति भी हो चुकी है। परंतु 11 वर्ष बीत जाने के बाद भी विशेषज्ञ उप संवर्ग के लिए डायनेमिक एसीपी एवं प्रमोशन से संबंधित कोई सेवा नियमावली नहीं बनी है।
2. चार डायनेमिक एसीपी में 5 साल का गैप — बिहार पलायन का कारण
झासा ने जोर देकर कहा कि झारखंड में सामान्य संवर्ग के चिकित्सकों को चार डायनेमिक एसीपी के लिए 25 वर्ष `(6+6+6+7)` लगते हैं, जबकि केंद्र एवं बिहार में यह अवधि केवल 20 वर्ष `(4+5+4+7)` है।
यह 5 साल का बड़ा अंतर सीधे सैलरी, सीनियरिटी और प्रमोशन को प्रभावित करता है।
इसी कारण झारखंड के अधिकांश चिकित्सक बिहार पलायन कर जाते हैं। संघ ने मांग की कि केंद्र एवं बिहार के तर्ज पर झारखंड में भी डायनेमिक एसीपी दिया जाए।
3. दंत चिकित्सकों को तीन की जगह चार डायनेमिक एसीपी
वर्तमान में झारखंड में दंत संवर्ग के चिकित्सकों को केवल तीन डायनेमिक एसीपी मिलते हैं, जबकि केंद्र एवं बिहार में चार डायनेमिक एसीपी का प्रावधान है। इस विसंगति को दूर करने की मांग की गई।
4. 2009 बैच की सेवा संपुष्टि में जनजातीय भाषा की विसंगति
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि 2009 बैच के चिकित्सकों की नियुक्ति के समय जनजातीय भाषा की अनिवार्यता नहीं थी। नियमावली 03 मार्च 2011 में आई, परंतु विभाग ने इसे रेट्रोस्पेक्टिव 2009 बैच पर भी लागू कर दिया।
इससे सेवा संपुष्टि, सैलरी, सीनियरिटी एवं डायनेमिक एसीपी बुरी तरह प्रभावित हुआ है और 2009 बैच के चिकित्सक अपने जूनियर बैच से भी पीछे हो गए हैं।
संघ ने कोषागार प्रशिक्षण की तिथि को सेवा संपुष्टि का आधार बनाने की मांग की।
अपर मुख्य सचिव का रुख:
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने ज्ञापन को विस्तार से पढ़ा और बिंदुवार परिचर्चा की। उन्होंने कहा: “2009 बैच की समस्याएं बिल्कुल जायज हैं। इसके निराकरण के लिए संगठन को कोर्ट जाने की सलाह दी जाती है।”
डायनेमिक एसीपी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि “केंद्र एवं बिहार के तर्ज पर डायनेमिक एसीपी का प्रस्ताव मेरे विचाराधीन है। मैं इस पर काम कर रहा हूं।”
साथ ही श्री सिंह ने गंभीर चिंता जताई कि झारखंड राज्य के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में चिकित्सकों की घोर कमी है।
इस कमी को कैसे दूर किया जा सकता है, इसके लिए उन्होंने झासा से व्यावहारिक सुझाव मांगे हैं।
अगली बैठक: अपर मुख्य सचिव ने आश्वस्त किया कि अगले सप्ताह फिर से एक बैठक आयोजित की जाएगी जिसमें झासा की महत्वपूर्ण मांगों एवं सुदूरवर्ती क्षेत्रों में चिकित्सीय सेवा कैसे मुहैया कराई जा सके, इस पर विस्तार से चर्चा होगी।
प्रतिनिधिमंडल में झासा के अध्यक्ष डॉ विमलेश सिंह, सचिव डॉ ठाo मृत्युंजय कुमार सिंह, संयोजक डॉ शरद कुमार,
कोषाध्यक्ष डॉ स्टीफन, महिला विंग की उपाध्यक्ष डॉ मुसर्रत यामिनी, सीनियर सर्जन डॉ अजीत कुमार,
डॉ समीर कुमार कुजूर, डॉ प्रदीप कुमार, डॉ विकास कुमार सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
