समय पर उपचार एवं टीकाकरण से रेबीज से बचाव संभव: डाॅ प्रभात कुमार
विश्व रेबीज जागरूकता दिवस पर सदर अस्पताल राँची में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
RANCHI: विश्व रेबीज जागरूकता दिवस के अवसर पर सदर अस्पताल, राँची में सोमवार को रेबीज की रोकथाम एवं बचाव को लेकर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन सदर अस्पताल राँची में किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य आमजनों को रेबीज के प्रति जागरूक करना तथा पशु के काटने या खरोंचने के बाद अपनाए जाने वाले तत्काल उपायों, समय पर चिकित्सकीय परामर्श एवं टीकाकरण के महत्व की जानकारी देना था।
इस अवसर पर डायरेक्टर सह राज्य नोडल पदाधिकारी, राष्ट्रीय रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम (NRCP) डॉ. प्रभात कुमार, सिविल सर्जन राँची डॉ. अमरेंद्र प्रसाद, राज्य नोडल पदाधिकारी IEC डॉ. राहुल किशोर, राज्य महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण कर्ण, डॉ. मनोज कुमार,HOD, माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट, RIMS डॉ. सैमसन टोप्पो, डिप्टी डायरेक्ट एनिमल हस्बैंडरी डिपार्टमेंट,डॉ. बी.एन. चौरसिया, जॉइंट डायरेक्ट,
एनिमल हस्बैंडरी डिपार्टमेंट, डॉ. निशांत सिंह वेटरनरी ऑफिसर, राँची म्युनिसिपल कारपोरेशन , जिला सर्विलांस पदाधिकारी डॉ. अरविंद कुमार, जिला महामारी विशेषज्ञ डॉ. राजीव भूषण,
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी प्रवीण कुमार सिंह, प्रीति चौधरी, हैदर अली सहित अन्य पदाधिकारी एवं स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।
इस वर्ष विश्व रेबीज दिवस की थीम “ एक साथ मिलकर मजबूत” रखी गई है।

यह संदेश इस बात पर जोर देता है कि रेबीज का उन्मूलन तभी संभव है, जब स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन विभाग, स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्यकर्मी एवं आमजन मिलकर सामूहिक रूप से प्रयास करें।
सिविल सर्जन राँची डॉ. अमरेंद्र प्रसाद ने कहा कि रेबीज की रोकथाम में पशु के काटने के बाद के शुरुआती मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।
कुत्ते या किसी अन्य संभावित संक्रमित पशु के काटने या खरोंचने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से लगभग 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए।
इसके बाद बिना किसी देरी के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि रेबीज के लक्षण विकसित होने के बाद यह बीमारी लगभग हमेशा जानलेवा होती है, लेकिन पशु के काटने के बाद समय पर उचित चिकित्सा, चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एंटी-रेबीज टीकाकरण तथा आवश्यकतानुसार अन्य उपचार अपनाकर इससे बचाव संभव है।
उन्होंने आमजनों से अपील की कि पशु के काटने या खरोंचने की घटना को हल्के में न लें और तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें।
डायरेक्टर सह राज्य नोडल पदाधिकारी, राष्ट्रीय रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम (NRCP) डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि सही जानकारी और व्यापक जनजागरूकता के माध्यम से रेबीज की रोकथाम संभव है।
पशु के काटने के बाद घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि तत्काल घाव को साबुन एवं बहते पानी से धोकर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि रेबीज से होने वाली मृत्यु के मामलों की रिपोर्टिंग कई बार नहीं हो पाती है।
इसलिए रेबीज से संदिग्ध अथवा संबंधित मृत्यु के मामलों की समय पर अनिवार्य रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में 24×7 एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में भी वैक्सीन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
आने वाले दिनों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) स्तर तक भी एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों में वाउंड वॉशिंग एरिया की व्यवस्था होना आवश्यक है, ताकि पशु के काटने के बाद मरीज को तत्काल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
राज्य महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण कर्ण ने बताया कि 22 से 28 सितम्बर के बीच रेबीज से बचाव को लेकर विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि रेबीज से बचाव के लिए संपूर्ण जानकारी और समय पर टीकाकरण बेहद महत्वपूर्ण है।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक रेबीज से होने वाली मौतों को समाप्त करना है।
उन्होंने कहा कि ‘वन हेल्थ’ के दृष्टिकोण से मानव, पशु एवं पर्यावरण से जुड़े सभी विभागों तथा समुदायों को मिलकर सामूहिक प्रयास करना होगा, तभी रेबीज से होने वाली मौतों को प्रभावी रूप से रोका जा सकेगा।
डॉ. मनोज कुमार HOD माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट, RIMS ने कहा कि रेबीज वायरस से होने वाली गंभीर बीमारी है। यदि किसी व्यक्ति को कुत्ते अथवा किसी अन्य पालतू या संभावित संक्रमित जानवर ने काटा या खरोंचा है, तो चिकित्सकीय सलाह के अनुसार रेबीज का पूरा टीकाकरण कराना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पशु के काटने के बाद जल्द से जल्द डॉक्टर से परामर्श लेकर आवश्यक उपचार एवं टीकाकरण शुरू कराना चाहिए।
राज्य नोडल पदाधिकारी IEC डॉ. राहुल किशोर ने कहा कि रेबीज से बचाव के लिए जनजागरूकता के साथ-साथ जनसहभागिता भी बेहद जरूरी है।
यदि घर में पालतू जानवर रखा जाता है, तो उसका समय पर वैक्सीनेशन कराया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जानवर के काटने के बाद किसी भी प्रकार का घरेलू अथवा स्वयं से उपचार करने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
डॉ. बी.एन. चौरसिया जॉइंट डायरेक्ट, एनिमल हस्बैंडरी डिपार्टमेंट ने कहा कि रेबीज की रोकथाम के लिए जागरूकता को स्कूली शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता है।
स्कूली स्तर पर बच्चों को रेबीज के कारण, बचाव के उपाय तथा पशु के काटने के बाद किए जाने वाले तत्काल उपायों की जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रिवेंशन और जागरूकता के माध्यम से रेबीज की रोकथाम को प्रभावी बनाया जा सकता है।
डॉ. सैमसन टोप्पो डिप्टी डायरेक्ट एनिमल हस्बैंडरी डिपार्टमेंट ने बताया कि रेबीज से बचाव में पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसमें घाव का उचित प्रबंधन, आवश्यकतानुसार रेबीज वैक्सीन तथा कुछ गंभीर प्रकार के संपर्क में रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि उचित घाव प्रबंधन और गुणवत्तापूर्ण PEP की समय पर उपलब्धता मानव रेबीज से होने वाली मृत्यु को लगभग पूरी तरह रोकने में सक्षम है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित स्वास्थ्यकर्मियों एवं आमजनों को रेबीज के संक्रमण, पशु के काटने एवं खरोंचने के बाद किए जाने वाले प्राथमिक उपाय, समय पर चिकित्सकीय परामर्श एवं टीकाकरण तथा पालतू जानवरों के नियमित टीकाकरण के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई।
सिविल सर्जन राँची ने आमजनों से अपील की है कि पशु के काटने या खरोंचने की घटना को कभी भी हल्के में न लें।
घाव को तुरंत साबुन एवं बहते पानी से अच्छी तरह धोएं और बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लें। समय पर सही उपचार, उचित घाव प्रबंधन और निर्धारित टीकाकरण से रेबीज से बचाव संभव है।
कार्यक्रम में आगे अंत में जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री प्रवीण कुमार सिंह ने सबका धन्यवाद ज्ञापन कर कार्यक्रम का समापन किया।
