पीएम नरेन्द्र मोदी भारत को दुनिया का सिरमौर बनाने की दिशा में अग्रसर

 

“जय अनुसंधान” का मंत्र आत्मनिर्भर भारत और आर्थिक विकास का बनेगा वाहक

प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी के 17 सितम्बर जन्मदिवस पर विशेष

 

दीपक प्रकाश

(लेखक झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष  एवं राज्य सभा सांसद ) 

RANCHI:  26 जनवरी, 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने “जय जवान-जय किसान” के रूप में कालजयी नारा दिया था।

भारत-पाकिस्तान के युद्ध के दौरान देश के जवानों और किसानों का हौसला बढ़ाने को लेकर यह नारा था।

कालांतर में वर्ष 1998 में ऐतिहासिक पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद इसी नारे को थोड़ा विस्तारित करते हुए देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने इसमें “जय विज्ञान” जोड़कर इसे “जय जवान-जय किसान-जय विज्ञान” बना दिया।

अब इसी कड़ी में एक और सितारा को जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “जय अनुसंधान” का नारा बुलंद किया है। 76वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने देश में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए लाल बहादुर शास्त्री के मूल नारे में ‘जय अनुसंधान’ को जोड़कर इसे और बड़़ा कर दिया।

यानी “जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान”। ‘जय जवान, जय किसान’ को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता की अमृत काल के लिए एक और अनिवार्यता है और वह है जय अनुसंधान।

मोदी ने कहा कि हमारा प्रयास है कि देश के युवाओं को अंतरिक्ष से लेकर समुद्र की गहराई तक सभी क्षेत्रों में शोध के लिए हर संभव मदद मिले।

इसलिए केन्द्र सरकार अपने अंतरिक्ष मिशनों और गहरे समुद्र मिशनों का विस्तार कर रही है। जय अनुसंधान शब्द भले ही 76वें स्वतंत्रता दिवस पर निकला हो, लेकिन यह भावना नरेन्द्र मोदी जी के सीने में लंबे समय से रही है।

मोदी ने पहली बार जनवरी 2019 में जालंधर में भारतीय विज्ञान कांग्रेस में ‘जय अनुसंधान’ का उल्लेख किया था।

“जय अनुसंधान” शब्द का उद्देश्य देश में लगातार बढ़ते विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचारों और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को और बढ़ावा देना है।

जब मोदी सरकार कोई नारा देती है तो वह केवल उद्घोष करने के लिए नहीं होते, मोदी सरकार में वे नारे ही शासन के संकल्प हैं।

नरेन्द्र मोदी वक्त का नब्ज और हवा के रूख को पकड़ना बखूबी जानते हैं। शायद यही कारण है कि उन्होंने जय अनुसंधान को इस अमृत काल के कालखंड के बीच देश के समक्ष परोसकर इसकी पराकाष्ठा को जमीन पर उतारने की ठानी है।

यही प्रतिबद्धता नरेन्द्र मोदी की मूल पूंजी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार आठ साल पूरी कर चुकी है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 26 मई, 2014 को जब पहली बार केंद्र की सत्ता संभाली थी तब देश निराशा और हताशा के दौर से गुजर रहा था।

सामान्य जनमानस के मन में यह भाव पूरी तरह घर कर गया था कि अब इस देश का कुछ नहीं हो सकता।

प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी के आठ वर्ष का कार्यकाल उनके संकल्प-सेवा की बेमिसाल गाथा है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वाभिमान, आत्माभिमान, सुरक्षा सहित सभी अध्याय निहित हैं। नरेन्द्र भाई मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में मात्र आठ साल में देश को जो कुछ दिया है, वह कई मायनों में अतुलनीय है।

पिछले आठ साल शासन और प्रशासन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहे हैं। किसी राजनीतिक नेता के विशिष्ट कार्यो का जब मूल्यांकन होता है अमूमन वह संबंधित नेता के चुनावी मैदान में सफलता-असफलता के परिणामों के इर्द-गिर्द रखकर होता है।

नेता भी अपनी सफलता को पाने के लिए कितने चुनाव जीते या जिताए, के ही गुणा भाग में लगे रहते हैं। वास्तव में इतना मूल्यांकन ही पर्याप्त नहीं माना जा सकता है। उस नेता द्वारा समाज को दिशा, जनता में गुण संवर्धन एवं भविष्य की चुनौतियों से लड़ने योग्य दिशा दी अथवा नहीं, मूल्यांकन का यह भी एक आधार होना चाहिए।

इस कसौटी पर भी नेताओं को कसा जाना चाहिए। साल 2014 में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी ने देश के विकास के लिए , गरीबों के उत्थान के लिए एवं देश की अन्तर्बाह्य सुरक्षा जैसे अनेक विषयों को केंद्रित कर योजनाएं प्रारंभ की है।

इन आठ सालों के कार्यकाल में देश में शासन और शासक की परिभाषा ही बदल गई है। भारत की राजनीति में सिर्फ राजनीति करने, चुनाव लडने और सत्ता हासिल करने की रीति-नीति पर विराम लग गया है।

