महापर्व छठ पूजा के व्रतधारी 30 अक्टूबर को ढलते सूर्य, 31 अक्टूबर को उगते सूर्य को देंगे अर्घ्य

 

सूर्य उपासना का अनुपम लोकपर्व छठ महापर्व शुक्रवार को परंपरानुसार नहाय खाय से शुरू

 

RANCHI:  भक्ति और आध्यात्म से परिपूर्ण भुवन भाष्कर की सूर्य उपासना का अनुपम लोकपर्व छठ महापर्व शुक्रवार को परंपरानुसार नहाय खाय से शुरू हुआ।

महिलाओं व घर के अन्य सदस्यों ने सबसे पहले घर की साफ-सफाई की इसके पश्चात छठ व्रती स्नान कर शुद्ध शाकाहारी भोजन पकाकर इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करके व्रत की शुरूआत की।

पवित्रता के साथ तीन दिनों तक भगवान सूर्यनारायण की विशेष पूजा अर्चना की जाती है।

छठ पर्व सूर्य की आराधना का पर्व हैं। जिसे हिंदू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। हिंदू धर्म के देवताओं में सूर्य ऐसे देवता हैं

जिन्हें मूर्त रूप में देखा जा सकता है। छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष इसकी सादगी पवित्रता और लोकपक्ष है।

सूर्य की शक्तियों का मुख्य श्रोत उनकी पत्नी ऊषा और प्रत्यूषा हैं। छठ में सूर्य के साथ-साथ दोनों शक्तियों की संयुक्त आराधना होती है।

लोक आस्था का महापर्व छठ शनिवार को खरना पूजन सम्पन्न होने के साथ ही 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होगा । छठ महापर्व के दौरान उपासक 72 घंटे की पूजा व 36 घंटे का उपवास रखते हैं।

चार दिवसीय महापर्व छठ के तीसरे दिन षष्ठीं तिथि में निर्जल व्रत के साथ रविवार को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य और सप्तमी तिथि सोमवार को उदय होते सूर्य देव को अर्घ्य देने के साथ छठ पूजा समाप्त हो जाएगी।

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