आईरिस सुपर स्पेशियलिटी आई अस्पताल में 11 दिसंबर को स्थापना दिवस पर नेशनल सीएमई

 

एम्स,नई दिल्ली एवं महाराष्ट्रा  के प्रतिष्ठित डॉक्टर एवं अनुभवी वक्ता अपना अनुभव स्थानीय डॉक्टर्स के साथ करेंगे साझा

अस्पताल के स्थापना के दो वर्षों में एक लाख से ज्यादा मरीजों को ओपीडी में परामर्श एवं लगभग 11 हजार से ज्यादा सर्जरी की गयी

RANCHI: आईरिस सुपर स्पेशियलिटी आई अस्पताल, लाईन टैंक रोड के स्थापना के दो वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में 11 दिसंबर को  नेशनल सीएमई का आयोजन किया जायेगा।

जिसमें एम्स,नई दिल्ली एवं महाराष्ट्रा  के प्रतिष्ठित डॉक्टर एवं अनुभवी वक्ता अपना अनुभव स्थानीय डॉक्टर्स के साथ साझा करेंगे।

एम्स के डॉ वरुण गोगिया एवं महाराष्ट्रा के डॉ सौरभ पटवर्धन सहित अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर्स शामिल होंगे। जिससे झारखंड के लोगों का आंखों के क्षेत्र में और भी अच्छे से उपचार संभव हो सके और लाभ पहुंचे।

इसके साथ ही आठ लोगों का लाइव सर्जरी भी किया जायेगा।  सभी  लाइव सर्जरी मुफ्त में की जायेगी।

अस्पताल में आयोजित प्रेसवार्ता में कंसल्टेंट विट्रो रेटिना सर्जन मैनेजिंग पार्टनर डॉ सुबोध कुमार सिंह,पार्टनर सिद्धांत जैन ने संयुक्त रुप से उक्त जानकारी दी।

सिद्धांत जैन ने बताया कि आईरिस सुपर स्पेशियलिटी आई अस्पताल के स्थापना के दो वर्षों में एक लाख से ज्यादा मरीजों को ओपीडी में परामर्श दिया गया है।

जिसमें लगभग 11 हजार से ज्यादा सर्जरी की गयी है। पार्टनर सिद्धांत जैन ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार  अस्पताल में इलाज के साथ साथ ज्यादा मेडिकल एजुकेशन एवं  रिसर्च कार्य किये जायेेगे।

ताकि स्थानीय डॉक्टर्स नये तकनीक सीख सकें। श्री जैन ने बताया कि अस्पताल आय़ुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध है। आय़ुष्मान भारत के मरीज और प्राइवेट मरीजों के इलाज एक समान किया जाता है।

कोई भेदभाव नहीं है। डॉ सुबोध कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल के स्थापना के समय ही निर्णय लिया गया था कि इलाज के साथ साथ मेडिकल एजुकेशन और रिसर्च पर भी कार्य करना है।

ताकि मरीजों एवं डॉक्टर्स  का पलायन रोका जा सके। इन दो वर्षों में दो हजार से ज्यादा मरीजों का इलाज किया गया जिसमें झारखंड, बिहार, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ एवं उत्तर प्रदेश के आंख के अस्पताल से आईरिस आई अस्पताल रेफर किये गये थे।

अस्पताल में इन दो वर्षों में रेटिना फेलोशिप, मोतियाबिंद फेलोशिप, इंटर्न फेलोशिप, आप्टोमेट्रिस्ट ट्रेनिंग प्रोग्राम भी शुरु किया गया।

एक प्रश्न के उत्तर में डॉ सुबोध कुमार सिंह ने बताया कि सस्ते लेंस और मंहगे लेंस दोनों में आंख के रोशनी समान होता है।

मंहगे लेंस में मरीज के कंडिशन के आधार पर लेंस रिक्यूमेंड किया जाता है किसी किसी मरीज के आंख में सिलिडर पावर में करेक्शन भी करना है तो टोरिक लेंस लगाने से मरीज को नजदीक के साथ साथ साथ दूर के विजन में भी आसानी होती है।

वही ट्राई फोकल लेंस, मोनो फोकल लेंस, मल्टी फोकल लेंस जरुरत के अनुसार लगाया जाता है जो सस्ते लेंस में नहीं होता है। प्रेसवार्ता में डॉ गोपाल जी सिंह (कन्सलेंट एवं रिफ्रैक्टिव सर्जन) उपस्थित थे।

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