रिम्स के सफाई टेंडर में गड़बड़झाला, तकनीकी रूप से अयोग्य एजेंसियों को क्वालिफाई करने पर उठे सवाल

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14 एजेंसियों में से सिर्फ तीन को किया गया क्वालिफाई, शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप

RANCHI: रिम्स में पूर्ण स्वच्छता, हाउसकीपिंग, नगर कचरा प्रबंधन और बायोमेडिकल वेस्ट हैंडलिंग से जुड़े टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।

लखनऊ की एजेंसी सन फैसिलिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने रिम्स प्रबंधन को पत्र लिखकर चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं और तकनीकी मूल्यांकन की पुनः जांच की मांग की है।

पत्र के अनुसार, टेंडर संख्या 4586 (दिनांक 09.10.2025) के तहत निकाली गई निविदा में कुल 14 एजेंसियों ने भाग लिया था।

तकनीकी बिड 6 नवंबर 2025 को खोली गई थी और 30 दिसंबर 2025 को परिणाम जारी किया गया।

इसमें केवल तीन एजेंसियों को तकनीकी रूप से योग्य घोषित कर दिया गया। शिकायतकर्ता एजेंसी का आरोप है कि एनआईटी की शर्तों के अनुसार संबंधित कार्य के लिए पिछले तीन वित्तीय वर्षों में न्यूनतम 10 करोड़ रुपये का औसत वार्षिक टर्नओवर अनिवार्य था।

जबकि चयनित एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत टर्नओवर प्रमाणपत्र ओवरऑल टर्नओवर का है, जो हाउसकीपिंग, सेनेटेशन और बायोमेडिकल वेस्ट हैंडलिंग जैसे विशेष कार्यों के लिए मान्य नहीं माना जा सकता।

इसके अलावा, एनआईटी के अनुसार अस्पतालों में कम से कम 3 वर्षों का अनुभव और 500 बेड वाले अस्पताल में कार्य अनुभव आवश्यक था। आरोप है कि चयनित एजेंसियां इस संबंध में वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकीं।

जिलाधिकारी के हस्ताक्षर पर भी उठे सवाल
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि एक एजेंसी द्वारा प्रस्तुत अनुभव प्रमाणपत्र विवादित है। प्रमाणपत्र पर जिला दंडाधिकारी के हस्ताक्षर बताए गए हैं, लेकिन उस समय वहां कार्यरत डीएम कोई और थे, जिससे प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहें हैं।

एमएसएमई छूट में नियमों की अनदेखी का आरोप
एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश की एमएसएमई पंजीकृत एजेंसियों को ईएमडी (अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट) में छूट दी गई, जबकि झारखंड प्रोक्योरमेंट पॉलिसी के अनुसार यह छूट केवल झारखंड राज्य में पंजीकृत एमएसएमई इकाइयों को ही दी जा सकती है।

लेबर लाइसेंस भी नहीं किया गया जमा
एनआईटी की शर्तों के अनुसार चयनित एजेंसियों को लेबर लाइसेंस और केमिकल स्टोरेज लाइसेंस जमा करना अनिवार्य था।

पत्र में दावा किया गया है कि तीनों चयनित एजेंसियों ने लेबर लाइसेंस प्रस्तुत नहीं किया, इसके बावजूद उन्हें तकनीकी रूप से योग्य घोषित कर दिया गया।

पुनर्मूल्यांकन की मांग
शिकायत करने वाली एजेंसी ने रिम्स प्रबंधन से मांग की है कि पूरे टेंडर प्रक्रिया की पुनः समीक्षा की जाए, सभी एजेंसियों के मूल दस्तावेजों की जांच हो और दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाए।

पत्र में यह भी कहा गया है कि वर्तमान मूल्यांकन प्रक्रिया रिम्स जैसी प्रतिष्ठित संस्था की छवि को नुकसान पहुंचा रही है।

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