वर्षो बाद मोदी जैसा कला प्रेमी देश को प्रधानमंत्री के रुप मिला : मुकुंद नायक

 

RANCHI:  एक मध्यम गरीब परिवार में जन्म लेने वाला व्यक्ति नरेंद्र मोदी जी आज न सिर्फ भारत मे प्रसिद्ध है बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी करिश्माई छवि के कारण और कार्य-शैली के बल पर खूब चर्चा में है।

आज पूरी दुनियां उनकी ब्यवहार कुशलता,कूटनीति, वाक पटुता और वसुधैव कुटुंकब की नीति से इतना प्रभावित है कि आज वे विश्व के सबसे लोकप्रिय राजनेता के रूप में जाने जाते है।

मोदी जी की माँ धार्मिक प्रवृत्ति की रही है ,रोज दिन पूजा पाठ करना उनकी दिनचर्या में शामिल रहा है अतः मोदी जी को बचपन में ही सच्चाई, कर्तब्यपालन, अतिथि-सत्कार ,परमात्मा पर विश्वास और बड़ा लक्ष्य पाने के श्रेष्ट संस्कार दिए गए थे।

राष्ट्रभक्ति मां ने संस्कारो में और संघ शाखा ने ब्यवहार में सिखाई थी। मोदी जी बचपन से ही धार्मिक कार्यक्रमो और अध्यात्म में रुचि लिया करते थे।

जब से मोदी जी देश के प्रधानमंत्री बने तब से लेकर अबतक उन्होंने जो भी विकास के कार्य किये है उन सभी विकास के कार्यो में गरीब,दलित आदिवासी, शोषित परिवार के प्रति उनकी चिंता साफ साफ झलकती है।

चुकी मोदी जी अपनी मां की गरीबी, मजबुरी को करीब से देखा और अनुभव किये है अतः जब वे प्रधानमंत्री बने तो महिलाओं के लिए शौचालय का निर्माण करने की सोची।

भारत की बहुत सारी आदिवासी,दलित,गरीब और शोषित परिवार की महिलाएं खुले में शौच के लिए जाया करती थी। दिन में शौच करने की वे सोच भी नही सकती थी।

इस तकलिफ को मोदी जी ने एहसास किया और उसे दूर करने की ठानी आज लगभग पूरे देश में बाहर में शौच करने की प्रवृत्ति लगभग समाप्त हो गयी है।

दूसरी योजना जो उन्हें अन्य राजनेताओं से अलग बनाता है वो है उज्जवला योजना की शुरुआत करना।

बचपन से ही वे अपनी माँ को लकड़ी के चूल्हे पर आंख खराब करते हुए देखा था। जब मौका मिला इस समस्या से निजात दिलाने की तो देश भर की सभी माताओं एवम बहनों की इस समस्या का समाधान उन्होंने मुफ्त में रसोई गैस का वितरण करके किया। देश की जनता छोटी छोटी बचत कर सके इसलिए जनधन योजना की स्कीम लाया।

इस योजना के माध्यम से केंद्र से जो पैसे गरीबो की मदद के लिए भेजी जाती थी वो सीधे उनके खाते में जाने लगा। देश की सामरिक मजबूती पर भी उन्होंने खास ध्यान दिया।

रक्षा बजट में बढ़ोतरी करके सेनाओं की हर जरूरत को पूरा करने की कोशिश की। इस तरह से उन्होंने अपने 8 साल के शासन काल में कई ऐसी योजनाएं लाये जिससे आम जनता को सीधे लाभ मिला।

मोदी जी ने कोरोना काल मे अपनी सूझ बूझ ,कार्यकुशलता, आर्थिक मैनेजमेंट की लोहा पूरे विश्व को मनवाया। जब देश मे इस बीमारी से लड़ने की साधन नही था,

विदेश से मदद नहीं मिल रही थी वैसे समय मे मोदी जी ने दुनियां की सबसे बड़ी आबादी का इस्तेमाल करके इस समस्या से निबटने की सोची। देश के लोगो ने खुल कर सरकार की आर्थिक मदद की।

देखते ही देखते देश जिन मेडिकल सामग्री का आयात करता था उसका निर्यातक बन गया। न सिर्फ अपने नागरिकों को इस बीमारी से बचाया बल्कि विकसित देश के साथ साथ गरीब देशों की भी मदद की।

देश मे लॉक डाउन लग गया गरीब भूख से न मरे इसकी भी व्यवस्था उन्होंने 80 करोड़ जनता को मुफ्त में अनाज देकर की।

मोदी जी के आने के बाद आज भारत सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से भी उन्नति की राह पर चल रहा है।

मोदी जी देश के सांस्कृतिक धरोहर को बचाने और संरक्षण करने की दिशा में भी पहल कर रहे है। आज विदेशी मेहमानों को गिफ्ट के रूप में गीता भेंट की जाती है।

योग भारत की संस्कृति का एक अंग है उसे पूरे विश्व मे स्थापित करने हेतु विश्व योगा दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की।

मोदी जी बहुत ही दूरदर्शी  ब्यक्ति है। मैं कई दशक से कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में अपनी योगदान देता चला आ रहा हूं।

झारखंड की गीत,संगीत,कला और संस्कृति की पहचान को बनाये रखने हेतु भरसक प्रयास कर रहा हूं।

मैं राजनीतिक आन्दोलनों में अपने गीत के माध्यम से लोगो को जगाने का काम करता रहा हूँ।

मैंने कई समाजसेवी, राजनीतिज्ञ, कला प्रेमियों के साथ काम किया हूँ। आज मुझे मोदी जी की परखी नजर के कारण ही पदमश्री और संगीत नाटक अकादमी पुरुस्कार से नवाजा गया।

दिल्ली में बैठा ब्यक्ति वहां से हज़ारो किलोमीटर दूर में बसे झारखंड,असम जैसे सुदूरवर्ती ,पिछड़ा राज्य के गरीब ,कला प्रेमी और समाजसेवी को भारत के इतने बड़े पुरस्कार के लिए चुना यह इस बात को दर्शाता है

कि मोदी के दिल मे समाज का अंतिम पायदान पर बैठा ब्यक्ति और पूरा भारत बसता है।

आज मोदी जी की ही देन है कि भारत के आदिवासियों के अगुआ धरती आबा बिरसा मुंडा जी की आज़ादी की लड़ाई में उनकी योगदान को पूरा देश जाने इसके लिए उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा जी की जयन्ती को राष्ट्रीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लेकर इस समाज के प्रति अपनी प्रेम और लगाव को उजागर किया।

भारत के एक दलित समाज के ब्यक्ति श्री रामनाथ कोबिन्द जी को देश का राष्ट्रपति बनाया।

आजादी के 70 साल तक कोई भी आदिवासी समाज का सदस्य देश के सर्वोच्च पद को प्राप्त न कर सका था।

लेकिन मोदी जी की देन है कि आज एक आदिवासी समाज की महिला श्रीमती द्रौपदी मुर्मू देश की सर्वोच्च राष्ट्रपति के पद पर विराजमान है।

मैं मोदी जी से अबतक नही मिल पाया हूँ। लेकिन मिलने की तमन्ना है। जब मैं उनसे मिलूंगा तो झारखंड की कला और संस्कृति को बचाने,संरक्षण और संवर्धन करने की गुजारिश करूंगा।

झारखंड की कला और संस्कृति की जान आखरा है। उसे बचाने का निवेदन करूंगा क्योंकि अगर आखरा बचेगा तभी झारखंड की लोक संस्कृति बचेगी।

मुकुंद नायक
पद्मश्री और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
से सम्मानित

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