नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के नेतृत्व में निकाला गया बाल विवाह मुक्त भारत अभियान

 

 VIRAT NAGAR:  ऐतिहासिक ‘बाल विवाह मुक्‍त भारत’ अभियान का नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित कैलाश सत्‍यार्थी ने रविवार शाम को राजस्थान स्थित विराट नगर के बंजारा समुदाय की बहुलता वाले नवरंगपुरा गांव से एक विशाल जनसभा में दीप जलाकर कर शुभारंभ किया।

इस अवसर पर एक और नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित लाइबेरिया की लेमा जोबोई भी मौजूद थी।

श्री सत्यार्थी के दीया जलाते ही देश में रातभर लोगों ने कैंडिल मार्च आयोजित कर और दीया जला कर जनता को बाल विवाह के खिलाफ जागरुक किया।

इस अभियान को सरकार की तरफ से भी भरपूर सहयोग और समर्थन मिल रहा है। कई सरकारी संस्थाओं ने इसमें शिरकत की।

14 राज्य सरकारों के महिला एवं बाल कल्याण विभाग, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, राज्य विधिक सेवा आयोग सहित रेलवे सुरक्षा पुलिस और जिला प्रशासन ने इस अभियान को अपना समर्थन दिया।

इन संस्थाओं ने अपने अधिकारियों को इसमें शामिल होने और आंगनवाड़ी जैसी संस्थाओं को कार्यक्रम करने का निर्देश दिया है।

भारत सरकार की साल 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 1.2 करोड़ से ज्‍यादा बच्चों के बाल विवाह हुए हैं।

जिसमें करीब 52 लाख नाबालिग लड़कियां थीं। इसकी तस्‍दीक नेशनल फैमिली हेल्‍थ सर्वे के ताजा आंकड़े भी करते हैं। इनके अनुसार देश में 20 से 24 साल की उम्र की 23.3 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं, जिनका बाल विवाह किया गया है।

इसमें 10 प्रतिशत की कमी लाना ही अभियान का उद्देश्‍य है। अभियान के तीन मुख्‍य लक्ष्‍य हैं।

पहला कानून का सख्‍ती से पालन हो, यह सुनिश्चित करना। दूसरा, महिलाओं और बच्‍चों का सशक्‍तीकरण करना और 18 साल तक के सभी बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था करना।

जबकि तीसरा उन्‍हें यौन शोषण से बचाना है। बाल विवाह बच्‍चों की शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा, तीनों पर ही गंभीर प्रभाव डालता है।

कई सतत् विकास लक्ष्‍य(एसडीजी) में भी बाल विवाह के खात्‍मे को प्राथमिकता दी गई है। बाल विवाह जैसी वैश्विक बुराई को खत्‍म करने के लिए कई स्‍तर पर एकजुट प्रयास करने होंगे।

नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित श्री कैलाश सत्यार्थी के नेतृत्व में शुरु हुआ “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियानलड़कियों के बाल विवाह के खिलाफ देश ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा जागरुकता अभियान बन गया।

इस अभियान के तहत देशभर के 26 राज्यों में 500 से अधिक जिलों में करीब 10 हजार गावों की 70 हजार से अधिक महिलाओं और बच्चों की अगुआई में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित कर दीया जलाया गया और कैंडिल मार्च निकाला गया।

इसमें दो करोड़ से अधिक लोगों ने हिस्सेदारी कर और बाल विवाह को खत्म करने की शपथ लेकर इस अभियान को ऐतिहासिक बना दिया।

इस बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की खास बात यह थी कि सड़कों पर उतर कर नेतृत्व करने वाली महिलाओं मेंऐसी महिलाओं की संख्‍या ज्‍यादा थी जो कभी खुद बाल विवाह के दंश का शिकार हो चुकी थीं।

कई जगह अभियान का नेतृत्व उन बेटियों ने कियाजिन्होंने समाज और परिवार से विद्रोह कर न केवल अपना बाल विवाह रुकवायाबल्कि अपनी जैसी कई अन्य लड़कियों को भी बाल विवाह का शिकार होने से बचाया।

सभी ने एक स्‍वर में बाल विवाह को रोकने के लिए कानूनों का सख्ती से पालन करने और 18 साल तक सभी बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने की बात कही। 

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