परिवार नियोजन अपना कर पुरूष निभाएंगे अपनी जिम्मेदारी: निदेशक प्रमुख

 

राज्य स्तरीय पुरूष नसबंदी अभियान 2022 का आगाज

21 नवंबर से 20 दिसंबर तक राज्य भर में चलेगा कार्यक्रम

RANCHI: अब पुरूष निभाएंगे जिम्मेदारी, परिवार नियोजन अपनाकर दिखाएंगे अपनी भागीदारी…इसी थीम के साथ सोमवार को पुरूष नसबंदी अभियान की राज्य स्तरीय शुरुआत हुई।

कार्यक्रम का आयोजन सदर अस्पताल, रांची में किया गया।

मुख्य अतिथि निदेशक प्रमुख डॉ कृष्ण कुमार ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

मौके पर रांची सिविल सर्जन डॉ विनोद कुमार, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ शशि भूषण खलखो, डॉ अनिल खेतान, डॉ विमलेश सिंह, डॉ एस प्रसाद, फैमिली प्लानिंग कोषांग की राज्य समन्वयक गूंजन खलखो, एस विजयलक्ष्मी सहित स्वास्थ्य विभाग के तमाम अधिकारी और कर्मी मौजूद थे।

निदेशक प्रमुख डॉ कृष्ण कुमार ने कहा कि परिवार नियोजन के विभिन्न साधनों में से एक साधन है पुरुष नसबंदी (एनएसवी) अभी तक इस साधन के प्रति पुरुष रुचि नहीं दिखाते थे और इसे अपने पौरुष से जोड़कर देखते थे

किन्तु अब परिवार नियोजन में वह भी अपनी भूमिका महत्वपूर्ण मानते हुए नसबंदी कराने के लिए आगे आ रहे हैं और समाज को संदेश दे रहे हैं।

निदेशक प्रमुख कहा कि पुरुष नसबंदी 2022 का थीम “ अब पुरूष निभाएंगे जिम्मेदारी, परिवार नियोजन अपनाकर दिखाएंगे अपनी भागीदारी ” रखी गई है। इस मंत्र को पूरे राज्य में लागू करना है।

रांची सिविल सर्जन डॉ विनोद कुमार ने कहा कि पुरुष नसबंदी को लेकर लोगों में भ्रांतिया हैं कि इसको कराने से पुरुषों में कमजोरी आ जाती है व नपुंसक हो जाते हैं, ऐसा कुछ भी नहीं है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से सुरक्षित है।

अब पुरुष, एनसवी को लेकर जागरूक हो रहे हैं लेकिन अभी हमें और प्रयास करने की जरूरत है।

राज्य समन्वयक गूंजन खलखो ने कहा कि बिना-चीरा, बिना टांका वाली नई पुरुष नसबंदी एनएसवी के लाभ जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा पुरुष नसबंदी माह का आगाज हुआ।

21 नवम्बर से 20 दिसंबर तक चलने वाले इस पखवाड़े का उद्देश्य परिवार नियोजन कार्यक्रम में पुरुषों की भागीदारी बढ़ाना है

क्योंकि यह अत्यधिक आसान व सुरक्षित उपाय है। इस दौरान प्रथम चरण में “मोबिलाइजेशन ” के रूप में आयोजित किया जा रहा है।

प्रथम चरण में एएनएम एवं स्वास्थ्य सहिया द्वारा योग्य दंपतियों का चिन्हीकरण किया जाएगा,

साथ ही प्रचार-प्रसार सामग्री के माध्यम से पुरुष नसबंदी की जानकारी आमजन को उपलब्ध करवाकर पुरुष नसबंदी से संबंधित मिथ्याओं, भ्रम एवं अविश्वास को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। द्वितीय चरण में “सेवा वितरण” के रूप में आयोजित किया जाएगा,

जिसमे चिकित्सा संस्थानों पर विशेष नियत सेवा दिवसों का आयोजन कर पुरुष लाभार्थियों को नसबंदी सेवाओं की सुविधा प्रदान की जाएगी।

 

सूरज एक ऐसा नाम है जिन्होने अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए नसबंदी कराया है।

रांची निवासी सूरज कुमार जिस आयु 29 वर्ष हैं, उनके एक बच्चे हैं, उन्होंने हाल ही में पुरूष नसबंदी करा कर मिसाल कायम की है।

सूरज ने बताया कि नसबंदी से किसी तरह की कोई कमजोरी नहीं आती और एक दिन के बाद सामान्य काम कर सकते हैं।

एनएसवी (नो स्कैल्पल वसेक्टमी) को आम जुबान में नसबंदी की बिना चीरा, बिना टांका पद्धति कहा जाता है।

नयी पद्धति के चलते अब पुरुष झटपट नसबंदी कराके एक घंटे में घर जा सकते है और अपेक्षाकृत जल्दी अपने काम पर लौट सकते हैं।

पुरुष नसबंदी करवाने पर क्षतिपूर्ति राशि स्वरुप 3000 रूपए जबकि महिला नसबंदी पर 2000 रूपए सरकार द्वारा दिए जाते हैं।

प्रेरक को पुरुष नसबंदी हेतू400 रुपए तथा महिला बंध्याकरण हेतु ₹300 प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान है, लाभुक यदि स्वयं प्रोत्साहित हो कर नसबंदी हेतु आया है तो प्रोत्साहन राशि भी उसे ही दिए जाने का प्रावधान है।

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