October 14, 2026

सदर अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और मानव संसाधन की उपलब्धता पर विशेष सचिव ने दिए निर्देश

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मुख्यमंत्री अस्पताल रखरखाव योजना की राशि एक सप्ताह में शत-प्रतिशत स्वीकृत करने का निर्देश

डीएनबी पाठ्यक्रम शुरू करने की पहल तेज होगी

RANCHI:  स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार की विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा की अध्यक्षता में मंगलवार को सदर अस्पतालों में विभिन्न पदों की पुनर्संरचना (रिस्ट्रक्चरिंग) तथा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत आवंटित राशि के व्यय की स्थिति की समीक्षा के लिए बैठक आयोजित की गई।

बैठक में निदेशक, चिकित्सा शिक्षा डॉ. पी. भट्टाचार्य, निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. प्रभात कुमार सहित सभी जिलों के सिविल सर्जन एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में मुख्यमंत्री अस्पताल रखरखाव योजना, मदर टेरेसा एडवांस्ड हेल्थ क्लिनिक, चलंत ग्राम क्लिनिक तथा आउटसोर्सिंग के अंतर्गत आवंटित राशि के उपयोग की समीक्षा की गई।

विशेष सचिव ने संबंधित अधिकारियों से योजनावार आवंटन, स्वीकृत राशि, अब तक हुए व्यय, कोषागार से निकासी तथा शेष राशि के उपयोग की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर राशि का समुचित उपयोग सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री अस्पताल रखरखाव योजना की समीक्षा के दौरान विशेष सचिव ने निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर शत-प्रतिशत राशि की स्वीकृति सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने सभी सिविल सर्जनों को योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लगातार प्रयास करने को कहा।

मदर टेरेसा एडवांस्ड हेल्थ क्लिनिक के संबंध में उन्होंने आवंटित राशि, स्वीकृत राशि, वास्तविक व्यय और कोषागार से निकासी की स्थिति की समीक्षा की।

संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर लंबित प्रक्रियाएं पूरी करने का निर्देश दिया गया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय-सीमा में राशि के उपयोग और आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा नहीं करने पर संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

इसके साथ ही सभी सिविल सर्जनों को डिजिटल हस्ताक्षर तैयार कराने का निर्देश दिया गया।

आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत कर्मियों की स्थिति की समीक्षा करते हुए विशेष सचिव ने निर्देश दिया कि सभी कर्मियों का पूरा विवरण तैयार किया जाए

तथा उनके प्रमाणपत्र संबंधित पोर्टल पर अपलोड किए जाएं। उन्होंने आउटसोर्सिंग मद में आवंटित राशि और अब तक हुए व्यय का ब्योरा भी उपलब्ध कराने को कहा।

उन्होंने बताया कि संबंधित व्यवस्था जल्द शुरू की जाएगी, जिसके माध्यम से कर्मियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज की जाएगी। इसके लिए दो चिकित्सकों को नोडल पदाधिकारी के रूप में नामित करने का निर्देश दिया गया।

साथ ही भविष्य में सभी कर्मियों के प्रमाणपत्र मानव संसाधन सूचना प्रणाली (एचआरआईएस) पोर्टल पर अपलोड करने और सभी की बायोमेट्रिक उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

बैठक में झारखंड के स्वास्थ्य संस्थानों की पुनर्संरचना के प्रस्ताव पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

विशेष सचिव ने कहा कि इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।

सभी जिलों से प्राप्त सुझावों और आकलन के आधार पर विभाग आगे की कार्ययोजना एवं निर्णय तय करेगा।

उन्होंने सिविल सर्जनों को निर्देश दिया कि वे अपने जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी), 30 एवं 50 बिस्तरों वाले स्वास्थ्य संस्थानों,

अनुमंडलीय अस्पतालों तथा जिला अस्पतालों में उपलब्ध चिकित्सकों और अन्य कर्मियों की संख्या का आकलन करें।

