स्वामी जगन्नाथ रथ मेला: आस्था, संस्कृति और एकता का महापर्व
वरुण सिन्हा
RANCHI: स्वामी जगन्नाथ का रथ मेला भारत की सनातन परंपरा, अटूट श्रद्धा और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत प्रतीक है।
इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य सजे-धजे रथों पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हैं।
लाखों श्रद्धालु “जय जगन्नाथ” के जयघोष के साथ रथ की रस्सी खींचने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा से रथ खींचने वाले भक्तों पर भगवान की विशेष कृपा होती है और उनके जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का आगमन होता है।
रथ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और भाईचारे का भी संदेश देता है।

इस दिन जाति, धर्म और वर्ग के भेद मिट जाते हैं तथा सभी लोग एक साथ भगवान की भक्ति में लीन दिखाई देते हैं। मेले में पारंपरिक झांकियां, भजन-कीर्तन, लोक संस्कृति, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यंजनों की भी विशेष रौनक रहती है।
स्वामी जगन्नाथ का यह पावन उत्सव हमें प्रेम, सेवा, समानता और मानवता का संदेश देता है। यह भारतीय संस्कृति की महान परंपरा का जीवंत प्रतीक है, जो हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को भक्ति और एकता के सूत्र में बांध देता है। जय जगन्नाथ!
