हमारा लक्ष्य भारत में 2030 तक जीरो लेप्रोसी करनाः योही सासाकावा

RANCHI:   WHO के ब्रांड एम्बेसडर जापान के योही सासाकावा ने कहा कि हमारा लक्ष्य भारत में 2030 तक जीरो लेप्रोसी करना है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्ट्रांग लीडरशिप में 2030 तक भारत में जीरो लेप्रोसी करना लक्ष्य है।

इसके लिए स्ट्रांग पालिसी डिसिजन लिये जा रहे हैं. होटल रेडिशन ब्लू में शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में बोल रहे थे।

सासाकावा ने कहा कि जापान विजिट के क्रम में पीएम मोदी जी से मुलाकात हुई थी उन्होनें पूछा था कि आप कब भारत आ रहे हैं।

मोदी जी ने कहा था कि भारत को जल्द से जल्द लेप्रोसी मुक्त करना है।

कोरोना संक्रमण के कारण तीन वर्षों के बाद भारत आया हूं। आने के बाद झारखंड राज्य का दौरा के लिए चुना।

उन्होंने कहा कि शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता से मिलकर झारखंड में चल रहे लेप्रोसी उन्मूलन कार्यों पर चर्चा की।

उन्होने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने भी झारखंड से लेप्रोसी खत्म कर ने का प्रण लिया है। झारखंड में सहिया द्वारा लेप्रोसी उन्मूलन की दिशा में किये जा रहे कार्य सराहनीय है

इसी तरह कार्य करते रहे तो जल्द ही झारखंड लेप्रोसी मुक्त हो जायेगा। उन्होंने झारखंड में सहिया के कार्यों की सराहना की।

योही सासाकावा ने कहा कि कुष्ठ ना को भगवान की देन है और ना ही वंशानुगत रोग है बल्कि यह बैक्टेरिया जनित रोग है यह किसी को भी हो सकता है।

योही सासाकावा ने कहा कि लेप्रोसी के प्रारंभिक लक्षण के बाद तुरंत मल्टी ड्रग थेरेपी(एमडीटी) की दवा खिलाकर लेप्रोसी से होने वाले  विकलांगता को दूर किया जा सकता है।

लेप्रोसी का इलाज पूरी तरह संभव है। योही सासाकावा ने अपाल संस्था द्वारा लेप्रोसी उन्मूलन की दिशा में किये जा रहे  प्रयास की सराहना की।

उन्होेने कहा कि अपाल संस्था सकारात्मक भूमिका निभा रही है।

स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं एवं स्टेट लेप्रोसी आफिसर डॉ कृष्ण कुमार ने कहा कि झारखंड देश का पहला राज्य बना जिसने राज्य के सभी 24 जिलों के 260 प्रखंडों तथा 32210 गांवों का विश्लेशन कर जीआई मैपिंग की गयी है।

2022-23 में कुष्ठ रोग खोज अभियान में कुल दो अभियान अभी तक चलाये गये हैं। इनमें अबतक 2022-23 में कुल 4730 रोगी मिले हैं। जो अब तक की बड़ी उपलब्धि है।

डॉ कृष्ण कुमार ने बताया कि  इस समय राज्य में कुल 6135 रोगी इलाजरत हैं।

2022-23 में माह सितंबर तक कुष्ठ से उत्पन्न विकलांगता को दूर करने के लिए कुल 66 रोगियों का शल्य चिकित्सा(रिकंस्ट्रेक्टिव सर्जरी की गयी है।

साथ ही कुष्ठ रोगियों में 2299 विशेष प्रकार की चप्पल(एमसीआर) एवं 1006 सेल्फ केयर किट का वितरण किया गया है।

अपाल(अ पर्सन अफेक्टेड फ्राम लेप्रोसी) संस्था के मो जैमुदीन ने कहा कि कुष्ठ रोग से प्रभावित रोगी तरह तरह की समस्या से गुजरते हैं।

इन्हें स्पेशल अलाउंस देना जरुरी है। इनके लिए रोजगार ,बच्चों के लिए शिक्षा की सुविधा,स्वाबलंबी बनाना इन सारे कार्य में अपाल संस्था कार्य कर रही है।

सोलह बच्चों को हायर एजुकेशन के लिए स्कालरशिप दिया गया है।

कुष्ठ रोगियों के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी, आयुष्मान भारत योजना का कार्ड बनाया गया है।

इनके लिए झारखंड में पीएम आवास योजना और बाल्मिकी आवास योजना के तहत मकान बनाये गये है। धुर्वा के पास पांच एकड़ जमीन आवंटन किया गया है।

इस कार्य में मीडिया का सहयोग जरुरी है।

आज भी लोगों में भय है कि कुष्ठ दैविक प्रकोप है। इसके साथ ही छुआ छुत की भावना भी लोगों में है।

इस भ्रांति को दूर करना जरुरी है।

प्रेसवार्ता में अपाल संस्था की माया रणवरे,आईसीसी सेल के प्रभारी डॉ प्रदीप कुमार सिंह, डब्ल्यूएचओ के कोआर्डिनेटर डॉ अभिषेक,एनटीडी डॉ मनोज सहित स्वास्थ्य विभाग के कर्मी सहित  वेनुगोपाल और उनकी टीम, रंजित पाठक अन्य लोग उपस्थित थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *