October 12, 2026

डॉक्टरों का आंदोलन टलने की उम्मीद, अपर मुख्य सचिव के साथ वार्ता सकारात्मक

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10 चिकित्सा संगठनों के संयुक्त मंच ने कहा—पूजा के दौरान कार्य बहिष्कार टालने का होगा प्रयास, शुक्रवार को फिर होगी बातचीत

RANCHI:  झारखंड में डॉक्टरों के प्रस्तावित राज्यव्यापी आंदोलन के बीच सोमवार को स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में झासा, आईएमए समेत 10 चिकित्सा संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई।

अपर मुख्य सचिव के कार्यालय कक्ष में हुई इस बैठक में चिकित्सकों की विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। वार्ता का रुख सकारात्मक रहा और कई मुद्दों पर सहमति बनने की बात सामने आई।

ऐसे में पूजा के दौरान डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार को टालने की उम्मीद बढ़ी है, ताकि आम लोगों के स्वास्थ्य और इलाज पर इसका प्रतिकूल असर नहीं पड़े।

झारखंड के चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े 10 संगठनों ने संयुक्त चिकित्सा मंच के माध्यम से आंदोलन की रूपरेखा तैयार की। अपनी मांगों को लेकर डॉक्टर सोमवार से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने वाले थे।

हालांकि, अपर मुख्य सचिव ने जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए चिकित्सा संगठनों के प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया।

बैठक में दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक बातचीत हुई। चिकित्सा संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी मीडिया के सामने वार्ता को सकारात्मक बताया और अपनी मांगों पर आगे समाधान निकलने की उम्मीद जताई।

बैठक में विभाग की विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा, अपर सचिव  संदीप कुमार दोराईबुरू, संयुक्त सचिव  ललित मोहन शुक्ला, झासा के अध्यक्ष डॉ. विमलेश सिंह एवं सचिव डॉ. मृत्युंजय, एएचपीआई के अध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार, डॉ. शंभू प्रसाद सिंह सहित विभिन्न चिकित्सा संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

अपर मुख्य सचिव ने शुक्रवार को सभी संगठनों की एक बैठक बुलाई है। चिकित्सा संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि न्यूनतम साझा एजेंडे पर चर्चा के लिए शुक्रवार को अपर मुख्य सचिव से प्रतिनिधिमंडल फिर मिलेगा।

उन्हें उम्मीद है कि शेष मुद्दों पर भी सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।

प्रतिनिधियों ने संकेत दिया कि पूजा के माहौल में कार्य बहिष्कार को टालने का प्रयास किया जाएगा, ताकि मरीजों को इलाज में परेशानी न हो और जनस्वास्थ्य पर किसी तरह का असर नहीं पड़े।

बैठक में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया।

डॉक्टर संगठनों ने अस्पतालों के लिए निर्धारित बिस्तरों की संख्या में बदलाव की मांग की। इस संबंध में शहरी क्षेत्र में 50 और ग्रामीण क्षेत्र में 30 बिस्तरों की संख्या निर्धारित रखने का प्रस्ताव चर्चा में आया।

इसके अलावा, चिकित्सकों ने केंद्र सरकार और बिहार की तर्ज पर डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (डायनेमिक एसीपी) लागू करने की मांग की।

संगठनों का कहना है कि इससे चिकित्सकों को समय पर वित्तीय लाभ मिल सकेगा और उनकी सेवा संबंधी प्रगति सुनिश्चित होगी।

चिकित्सा संगठनों ने मेडिकल कॉलेज परिसरों में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए पुख्ता व्यवस्था करने की मांग की।

इसके साथ ही चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट बनाने की मांग भी उठाई गई।

अपर मुख्य सचिव श्री अजय कुमार सिंह ने कहा कि मेडिकल कॉलेज परिसरों में सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने अन्य मांगों पर भी नियमानुसार विचार करने और आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही।

बैठक में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत दूसरे स्तर के शहरों में स्थित अस्पतालों के लिए अलग भुगतान दर निर्धारित करने की मांग भी रखी गई।

इस विषय पर सकारात्मक चर्चा हुई। चिकित्सा संगठनों ने अस्पतालों को मिलने वाले भुगतान की दरों पर उचित विचार करने का आग्रह किया।

अपर मुख्य सचिव ने सभी प्रतिनिधियों की बातें सुनीं और मांगों पर नियमानुसार विचार कर उचित निर्णय लेने की बात कही।

शुक्रवार को उन्होंने संघ की अगली बैठक बुलाई है। अगली बैठक को इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संयुक्त चिकित्सा मंच की घोषित रूपरेखा के अनुसार, राज्य के जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और निजी स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़े करीब 20 हजार डॉक्टर आंदोलन में शामिल होने वाले थे।

इसके तहत 20 अक्टूबर तक काली पट्टी पहनकर मरीजों का इलाज करते हुए विरोध दर्ज कराने, 21 अक्टूबर को सांकेतिक हड़ताल और 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की घोषणा की गई थी।

डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में डायनेमिक एसीपी लागू करना, क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन और मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट बनाना शामिल है।

सोमवार की वार्ता के बाद चिकित्सा संगठनों ने सकारात्मक रुख दिखाया है। अब शुक्रवार को होने वाली बैठक में लिए जाने वाले निर्णयों पर नजर रहेगी।

यदि मांगों पर सहमति बनती है, तो पूजा के दौरान कार्य बहिष्कार टालने और मरीजों की चिकित्सा सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रखने का रास्ता निकल सकता है।

हालांकि, आंदोलन औपचारिक रूप से स्थगित या वापस लेने की घोषणा अभी नहीं हुई है।

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