स्थानीय नीति नियोजन नीति एवं आरक्षण नीति का ध्वनिमत से सदन से पारित होना झारखंडी दलित आदिवासी मूलवासी समाज के लिए ऐतिहासिक दिन:विजय शंकर नायक

झारखंडी सूचना अधिकार मंच एवं समस्त झारखंड के दलित आदिवासी मूलवासी समाज ने मुख्यमंत्री को दी बधाई

RANCHI: स्थानीय नीति नियोजन नीति एवं आरक्षण नीति का ध्वनिमत से सदन से पारित होना झारखंडी दलित आदिवासी मूलवासी समाज के लिए ऐतिहासिक दिन साबित हुआ और आज का दिन झारखंड के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों पर लिखा जाएगा.

उपरोक्त बातें आज झारखंडी सूचना अधिकार मंच के केंद्रीय अध्यक्ष हटिया विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी विजय शंकर नायक ने सदन में दोनों विधेयक का ध्वनिमत से पारित होने पर आज अपनी प्रतिक्रिया में कहीं.

उन्होंने हेमंत सरकार को बधाई देते हुए कहा कि जो भारतीय जनता पार्टी की सरकार 20 वर्षों तक झारखंड के दलित आदिवासी मूलवासी समाज के हक और अधिकार को दबाकर रखा था

उसको हेमंत सोरेन की सरकार ने उनके हक और अधिकार को देने का काम किया

इसके लिए झारखंडी सूचना अधिकार मंच एवं समस्त झारखंड के दलित आदिवासी मूलवासी समाज उनको इस कार्य के लिए बधाई देता है.

श्री नायक में आगे कहा कि भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय सरकार सदन से पारित दोनों विधेयक जो झारखंड की जनता की मूल आत्मा से जुड़ी हुई है

उनके भावनाओं के साथ जुड़ी हुई है उन दोनों विधेयक को अविलंब केंद्र की सरकार कानून बनाकर नवीं अनुसूची में अविलंब डालने का काम करें

अगर भारतीय जनता पार्टी की केंद्र की सरकार अगर इन दोनों कानूनों को अगर नहीं पारित करती है तो आने वाले लोकसभा के चुनाव में विधानसभा के चुनाव में झारखंड से उनका सुपारा साफ करने के लिए झारखंडी समाज कमर कस चुकी है

श्री नायक ने आगे यह भी कहा की हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने शुक्रवार को झारखंड विधानसभा से ऐतिहासिक निर्णयों वाले दो विधेयक ध्वनिमत से पारित करा दिया.

अब राज्य में स्थानीयता का आधार 1932 का खतियान या उसके पूर्व का सर्वे होगा.

राज्य सरकार में तृतीय और चतुर्थ वर्गों की नौकरियां सिर्फ 1932 के खतियान या पूर्व के सर्वे में शामिल लोगों के वंशजों के लिए आरक्षित होंगी.

इसी तरह ओबीसी आरक्षण को 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी हो जाएगा. राज्य में कुल 77 प्रतिशत आरक्षण लागू होगा.

विधानसभा ने इन दोनों विधेयकों को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव भी पारित किया है जो स्वागत योग्य इतिहासक कदम है जिसके लिए जितनी बधाई इन्हें दी जाय कम है.

श्री नायक ने आगे कहा की यह दोनों विधेयक पारित होने के बाद केंद्र के पास भेजा जाएगा।

केंद्र की मंजूरी के बाद ही ये कानून का रूप लेंगे।

केंद्र द्वारा इन्हें नौवीं अनुसूची में शामिल कराये जाने के बाद ही दोनों विधेयक कानून का रूप लेंगे।

बता दें कि नौवीं अनुसूची में शामिल होने वाले कानूनों को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती.

श्री नायक ने यह भी कहा की इस स्थानीय नीति, नियोजन नीति के आंदोलन मे शहीद हुए विनय तिग्गा, कैलाश कुजूर, संतोष कुजूर एवं अन्य लोगों को झारखंड मे शहिदो का दर्जा दे तथा इस आंदोलन में आंदोलनकारियों के केस दर्ज किया गया उन सभी केशव को उठाने की मांग की है।

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