टीबी उन्मूलन बड़ी बात नहीं, बल्कि लोगों को टीबी के लक्षणों के बारे में जागरुक करना जरुरीःरमेश बैस

RANCHI: झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस ने कहा कि समाज से टीबी रोग का उन्मूलन करना बड़ी बात नहीं है बल्कि लोगों को टीबी रोग के लक्षणों के बारे में जानकारी देकर जागरुक करना जरुरी है।

टीबी रोग किसी को भी हो सकता है चाहे बच्चा हो,महिला हो या वृद्ध हो इससे बचने के लिए जागरुकता जरुरी है।

राज्यपाल रमेश बैस शुक्रवार को आड्रे हाउस में प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान का राज्यस्तरीय शुभारंभ मौके पर उक्त बातें कहीं।

इस मौके पर राज्यपाल ने टीबी मरीजों के बीच निक्षय आहार का भी वितरण किया। जिसमें दाल, सहित कई पौष्टिक आहार शामिल हैं।

राज्यपाल ने कहा कि 9 सितंबर को दिल्ली में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान का शुभारंभ किया था।

राज्यपाल ने कहा कि पहले टीबी रोग होता था तो लोग मरीज को गांव से बाहर निकाल देते थे लेकिन अब वैसी परिस्थिति नहीं है इलाज के लिए दवा उपलब्ध है

नियमित रुप से दवा लेने से टीबी रोग से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर के सलाह के बिना टीबी की दवा बंद नहीं करना है।

टीबी बैक्टेरिया से होने वाली बीमारी है। यह फेफड़ों को संक्रमित करती है यहां तक की अब यह ब्रेन और हड्डी तक में फैल रहा है।

उन्होंने कहा कि टीबी के उन्मूलन के लिए विभिन्न स्तरों पर अभियान चलाने की जरुरत है। तभी टीबी हारेगा भारत जीतेगा।

राज्यपाल ने कहा कि टीबी रोगियों को सही से पोषण नहीं मिलता जिसके कारण उपचतार में दिक्कत होती है।

हालांकि सरकार टीबी रोगियों को पोषक आहार लेने के लिए उनके बैंक खाते में पांच सौ रुपये प्रति माह भेज रही है।

लेकिन वह भी कम है इसके लिए समाज के लोगों , जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के टीबी रोगियों को गोद लेकर उसका समुचित इलाज की जिम्मेवारी लें ।

निजी शिक्षण संस्थान, समाजसेवी संस्था इस कार्य में भागीदारी निभायें।

साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों को भी प्रेरित करें इससे टीबी मुक्ति में गति मिलेगी।

इस मामले पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री का विजन अच्छा है। लेकिन डॉक्टरों और अस्पताल के भरोसे ना रहें टीबी मुक्त भारत अभियान में आम लोगों का सहयोग लें जब हमारा राज्य स्वस्थ होगा तो हमारा देश स्वस्थ होगा।

राज्यपाल से उपस्थित लोगों को टीबी से लड़ने की शपथ भी दिलायी।

रिम्स पर भी ध्यान दें स्वास्थ्य मंत्री

राज्यपाल ने रमेश बैस ने जोर देकर कहा कि झारखंड में स्वास्थ्य सेवा जितना मिलना चाहिए लोगों को नहीं मिल रहा है मेरे पास कई शिकायतें आती है।

जानकर दुख होता है राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल रिम्स में डॉक्टर ड्यूटी से गायब रहते हैं मरीजों को स्वास्थ्य सुविधा जितनी मिलनी चाहिए नहीं मिल रही है।

उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता को कहा कि जरा रिम्स पर भी ध्यान दें। पता चला है कि  रिम्स के निदेशक लंबी छुट्टी पर चले गये हैं।

समारोह को संबोधित करते हुे स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता नेकहा कि राज्य में अभी तक 34 हजार चार सौ टीबी के मरीज इलाजरत हैं।

टीबी रोग की जांच ट्रूनेट मशीन से की जाती है इस मशीन से कोविड की भी जांच होती है इस प्रकार एक जांच से दोनों बीमारियों की जांच की जा रही है।

टीबी मरीजों की जांच के साथ साथ उपचार भी किया जा रहा है। राज्य को 2025 तक टीबी को समयबद्ध तरीके से खत्म  करने के लक्ष्य को हम पूरा करेंगे।

इसके साथ ही हम राज्य में पीसीपीएनडीटी एक्ट को भी मजबूत कर रहे हैं वहीं सर्वाइकल कैंसर को भी राज्य से खत्म करेंगे।

समारोह को राज्य सभा सांसद महुआ माजी, रांची के सांसद संजय सेठ ने भी संबोधित किया।

स्वागत भाषण स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने दिया।

इस मौके पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भूवनेश प्रताप सिंह , राज्य टीबी पदाधिकारी डॉ रंजित प्रसाद, डॉ राकेश दयाल, रांची के सिविल सर्जन डॉ बिनोद कुमार, रांची आईएमए अध्यक्ष डॉ शंभू प्रसाद सिंह, राजअस्पताल के संचालक योगेश गंभीर भी उपस्थित थे।

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