September 28, 2026

झारखंड में डॉक्टरों का बड़ा ऐलान, 22 अक्टूबर से राज्य स्तरीय कार्य बहिष्कार की चेतावनी

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चिकित्सकों का चरणबद्ध आंदोलन 5 अक्टूबर से,

राज्य भर के चिकित्सकों को आंदोलन के लिए बाध्य कर रही है सरकार: डाॅ प्रदीप कुमार सिंह 

RANCHI : झारखंड के चिकित्सा समुदाय की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर आईएमए भवन रांची में रविवार को  राज्य स्तरीय संयुक्त चिकित्सा संगठनों की  बैठक आयोजित की गई।

बैठक में विभिन्न चिकित्सा संगठनों के चिकित्सक प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। चर्चा के बाद Common Minimum Programme (CMP) को साझा एजेंडा के रूप में स्वीकार करते हुए मांगों के समाधान के लिए चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तय की गई।

बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में झारखंड आईएमए के अध्यक्ष डाॅ एके सिंह,  महासचिव डाॅ प्रदीप कुमार सिंह,  झासा के अध्यक्ष डाॅ बिमलेश सिंह और महासचिव ठाकुर मृत्युंजय कुमार सिंह,  डाॅ अभिषेक रामाधीन,  डाॅ अजीत कुमार ने संयुक्त रूप से अपनी मांगो के समर्थन में राज्य स्तरीय आंदोलन की घोषणा की।

झारखंड आईएमए के महासचिव डाॅ प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि सरकार जायज मांगों को पूरा नहीं कर राज्य भर के चिकित्सकों को आंदोलन के लिए बाध्य कर रही है।

डाॅ सिंह ने कहा कि वर्षो से सरकारी और गैर सरकारी चिकित्सकों की मांगों को पूरा नहीं कर पाई है। जिससे चिकित्सकों मे असंतोष व्याप्त है। और आर पार की लडाई को बाध्य है।

झारखंड आईएमए के अध्यक्ष डाॅ एके सिंह ने कहा कि आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी झारखंड के चिकित्सकों के मांगों को जायज बताया और समर्थन देने की बात कही। साथ ही झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि अगर झारखंड सरकार मांगों को पूरा नहीं करती है तो इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर पर उठाया जायेगा।

चिकित्सकों की प्रमुख मांगों में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा, Jharkhand Medical Protection Act का प्रभावी क्रियान्वयन तथा चिकित्सा संस्थानों में हिंसा की घटनाओं पर त्वरित कानूनी कार्रवाई शामिल है।

बैठक में Clinical Establishment Act में व्यावहारिक संशोधन की मांग भी उठाई गई।

चिकित्सक संगठनों ने राज्य सरकार की दो उच्चस्तरीय समितियों की अनुशंसाओं के अनुरूप 50 बेड तक के अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लिनिक को अधिनियम के दायरे से मुक्त करने तथा बड़े संस्थानों के लिए स्पष्ट और अनुपातिक नियामक व्यवस्था लागू करने की मांग की।

इसके अलावा सरकारी चिकित्सकों के लिए DACP/Dynamic ACP, समयबद्ध करियर प्रोग्रेशन, जूनियर डॉक्टरों की समस्याओं का समाधान, नियमित भर्ती कैलेंडर और आयुष्मान भारत के तहत उचित पैकेज रेट व समय पर भुगतान की मांग की गई।

आंदोलन के तहत 5 से 8 अक्टूबर तक जनजागरूकता अभियान, 9 अक्टूबर को ब्लैक बैज और राज्य स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस तथा 10 से 20 अक्टूबर तक जिला स्तरीय मोबिलाइजेशन किया जाएगा। 21 अक्टूबर को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन होगा।

यदि 21 अक्टूबर तक प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो संगठनों के संयुक्त निर्णय के अनुसार 22 अक्टूबर से सम्पूर्ण कार्य बहिष्कार शुरू करने की चेतावनी दी गई है। संगठनों ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करना है और Patient Care उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

बैठक में राज्य भर से सैकड़ो की संख्या में चिकित्सक,  मेडिकल कालेज के जूनियर डॉक्टर्स,  महिला चिकित्सक शामिल हुए और एकजुट होकर आंदोलन की घोषणा की।

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