September 27, 2026

AIOS मिड-टर्म सम्मेलन 2026: आधुनिक नेत्र शल्य चिकित्सा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और नवीन तकनीकों पर हुआ बड़ा ऐलान

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मोतियाबिंद से मायोपिया, ग्लूकोमा से रेटिनोब्लास्टोमा तक—AI, रोबोटिक सर्जरी और आधुनिक इलाज पर विशेषज्ञों ने साझा किए नए सूत्र

रोशनी रहे सुरक्षित: 3-5 साल के बच्चे में पहली नेत्र जांच और 40 के बाद हर साल चेक-अप जरूरी

धुंधलापन ही नहीं, चकाचौंध भी मोतियाबिंद का संकेत; फेको व रोबोटिक तकनीक में भी सर्जन की भूमिका अहम: डॉ. चित्रा रामामूर्ति

आंख में केमिकल पड़ा? अस्पताल बाद में… पहले पानी! एक छोटी-सी लापरवाही कॉर्निया को पहुंचा सकती है गहरा नुकसान: प्रो. (डॉ.) नम्रता शर्मा/ डॉ. हरवंश लाल

बच्चों की धुंधली होती दूर की नजर को न करें नजरअंदाज; मोबाइल से दूरी और आउटडोर खेल से करें मायोपिया से बचाव: डॉ. मोहन राजन

RANCHI:  होटल चाणक्य बीएनआर, रांची में ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी (AIOS) एवं झारखण्ड ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी (JHOS) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 5वें AIOS मिड-टर्म सम्मेलन का दूसरा दिन नेत्र विज्ञान की आधुनिक तकनीकों, उन्नत शोधों और व्यापक जन-जागरूकता के नाम रहा।

देश-विदेश से जुटे प्रख्यात नेत्र विशेषज्ञों ने विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों, हैंड्स-ऑन कार्यशालाओं और अकादमिक बहसों में सक्रिय भागीदारी की।

सम्मेलन के आयोजन का मुख्य उद्देश्य अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीकों को आम मरीजों तक सुरक्षित एवं सुलभ रूप से पहुंचाना है। इस अवसर पर AIOS के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) जे. एस. तितियाल, मानद महासचिव डॉ. संतोष जी. होनावर, वैज्ञानिक समिति की अध्यक्षा प्रो. (डॉ.) नम्रता शर्मा,

आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. बी. पी. कश्यप एवं आयोजन सचिव डॉ. भारती कश्यप ने चिकित्सा क्षेत्र में निरंतर नवाचार और कौशल विकास पर विशेष बल दिया।

वैज्ञानिक सत्रों के प्रमुख निष्कर्ष

• मोतियाबिंद एवं लेंस प्रत्यारोपण तकनीक: मोतियाबिंद शल्य चिकित्सा की जटिलताओं तथा ‘पोस्टीरियर कैप्सुलर रप्चर’ (PCR) के सटीक प्रबंधन पर मास्टरक्लास आयोजित हुई। इसके साथ ही आधुनिक ट्राइफोकल एवं ईडॉफ (EDOF) इंट्राओकुलर लेंस तकनीकों पर विशेषज्ञों ने अपने व्यावहारिक अनुभव साझा किए।

• आधुनिक रेटिना एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): विट्रेओ-रेटिनल सर्जरी, डायबिटिक रेटिनोपैथी के उन्नत उपचार तथा नेत्र जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की महत्वपूर्ण भूमिका पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

• पीडियाट्रिक ऑप्थल्मोलॉजी (बाल नेत्र रोग): बच्चों में तेजी से बढ़ रहे मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) के निवारण तथा स्क्रीन टाइम के दुष्प्रभावों पर केंद्रित विशेष वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए।

• हैंड्स-ऑन वर्कशॉप (SSTC / DSTC / TSTC):युवा नेत्र चिकित्सकों के कौशल संवर्धन हेतु सर्जिकल स्किल ट्रांसफर कोर्सेज (SSTC) और डायग्नोस्टिक कोर्सेज (DSTC) संचालित हुए, जहाँ अत्याधुनिक सर्जिकल तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

• अकादमिक प्रतियोगिताएं: युवा डॉक्टरों के लिए राष्ट्रीय पीजी डिबेट ‘रेजिडेंट्स रंबल’ (Residents Rumble), जटिल मामलों पर आधारित ‘कोर्ट मार्शल’ (Court Martial) तथा प्रतिष्ठित ‘अजंता क्विज’ का सफल आयोजन हुआ।

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