झारखंड में सिकल सेल एनीमिया आदिवासी बहुल इलाकों में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या

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विश्व सिकल सेल जागरूकता दिवस 19 जून पर विशेष 

RANCHI: झारखंड में सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Disease) आदिवासी बहुल इलाकों में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, खासकर कोल्हान क्षेत्र (पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां) में।

19 जून को हर साल विश्व सिकल सेल जागरूकता दिवस मनाया जाता है। इस बीमारी से संबंधित जांच , इलाज  और बचाव के प्रति आम लोगों को जागरूक किया जाता है ताकि इस बीमारी के फैलाव को रोका जा सके

हालांकि राज्य में कुल मरीजों की सटीक संख्या अभी उपलब्ध नहीं है। 2025 में झारखंड सरकार ने स्वयं स्वीकार किया था कि किसी भी जिले में सिकल सेल मरीजों का पूरा और सटीक डेटा मौजूद नहीं है, इसलिए राज्यव्यापी स्क्रीनिंग अभियान शुरू किया गया।

कुछ प्रमुख आंकड़े:

  • Rajendra Institute of Medical Sciences, रांची के सिकल सेल रजिस्ट्री में 2022 से 2025 के बीच 334 मरीज दर्ज किए गए थे। इनमें लगभग 46% मरीज अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय से थे।
  • राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार केवल रांची जिले में 1,381 सिकल सेल मरीज दर्ज किए गए थे, लेकिन इनमें से 225 ही नियमित इलाज ले रहे थे।
  • 2025-26 में झारखंड सरकार ने पूरे राज्य की आबादी की स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा ताकि वास्तविक मरीजों और कैरियर (Trait) की संख्या का पता लगाया जा सके।

संक्षेप में, झारखंड में सिकल सेल एनीमिया के हजारों मरीज होने का अनुमान है, लेकिन अभी राज्य के पास पूरी और अंतिम संख्या उपलब्ध नहीं है। इसी कारण बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है।

सिकल सेल एनीमिया कोई संक्रामक बीमारी नहीं है, इसलिए यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती नहीं है। यह एक आनुवंशिक (Genetic) बीमारी है, जो माता-पिता से बच्चों में जीन के जरिए पहुंचती है।

इस बीमारी के मामलों को कम करने के लिए ये कदम महत्वपूर्ण हैं:

सिकल सेल स्क्रीनिंग: युवाओं और विशेष रूप से आदिवासी बहुल क्षेत्रों में जांच कर यह पता लगाना कि कौन व्यक्ति सिकल सेल ट्रेट (वाहक) है।

विवाह-पूर्व परामर्श: यदि दोनों होने वाले जीवनसाथी सिकल सेल ट्रेट के वाहक हैं, तो उन्हें बीमारी के जोखिम के बारे में जानकारी दी जाए।

गर्भावस्था के दौरान जांच: उच्च जोखिम वाले दंपतियों में भ्रूण की जांच कर बीमारी की पहचान की जा सकती है।

जनजागरूकता अभियान: लोगों को सिकल सेल रोग, उसके लक्षण और आनुवंशिक विरासत के बारे में शिक्षित करना।

नियमित स्वास्थ्य सेवाएं: मरीजों की समय पर पहचान और इलाज से जटिलताओं को कम किया जा सकता है।

यदि माता और पिता दोनों सिकल सेल ट्रेट के वाहक हों, तो प्रत्येक गर्भावस्था में बच्चे को सिकल सेल रोग होने की संभावना 25% होती है।

इसलिए स्क्रीनिंग और आनुवंशिक परामर्श इस बीमारी को नियंत्रित करने के सबसे प्रभावी उपाय माने जाते हैं।

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