हरी सब्जियों की खेती में वेस्ट वॉटर प्रयोग में लाया जा रहा

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-सब्जियों में हैवी मेटल्स की मात्रा है बहुत ही ज्यादा

नई दिल्ली । हरी सब्जियों की खेती में वेस्ट वॉटर का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसके कारण सब्जियों में हैवी मेटल्स की मात्रा बहुत ही ज्यादा हो गई है। यह लेवल फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन के द्वारा तय की गई लिमिट से बहुत ही ज्यादा है। ऐसे में यह सभी के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। यह खुलासा किया है बैंगुलरु के सब्जी बाजारों को लेकर एनवायरमेंट मैनेजमेंट एंड पॉलिसी रिसर्च के रिसर्चर्स ने।

अध्ययनकर्ताओं ने इस स्टडी में बैंगलुरु के अलग-अलग स्त्रोतों से 400 सब्जियों के सैंपल इक्ट्ठा किए गए। इनमें 5 हाई एंड सुपरमार्केट, 5 लोकल मार्केट, आर्गेनिक स्टोर और हॉपकॉम्स की सब्जियों को शामिल किया गया था। इन सब्जियों में हैवी मैटल्स कितनी मात्रा में मौजूद हैं इसका पता करने के लिए बैंगन टमाटर शिमला मिर्च, बीन, गाजर, हरी मिर्च, प्याज, आलू, पालक और धनिया सहित 10 सब्जियां शामिल की गई। आयरन की परमीसिबल लिमिट 425.5 मिलीग्राम/किलोग्राम तय होती है। ऐसे में मशहूर ऑर्गेनिक स्टोर से खरीदी गई फलियों में आयरन की मात्रा 810.20 मिलीग्राम/किलोग्राम दर्ज की गई है। वहीं इसी तरह धनिया में 945.70 मिलीग्राम/किलोग्राम और पालक में 554.8 मिलीग्राम/किलोग्राम आयरन की मात्रा दर्ज की गई है। इसके साथ ही हॉपकॉम्स में से खरीदी गई सब्जियों में प्याज में 592.18 मिलीग्राम/किलोग्राम आयरन मौजूद था।

ऐसे में शोधकर्ताओं का कहना यही है कि सब्जियां चाहें कहीं भी हो वो स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं हैं। रिसर्चर ने कहा कि हैवी मेटल्स का मानव शरीर पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। इसके चलते शरीर में कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं जैसे – एनीमिया, बच्चों और बड़ों में मोटापा, हार्ट डिजीज, हड्डियों की बीमारी, फेफड़ों बीमारी, लीवर की बीमारी, इम्यून सिस्टम प्रभावित, लिवर कैंसर और शारीरिक विकलांगता आदि।यदि आप कर्नाटक में रहते हैं और आपको बीन्स बहुत ही अच्छी लगती हैं तो खरीदने से पहले इसकी क्वालिटी का ध्यान रखें। क्योंकि बीन्स में भारी मात्रा में लेड पाया गया है।

लेड एक जहर माना जाता है इसकी किसी भी सब्जी में मात्रा 0.3 मिलीग्राम/किलोग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। वहीं सुपरमॉर्केट में बिकने वाली बीन्स में करीबन 12.20 मिलीग्राम/किलोग्राम लेड पाया गया है। जिससे यह सब्जी उन लोगों के लिए खतरा बन गई हैं जो नियमित तरीके से इसका सेवन करते हैं। ऐसे करें सब्जियों की जांच – सब्जी का रंग यदि बदला हुआ दिखता है मुख्य तौर पर अगर इस पर काले धब्बे हैं तो इसका अर्थ है कि इसमें हैवी मैटल्स मौजूद हैं। इसके अलावा यदि सब्जियां चिपचिपी और गूदेदार हैं तो उन्हें खरीदने से बचें। आमतौर पर सब्जियों को खरीदते समय महिलाएं सूंघती नहीं है परंतु यदि सब्जियों में से तीखी गंध आए तो उन्हें न ही खरीदें।

इसके अलावा यदि सब्जी की सतह पर आपको किसी तरह का दाग दिखे तो समझ जाएं कि ताजी नहीं है और इसमें मेटल्स मौजूद हैं। इसके अलावा जब भी संभव हो सब्जियों को अच्छी तरह से धोकर छीलें। इससे इसमें मौजूद पदार्थों को हटाने में मदद मिलेगी। बता दें कि ताजी और हरी सब्जियां स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी मानी जाती हैं यह तो सब जानते हैं लेकिन हाल ही में हुई रिसर्च आपको दुविधा में डाल सकती है।

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