देश की समृद्धि और आत्म निर्भर भारत में नीली क्रांति की आवश्यकता : डॉ सुब्बना अय्यपन

जलीय कृषि वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ एस अय्यपन ने राज्य के एकमात्र मत्स्यिकी विज्ञान महाविद्यालय के प्रशासनिक भवन का किया उद्घाटन

RANCHI:  मत्स्य उत्पादन क्षेत्र में चीन के बाद भारत विश्व का दूसरा सबसे ज्यादा मत्स्य उत्पादक देश है. देश में प्रतिवर्ष करीब 150 लाख टन मछली का उत्पादन होता है.

इनमें झारखंड में करीब 3 लाख टन मछली उत्पादन होता है. देश में करीब 3100 मछली की प्रजातियाँ है.

मछली में करीब 16 प्रतिशत प्रोटीन होती है और इसकी काफी मांग है. अगले 10 वर्षो में देश को करीब 220 लाख टन मछली की आवश्यकता होगी.

देश का मछली उत्पादन विकास की दर करीब 8 प्रतिशत प्रति वर्ष है. झारखंड सहित पूरे देश में इस क्षेत्र में अपार संभावनाएँ है,

जिसे साकार करने की आवश्यकता है. भारत की समृद्धि और आत्म निर्भर भारत के निर्माण में नीली क्रांति के सूत्रपात की जरूरत है.

उक्त विचार देश के जाने-माने जलीय कृषि वैज्ञानिक एवं पूर्व आईसीएआर महानिदेशक पद्मश्री डॉ सुब्बना अय्यपन ने बतौर मुख्य अतिथि राज्य के एकमात्र मत्स्यिकी विज्ञान महाविद्यालय, गुमला के प्रशासनिक भवन का उद्घाटन के अवसर पर कही.

डॉ अय्यपन ने कहा कि एक किलो धान उत्पादन में करीब 1600 लीटर पानी की जरुरत होती है,

जबकि एक किलो मछली उत्पादन में करीब 300 लीटर मात्र पानी की आवश्यकता होती है. देश में गुमला सहित कुल 30 मत्स्यिकी विज्ञान महाविद्यालय कार्यरत है.

इन महाविद्यालयों से प्रतिवर्ष करीब एक हजार फिशरीज ग्रेजुएट एवं पोस्ट ग्रेजुएट आदि पास आउट होते है.

आगामी दस वर्षो में देश को 10 हजार फिशरीज ग्रेजुएट एवं पोस्ट ग्रेजुएट आदि की जरूरत होगी.

उन्होंने कहा कि अब देश की नीति आयोग भी नीली क्रांति पर जोर दे रही है. भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम मत्स्य संपदा योजना द्वारा मछली उत्पादन को काफी बढ़ावा दिया जा रहा है.

मछली उत्पादन के क्षेत्र में झारखण्ड तेजी से उभरता राज्य है. देश में इसपर चर्चा हो रही है. राज्य के इस एकमात्र मत्स्यिकी विज्ञान महाविद्यालय ने 5 वर्षो की कम अवधि में ही राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बनाने में सफल रहा है.

इस कॉलेज में केवल पढाई ही नहीं बल्कि स्थानीय उपयुक्त अनुसंधान और छोटे-छोटे अनुप्रयोग पर जोर देना होगा. देश में तेजी से बढ़ते एग्री स्टार्टअप की तरह फिशरीज ग्रेजुएट फिशरीज स्टार्टअप की ओर उन्मुख होना होगा.

उन्होंने राज्य सरकार के मत्स्य विभाग एवं स्थानीय उपयुक्त के सहयोग से कॉलेज के विस्तार के प्रयासों की भूरी-भूरी प्रशंसा की.

अध्यक्षीय संबोधन में बीएयू कुलपति डॉ ओंकार नाथ सिंह ने कहा कि गुमला जिला बाबु कार्तिक उराँव की जन्म भूमि है. उन्हीं के अथक प्रयासों से बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की नींव रखी गयी थी.

जिसका प्रतिफल है कि गुमला जिले में विश्वविद्यालय के अधीन मत्स्यिकी विज्ञान महाविद्यालय कार्यरत है. इस कॉलेज को आईसीएआर नई दिल्ली से मान्यता मिल चुँकी है.

अब इस कॉलेज में अन्य राज्यों के छात्र भी राष्ट्रीय कोटे से पढाई करेंगे. विदेशी छात्र भी पढ़ सकेंगे.

उन्होंने कहा कि राज्य के कृषि मंत्री बादल भी कॉलेज के त्वरित विकास के प्रति कृत संकल्पित है. कृषि सचिव अबुबकर सिद्दीकी पी जी के सतत सहयोग से यह कॉलेज निरंतर आगे बढ़ रहा है.

पूर्व शिक्षा मंत्री गीताश्री उराँव ने कहा कि देश की इकॉनमी में कृषि और मत्स्यिकी क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण है.

आज देश में जलीय कृषि के प्रणेता डॉ अय्यपन के हाथों गुमला में कॉलेज का उद्घाटन बेहद गौरव का क्षण है.

इससे आज पिता बाबु कार्तिक उराँव की आत्मा को शांति मिलेगी. नई मत्स्य तकनीक विकास से गुमला के ग्रामीण लाभान्वित होंगे. कॉलेज को पहचान मिलने से गुमला जिला का भी गौरव बढेगा.

राज्य मत्स्य निदेशक एचएन द्विवेदी ने कहा कि इस कॉलेज की आधारशिला रखने में विकास आयुक्त अरुण कुमार सिंह एवं पूर्व मत्स्य निदेशक डॉ राजीव कुमार की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका रही है. कॉलेज के उद्घाटन से राज्य मत्स्य निदेशालय का चिर प्रतिक्षित सपना साकार हुआ है.

जिला मत्स्य पदाधिकारी दीपक सिंह ने राज्य के मत्स्य क्षेत्र में इसे बेहद भावुक क्षण बताया.

स्वागत भाषण में एसोसिएट डीन डॉ एके सिंह ने कहा कि 2017 में स्थापित इस कॉलेज से अबतक दो बैच के विद्यार्थी पास आउट हुए.

दोनों बैच के बहुतायत छात्रों ने आईईएआर- जेआरएफ एग्जाम में सफलता हासिल की है.

देश के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज के पीजी प्रोग्राम में छात्रों ने नामांकन कराया है. उन्होंने कॉलेज को विस्तार देने में स्थानीय उपयुक्त का योगदान का विशेष उल्लेख भी किया.

धन्यवाद डीन वेटनरी डॉ सुशील प्रसाद ने दी. उन्होंने कॉलेज परिसर को विकसित करने में स्थानीय उपयुक्त के निरंतर सहयोग का आभार जताया.

कॉलेज के विकास में राज्य मत्स्य निदेशालय एवं जिला मत्स्य कार्यालय के सहयोग की सराहना की और आगे सहयोग मिलने की आशा जताई.

इससे पूर्व कॉलेज के प्रशासनिक भवन का उद्घाटन फीता काटकर डॉ एस अय्यपन द्वारा किया गया.

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया. इस अवसर पर डॉ एस अय्यपन ने उत्कृष्ट योगदान के लिए कॉलेज के डॉ स्वाति एवं संजय नाथ पाठक को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया.

मौके पर स्थानीय मधुकुंज के शंकर नायक की टीम द्वारा नृत्य संगीत की प्रस्तुति दी गयी.

कार्यक्रम का संचालन हरियाली रेडियो समन्यवयक शशि सिंह ने की. मौके पर कॉलेज के शिक्षक, विद्यार्थी सहित भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण भी मौजूद थे.

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