झारखंड के सरकारी चिकित्सा पदाधिकारियों को बीमार होने पर भी छुट्टी पर रोक, चिकित्सकों में रोष

बेवजह चिकित्सकों को परेशान करने की कोशिश

राज्य भर के चिकित्सकों की बैठक 14 अक्तूबर को, बनेगी आगे की रणनीति

RANCHI: स्वास्थ्य विभाग, झारखंड सरकार के  के अनुसार सभी मेडिकल कॉलेज एवं सभी 24 जिलों के चिकित्सा पदाधिकारियों को बीमारी के आधार पर अवकाश के लिए मेडिकल बोर्ड द्वारा अनुशंसा किया जाना तय किया गया है

अर्थात केवल स्वास्थ्य विभाग के सभी सरकारी चिकित्सा पदाधिकारियों को बीमार होने पर भी छुट्टी पर रोक लगाई गई है

और मेडिकल बोर्ड के समक्ष सशरीर उपस्थित होने को कहा गया है यह कितना अप्रासंगिक है झासा ने इसका विरोध किया है झासा सचिव डॉ  ठाकुर मृत्युंजय कुमार सिंह ने

उक्त जानकारी देते हुए बताया कि राज्य भर के सभी सरकारी चिकित्सकों में रोष व्याप्त है इसको लेकर सभी सरकारी चिकित्सकों की बैठक 14 अक्तूबर को आहुत की गयी है

डॉ मृत्युंजय ने बताया कि अधिसूचना ज्ञापांक संख्या 506( 3)  15:07:2022 के द्वारा विभाग ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि सक्षम स्तर से अवकाश स्वीकृत होने के उपरांत ही कोई भी पदाधिकारी अवकाश पर प्रस्थान करना सुनिश्चित करेंगे

फिर से नए अधिसूचना की जरूरत क्या थी? झासा पूछती है कि क्या इस तरह के आदेश केवल स्वास्थ्य विभाग में निकाले जाने उचित है? क्या यह सरकारी सेवक के मूलभूत अधिकारों में दखल नहीं है?

अधिसूचना में जिस झारखंड सेवा संहिता के नियम 152 की बात की गई है, उसका चिकित्सक संघ शत प्रतिशत अनुपालन करता है

और उसके अनुसार किसी भी तरह का अवकाश सक्षम प्राधिकारी से लिया जाना वर्णित है ना कि मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा का

इस अधिसूचना में कार्मिक, प्रशासनिक एवं राजभाषा विभाग के एक अधिसूचना को आधार बनाया गया है,

तो यह आदेश समस्त विभागों के लिए क्यों नहीं?केवल स्वास्थ्य विभाग के लिए क्यों? झारखंड के अध्यक्ष डॉ पी पी शाह एवं सचिव डॉ ठाकुर मृत्युंजय कुमार सिंह ने कहा कि हम आंदोलन नहीं चाहते

लेकिन स्वास्थ्य विभाग को भी इस बाबत अपनी सोच चिकित्सकों के प्रति सकारात्मक रखनी होगी  बेवजह चिकित्सकों को परेशान करने की कोशिश की जा रही है

चिकित्सकों में इस अधिसूचना को लेकर अत्याधिक रोष है

संघ ने इससे संबंधित एक मीटिंग भी  14 अक्तूबर 2022 को बुलाई है जिसने विस्तार से स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों के विरुद्ध निकाले गए अधिसूचनाओं की चर्चा की जानी है और निर्णायक निर्णय लिए जाने हैं

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