रिम्स के रेडियोलॉजी विभाग में सी.टी और अल्ट्रासाऊंड गाइडेड प्रक्रिया से मरीजों को मिल रहा लाभ

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RANCHI: रिम्स के रेडियोलॉजी विभाग में अल्ट्रासाउंड एवं सी.टी की मदद से की गई प्रक्रियाएं आम हो गई है। इससे मरीजों को काफ़ी लाभ मिल रही है।
इस प्रक्रिया के अंतर्गत बहुत बीमारियों की जांच एवं इलाज संभव है। बीमारी की जांच (Biopsy/FNAC) के लिए अल्ट्रासाउंड एवं सी.टी के निगरानी में सटीक तरीके से विभिन्न अंगों की छोटी कोशिकाओं को निकाला जाता है।

इससे रिम्स में कई इलाज की जा रही है – जैसे कि Gall Bladder, Pancreas, CBD, कैंसर के मरीजों के लिए PTBD; किसी अंग में भरे मवाद को निकालने के लिए Percutaneous Drainage (PCD); Hemangioma के इलाज के लिए Sclerotherapy; Intusucception के बच्चों का Hydroreduction इत्यादि जैसे अन्य इलाजें भी शामिल है।

हाल ही में रेडियोलोजी विभाग के सीनियर रेसीडेंट डॉक्टर असीम मित्र द्वारा एक जटिल बायोप्सी की प्रक्रिया को सफल तरीके से संपन्न की गई

इसमें मरीज के छाती में हुई ट्यूमर (Mediastinal Mass) के कोशिकाओं का नमूना लिया गया जो कि हृदय के काफ़ी करीब थी। बायोप्सी करने वाली टीम में रेसीडेंट डॉक्टर रुचि पांडे, सीनियर रेडियोग्राफर एवं सिस्टर का भी सहयोग रहा।

रेडियोलोजी के विभागीय अध्यक्ष (H.O.D) डॉक्टर प्रोफेसर सुरेश टोप्पो ने बताया कि इन प्रक्रियाओं से मरीजों को बिना चीड़ा लगाए बीमारी के प्रकार एवं स्तर (Stage/Extent) को पता लगाया जा सकता है जो कि विभिन्न विभाग के डॉक्टर को सटीक इलाज के लिए मददगार साबित होती है।
इन अल्ट्रासाऊंड या सी.टी गाइडेड प्रक्रिया के द्वारा की गई इलाज से मरीज को अस्पताल में ज्यादा दिन नहीं रहना पड़ता है।

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