पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट को सख्ती से लागू कराने की जरूरत: अपर अभियान निदेशक

 

लिंग परीक्षण के मुखबिर को मिलेगा एक लाख रुपये का इनाम

RANCHI: पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट को सख्ती से लागू कराने के लिए सभी सिविल सर्जन और कार्यपालक दंडाधिकारियों को दिया गया प्रशिक्षण, निरीक्षण और कानूनी प्रक्रिया की दी गई जानकारी

स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव सह अपर अभियान निदेशक विद्या नंद शर्मा पंकज ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या और गिरते लिंगानुपात को रोकने के उद्देश्य से पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट को सख्ती से लागू किया जाना जरूरी है।

इस एक्ट के किसी भी प्रावधान के उल्लंघन करने पर सजा का प्रावधान है।

वह बुधवार को नामकुम स्थित आईपीएच सभागार में गर्भ धारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम (पीसी एंड पीएनडीटी) एक्ट 1994 के प्रावधानों को राज्यभर में सख्ती से लागू करने के लिए आयोजित एक दिवसीय उन्मुखीकरण सह कार्यशाला में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि अवैध रूप से संचालित अल्ट्रासाउंड क्लीनिकों पर कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

जिला स्तर से इसके लिए कार्रवाई की जानी है। उन्होंने कहा कि अभी हाल में निरीक्षण कर कोडरमा, गुमला, गिरिडीह आदि जिलों में कार्रवाई की गई है।

इस कार्यशाला में सभी जिलों के सिविल सर्जन, सहायक नोडल और उपायुक्त द्वारा नामित जिलों के वरीय कार्यपालक दंडाधिकारी शामिल हुए।

उपनिदेशक सह कोषांग प्रभारी डॉ अनिल कुमार ने विषय प्रवेश कराया एवं झारखंड के संदर्भ में पीसी एंड पीएनडीटी के कार्यान्वयन के बारे में विस्तार से बताया।
प्रोग्राम मैनेजमेंट स्पेशलिस्ट(यूएनएफपीए) अनुजा गुलाटी ने पीसी एंड पीएनडीटी के विभिन्न कानूनी पक्ष, इस कानून में हुए हालिया बदलाव, अल्ट्रासाउंड क्लीनिकों के पंजीयन और निरीक्षण के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की कन्सल्टेंट इफत हमीद ने अल्ट्रासाउंड क्लीनिकों के सर्च, सील, केस फाइल एवं अथॉरिटी के कार्य एवं दायित्व पर विस्तार से बताया।

मौके पर पीसी एंड पीएनडीडी एक्ट कोषांग की राज्य समन्वयक रफत फरजाना ने पीसी एंड पीएनडीटी के दस्तावेजों के रख रखाव के बारे में जानकारी दी।

पीसी एंड पीएनडीटी के एम एंड ई कोर्डिनेटर दिवाकर कुमार, संजय, मनोरमा एवं पूनम ने भी सहयोग किया।

लिंग जांच की मुखबिरी करने पर एक लाख रुपये का है प्रावधान
झारखंड में लिंगानुपात को संतुलित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

भ्रूण लिंग परीक्षण पर पूरी तरह से अंकुश लगाने की दृष्टि से जांच अभियान को और तेज किया जा रहा है।

इस एक्ट को और प्रभावशाली बनाने के लिए राज्य में मुखबिर योजना का संचालन किया जा रहा है।

भ्रूण लिंग जांच करने वाले संस्थानों को चिन्हित करते हुए उनके विरुद्ध कार्रववाई किया जाना है।

मुखबिर योजना के तहत मुखबिर, गर्भवती महिला तथा सहयोगी हेतु एक लाख रुपए प्रोत्साहन राशि का प्रावधान है।

लिंग निर्धारण कानून के विरुद्ध है

अनुजा गुलाटी ने कहा कि दंपति यह फैसला ले सकते हैं कि उनके कितने बच्चे हों और कितने अंतराल में हों लेकिन लिंग निर्धारण का अधिकार उन्हें कतई नहीं है।

उन्होंने कहा कि झारखण्ड का लिंगानुपात जनगणना 2011 के अनुसार 948 है अर्थात 1000 लड़कों में लड़कियों की संख्या 948 है। यह समाज में अच्छे संकेत नहीं है।

उन्होंने बताया कि जांच करने वाले चिकित्सक, संकेतों या चिन्हों के माध्यम से भी यह नहीं बता सकते हैं

कि गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की है। उन्होंने बताया कि ऐसा करने वालों के विरुद्ध कड़े कानूनी प्रावधान हैं।

इफत हमीद ने कहा कि लिखित या मौखिक सूचना प्राप्त होने पर दंडाधिकारी के साथ संस्थानों में जाकर रजिस्टर, इक्यूपमेंट्स, लाइसेंस की जांच करें एवं यह भी देखें कि जितनी मशीन की जानकारी दी गई है, क्या उससे अधिक है क्या। नियम पालन नहीं करने वाले संस्थानों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करें।

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