त्रिपक्षीय बैठक की प्रोसिडिंग शर्तों में सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में 50-50 समीकरण पर चिकित्सकों में असमंजस की स्थिति

झासा ने चिकित्सकों पर प्रपत्र क जैसे संगीत लगे आरोप पर मंत्री और सचिव से पुनर्विचार का किया आग्रह

चिकित्सकों पर अनुपस्थिति रहने मात्र पर रजिस्ट्रेशन रद्द करने की अनुशंसा न्याय संगत नहीं, पुनर्विचार करे सरकार

RANCHI:  स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता  की अध्यक्षता में गत माह हुई त्रिपक्षीय मीटिंग के कार्यवाही (प्रोसिडिंग) निकाला गया.

झासा ,झारखंड के अध्यक्ष डॉ पी पी शाह और सचिव डॉ ठाकुर मृत्युंजय कुमार सिंह ने इसका स्वागत किया है

स्वास्थ्य मंत्री एवं अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा एवं समाज कल्याण विभाग, झारखंड सरकार के सकारात्मक सोच की तारीफ की

इस कार्यवाही ने यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कोई भी सरकारी डॉक्टर अपनी ड्यूटी के अतिरिक्त अवधि मैं प्राइवेट प्रैक्टिस कर सकते हैं लेकिन इसके लिए शर्तें होंगी :-

1) आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से संबंधित 04 प्राइवेट अस्पतालों से सूचीबद्ध हो सकते है

2) किसी सरकारी चिकित्सक द्वारा उपलब्ध कराए गए सूचीबद्ध अस्पतालों के नाम बदलने के लिए कम से कम 3 महीना का वक्त तय किया

3) सरकारी और प्राइवेट में 50-50 का समीकरण तय किया गया

यानी प्राइवेट अस्पतालों में सेवा देने के लिए सरकारी चिकित्सकों को समान रूप से सरकारी अस्पतालों में भी सेवा देनी होगी

झासा के अध्यक्ष एवं सचिव ने एक सुर में कहा कि 50 -50 के इस समीकरण पर असमंजस की स्थिति है

इसके लिए झासा अपर मुख्य सचिव  एवं स्वास्थ्य मंत्री महोदय से विचार विमर्श कर इसे और व्यवहारिक करने का प्रयास करेगा विदित है कि स्वास्थ्य सेवा एक आकस्मिक सेवा है,

जिससे जुड़े सभी सरकारी चिकित्सक के दिन-रात की मेहनत के बदौलत हमारा राज्य झारखंड सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भी लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने में सफल रहा है

झारखंड राज्य ने मोतियाबिंद के ऑपरेशन मे पूरे भारतवर्ष में अच्छा स्थान प्राप्त किया है

यह गिने-चुने चिकित्सक हैं, जिनकी संख्या बहुत कम है इनके कार्यों के लिए इन्हें पुरस्कृत किया जाना चाहिए

लेकिन चुकि इन्होंने आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आयोग योजना से संबंधित कुछ प्राइवेट अस्पतालों में अपनी सेवा दी है, जिसे इनका अपराध मान लिया गया और प्रपत्र क जैसे संगीन आरोप लगा दिया गए.

ऐसे में विभाग के आला अधिकारियों से संघ की अपील है कि इन चिकित्सकों के विरुद्ध प्रपत्र क जैसे संगीन आरोप पर पुनर्विचार कर इन्हें आरोप से मुक्त किया जाए.

साथ ही इस बात को दोहराया कि किसी भी चिकित्सक के अनुपस्थिति मात्र के कारण नेशनल मेडिकल काउंसिल को उसके रजिस्ट्रेशन निरस्त करने की अनुशंसा करना न्याय संगत नहीं है और इस पर भी पुनर्विचार करने की जरूरत है.

संघ ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है कि संघ विभाग और सरकार से सामंजस्य स्थापित कर चिकित्सकों से संबंधित सभी कठिनाइयों का हल निकालने का प्रयास करता रहेगाl

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