रिम्स में मनाया गया फार्माकोविजलेंस सप्ताह, संगोष्ठी आयोजित

एमबीबीएस के छात्रों ने नाटक के जरिये एडीआर रिपोर्टिंग के महत्व के बारे में बताया

दवा से हो रहे रिएक्शन के बारे में रिपोर्ट करें, राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 18001803024 पर

RANCHI:  राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान(रिम्स) में 17 से 23 सितम्बर तक राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह मनाया जा रहा है।

इस सप्ताह को मनाने का उद्देश्य आम जनता व स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों यानी एडवर्स ड्रग रिएक्शन (ADR) के सम्बन्ध में जागरूकता लाना है।

फार्माकोलॉजी विभाग द्वारा गुरुवार को इसी कड़ी में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

 

एडवर्स ड्रग रिएक्शन एक गंभीर विषय:डॉ हीरेन्द्र बिरुआ

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए डॉ हीरेन्द्र बिरुआ, चिकित्सा अधीक्षक, रिम्स ने कहा कि “एडवर्स ड्रग रिएक्शन एक गंभीर विषय है.

इसलिए अगर किसी दवा से रिएक्शन हो तो इसे कैसे और कहाँ रिपोर्ट करना है इसकी जानकारी जनता के पास होनी चाहिए।

रिम्स को एक नंबर जारी करना चाहिए जहाँ लोग दवा से हो रहे रिएक्शन के बारे में आसानी से रिपोर्ट कर सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि ओपीडी पर्ची में यदि यह हेल्पलाइन नंबर अंकित होगा तो ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचेगी.

प्रो. (डॉ) उमाशंकर केशरी, विभागाध्यक्ष, फार्माकोलॉजी ने फार्माकोविजिलेंस के विभिन्न पहलुओं, प्रतिकूल दवा प्रतिक्रिया निगरानी और रोगी सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर प्रकाश डाला.

उन्होंने भारत के फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम और प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं की रिकॉर्डिंग, रिपोर्टिंग और दस्तावेजीकरण में डॉक्टरों, रोगियों, फार्मासिस्टों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया।

डॉ केशरी ने बताया कि, “मरीज़ो और स्वास्थ्य पेशेवरों द्वारा उल्लेखनीय साइड इफेक्ट बताए जाने के बाद बाजार से विभिन्न दवाएं वापस ली गईं हैं

इसलिए ज़रूरी है की दवा से हो रहे रिएक्शन के बारे में रिपोर्ट करें| राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 18001803024 पर जानकारी दी जा सकती है।

साथ ही डॉ केशरी ने बताया की देशभर में 179 प्रतिकूल दवा निगरानी केंद्र हैं जिसमें एक केंद्र रिम्स के फार्माकोलॉजी विभाग में है और यह एक क्षेत्रीय केंद्र के रूप में काम करता है।

इस वर्ष फार्माकोविजिलेंस सप्ताह का थीम “मरीजों द्वारा एडीआर रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करना” है

ताकि प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं की पहचान करने और रिपोर्ट करने के लिए आम जनता, रोगियों और उनके परिचारकों सक्रिय रूप से शामिल हो सकें.

कार्यक्रम के दौरान एमबीबीएस के छात्रों ने नाटक के जरिये एडीआर रिपोर्टिंग के महत्व के बारे में बताया

राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह के दौरान रिम्स कैंपस में रैली का भी आयोजन किया गया था।

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