इसके साथ ही प्रत्येक संस्थान में आवश्यक चिकित्सकों एवं अन्य कर्मचारियों की संख्या का विवरण भी उपलब्ध कराएं।

विशेष सचिव ने ग्रेड-3 और ग्रेड-4 के कर्मचारियों की उपलब्धता की स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

यदि किसी स्वास्थ्य संस्थान में अतिरिक्त मानव संसाधन की आवश्यकता है, तो उसका ठोस प्रस्ताव भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।

उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार अतिरिक्त कर्मियों की उपलब्धता के लिए आउटसोर्सिंग तथा जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) के माध्यम से नियुक्ति की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है।

सभी सिविल सर्जनों को शुक्रवार तक अपने जिले में स्वीकृत एवं उपलब्ध पदों का विस्तृत ब्योरा देने का निर्देश दिया गया।

जिला अस्पतालों में ट्रॉमा सेंटर और आईसीयू की व्यवस्था होगी सुदृढ़

विशेष सचिव ने जिला अस्पतालों में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने सभी जिलों से ट्रॉमा सेंटर और गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) की वर्तमान स्थिति, उपलब्ध संसाधनों तथा आवश्यक सुविधाओं के संबंध में रिपोर्ट मांगी।

उन्होंने कहा कि कई बार गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए उच्चस्तरीय अस्पतालों तक पहुंचने में कठिनाई होती है।

ऐसी स्थिति में जिला स्तर पर ही अधिकाधिक आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाना चाहिए, ताकि मरीजों को समय पर समुचित उपचार मिल सके।

उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक जिला अस्पताल में उपलब्ध बिस्तरों का आकलन कर आवश्यकता के अनुसार 10 से 15 प्रतिशत बिस्तरों को आईसीयू और हृदय संबंधी गहन चिकित्सा सेवाओं के लिए सीसीयू में परिवर्तित करने की संभावनाओं पर विचार किया जाए।

जरूरत के अनुसार अतिरिक्त आईसीयू एवं सीसीयू स्थापित करने तथा नवजात शिशुओं के उपचार के लिए विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) की आवश्यकता का भी आकलन किया जाए।

सभी जिलों से इस संबंध में व्यावहारिक सुझाव मांगे गए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सके।

सदर अस्पतालों में डीएनबी पाठ्यक्रम शुरू करने की पहल

बैठक में सदर अस्पतालों में डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।

विशेष सचिव ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य जिला स्तर पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाना और मरीजों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है।

उन्होंने बताया कि शुरुआत में उच्च क्षमता वाले पांच से छह अस्पतालों को चिह्नित कर पायलट आधार पर योजना शुरू करने की दिशा में काम किया जाएगा।

अस्पतालों का चयन वहां उपलब्ध आधारभूत संरचना, चिकित्सकीय संकाय, ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर, शिक्षण कक्ष, पुस्तकालय, चिकित्सा उपकरणों तथा प्रमुख और छोटे ऑपरेशनों की संख्या जैसे मानकों के आधार पर किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि डीएनबी पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए प्रत्येक चयनित अस्पताल में कम से कम दो योग्य संकाय सदस्यों की उपलब्धता सहित आवश्यक शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय संसाधनों का आकलन किया जाना जरूरी है।

अस्पतालों में आवश्यक सुविधाओं की कमी होने पर उन्हें विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा।

ट्रॉमा सेंटरों को क्रियाशील बनाने पर जोर

विशेष सचिव ने कहा कि जिन जिलों में ट्रॉमा सेंटर का निर्माण हो चुका है, वहां उपलब्ध संसाधनों का आकलन कर उन्हें जल्द क्रियाशील बनाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं।

इसके लिए भवन, उपकरण, चिकित्सकों एवं अन्य कर्मियों की उपलब्धता की समीक्षा की जाए तथा जहां कमी है, वहां उसे दूर करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाए।

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