October 18, 2026

चिकित्सकों की मांगों के समाधान के लिए 14 दिसंबर तक की समय-सीमा, मांगें पूरी नहीं होने पर 15 दिसंबर से कार्य बहिष्कार

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RANCHI: झारखंड के चिकित्सकों की लंबित मांगों के समाधान को लेकर अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य के टीम के साथ हुई बैठक

और उनके द्वारा किए गए समाधान के निर्णय और आग्रह पर आज आयोजित ऑनलाइन (Zoom) बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि राज्य सरकार को मांगों को पूरा करने के लिए 14 दिसंबर 2026 तक का समय दिया जाएगा।

यदि निर्धारित समय-सीमा तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है और उनका समाधान नहीं किया जाता है, तो 15 दिसंबर 2026 से राज्यभर के चिकित्सक सीधे कार्य बहिष्कार आंदोलन शुरू करेंगे।

बैठक में चिकित्सक संगठनों ने स्पष्ट किया कि चिकित्सकों की मांगें केवल किसी एक संगठन या वर्ग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने,

चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, सेवा शर्तों में सुधार करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु रूप से संचालित करने से जुड़ी हैं।

चिकित्सकों की प्रमुख मांगों में झारखंड मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन, क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट (CEA) में आवश्यक संशोधन,

डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (DACP), जूनियर चिकित्सकों की समस्याओं का समाधान,

ट्रेनी रिजर्व पोस्ट (TRP) से संबंधित व्यवस्था तथा लाइसेंस एवं अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू करना शामिल है।

महिला चिकित्सकों के लिए मातृत्व अवकाश एवं कार्यस्थल पर सुरक्षा भी प्रमुख मुद्दे हैं।

इसके अतिरिक्त, सामान्य चिकित्सकों, दंत चिकित्सकों एवं दोनों संवर्गों के विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए समयबद्ध करियर प्रगति, केंद्र सरकार एवं बिहार की तर्ज पर DACP व्यवस्था,

जूनियर चिकित्सकों की संविदा नियुक्ति संबंधी समस्याओं का समाधान,

‘Jharkhand First’ नीति, नियमित नियुक्तियों के लिए भर्ती कैलेंडर तथा मेडिकल छात्रों एवं दंत चिकित्सकों की समस्याओं का समाधान भी कॉमन मिनिमम प्रोग्राम (CMP) के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

चिकित्सक संगठनों ने आयुष्मान भारत एवं PM-JAY के अंतर्गत अस्पतालों के लंबित भुगतान, उपचार पैकेज की दरों की समीक्षा, HEM 2.0 से संबंधित समस्याओं तथा भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने की मांग भी उठाई है।

स्वास्थ्य संस्थानों के पंजीकरण एवं लाइसेंस संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाने, अनावश्यक प्रशासनिक विलंब समाप्त करने तथा सिंगल विंडो सिस्टम के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया है।

चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए झारखंड मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन, अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना, हिंसा एवं धमकी की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई तथा शिकायतों के निवारण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक बताया गया है।

महिला चिकित्सकों के लिए मातृत्व अवकाश, कार्यस्थल पर सुरक्षा, रात्रिकालीन ड्यूटी के दौरान सुरक्षित वातावरण तथा सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों की मांग भी प्रमुखता से रखी गई है।

चिकित्सक संगठनों ने स्वास्थ्य विभाग एवं चिकित्सक संगठनों के बीच संस्थागत समन्वय स्थापित करने, संयुक्त समन्वय समिति के माध्यम से मांगों की नियमित समीक्षा करने,

प्रत्येक मुद्दे पर स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित करने तथा कार्रवाई की प्रगति के लिए लिखित Action Taken Report (ATR) उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी बल दिया है।

चिकित्सक संगठनों ने स्पष्ट किया कि यदि 14 दिसंबर तक मांगों का समाधान नहीं होता है, तो 15 दिसंबर 2026 से कार्य बहिष्कार का निर्णय लागू किया जाएगा।

केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि सभी सहमत एवं लंबित मांगों पर ठोस निर्णय और प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक होगा।

चिकित्सक संगठनों ने राज्य सरकार से अपील की है कि वह निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी लंबित मुद्दों पर सकारात्मक एवं ठोस निर्णय लेकर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था,

चिकित्सकों की सुरक्षा, सेवा शर्तों में सुधार तथा मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के हित में आवश्यक कदम उठाए।

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