मोदी देश में सुशासन और विकास के ब्रांड बन गए हैं। इन सबसे अलग जिन विषयों के लिए उनका कार्यकाल एवं उनका दूरदर्शी नेतृत्व सदैव प्रेरणादायक व स्मरणीय रहेगा, उन विषयों को वोट की तराजू पर तो कतई नहीं तौला जा सकता।

पीएम मोदी ने जन कल्याणकारी योजनाओं को शत प्रतिशत धरातल पर उतार कर आम लोगों तक इनका फायदा पहुंचाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता कई बार प्रमाणित किया है।

पीएम मोदी अपनी कई योजनाओं को जन आंदोलन में बदलकर बुनियादी क्रांति के अग्रदूत बन बैठे।

स्वच्छता अभियान की बात हो या खुद को स्वस्थ रखने के लिए योग अपनाने की उनकी अपील। पूरा देश उनके साथ कदमताल कर बैठा।

इसी तरह घरेलू गैस पर सब्सिडी छोड़ने की उनकी एक अपील पर लाखों लोगों ने स्वेच्छा से हुए सब्सिडी छोड़कर बता दिया कि नरेन्द्र मोदी की अहमियत क्या है।

इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत एक वैश्विक अनुसंधान और विकास हब के तौर पर तेजी से उभर रहा है और केन्द्र सरकार इसे रफ्तार देने की दिशा में कदम भी बढ़ा चुकी है।

सरकार के ऐसे ही प्रयास के चलते वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से शिक्षा, कृषि और स्वास्थ्य समेत विभिन्न क्षेत्रों में निवेश संभव भी हो रहा है। जय अनुसंधान का यही मूल मंत्र भविष्य के भारत को निखारने और सुढ बनाने में कारगर होगा।

अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों पर गौर किया जाए तो वैश्विक अनुसंधान एवं विकास खर्च में भारत की हिस्सेदारी बढ़ी है।

इंडियन साइंस एंड रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंडस्ट्री रिपोर्ट 2019 के अनुसार भारत बुनियादी अनुसंधान के क्षेत्र में शीर्ष रैंकिंग वाले देशों में शामिल है। विश्व की तीसरी सबसे बड़ी वैज्ञानिक और तकनीकी जनशक्ति भारत में है।

नैनो तकनीक पर शोध के मामले में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है।

मौसम पूर्वानुमान एवं निगरानी के लिये प्रत्युष नामक शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर बनाकर भारत इस क्षेत्र में जापान, ब्रिटेन और अमेरिका के बाद चौथा प्रमुख देश बन गया है। भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी देशों में सातवें स्थान पर है।

2014 के बाद, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में निवेश तेजी से बढ़ा है। भारत ने हाल के वर्षों में ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में एक बड़ी छलांग लगाई है।

भारत की रैंकिंग 2021 में 46वीं थी जबकि साल 2015-16 में यह 81वें नंबर पर थी। पिछले छह वर्षों में, भारत ने अपनी रैंकिंग में 35 स्थानों का सुधार किया है।

 

‘यूपीआई भीम’ जैसे शोध ने वित्तीय प्रौद्योगिकी की दुनिया में क्रांति ला दी है। इनोवेशन की ताकत देखिए, आज दुनिया के डिजिटल वित्तीय लेनदेन का 40 प्रतिशत भारत में हो रहा है। देश 5जी की तरफ बढ़ रहा है और ऑप्टिकल फाइबर बिछाने में भी तेजी से प्रगति की है।

हिंदुस्तान के 4 लाख कॉमन सर्विस सेंटर गांव में विकसित हो रहे हैं. गांव के नौजवान, बेटियां कॉमन सर्विस सेंटर चला रही हैं।

कोरोना काल में भी कई उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि भारत ने जो ठाना, वह करके दिखाया। नए वेंटीलेटर्स और कोरोना टेस्टिंग लैब्स का चरम गति से निर्माण करने में हमने कीर्तिमान बनाए हैं।

तात्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी का कथन हम सभी को याद होगा कि केन्द्र से चले 1 रूपया में से लाभार्थी तक केवल 15 पैसे ही पहुंच पाता है।

नरेन्द्र मोदी ने इस परंपरा को बंद कर सीधे लाभुकों के खाते में डीबीटी के माध्यम से पैसे भेजना प्रारंभ कर भ्रष्टाचार रूपी इस कैंसर पर विराम लगाने का काम किया।

भाजपा सरकार के जनकल्याणकारी कार्यों में गरीबों के लिए पक्के घर से लेकर शौचालय के निर्माण तक, आयुष्मान भारत योजना से लेकर उज्ज्वला योजना तक, हर घर नल से जल से लेकर हर गरीब को बैंक खाते तक, ऐसे कितने ही काम हुए हैं, जिनकी चर्चा केवल भारत ही नहीं बल्कि आज पूरी दुनिया में हो रही है।

प्रधानमंत्री की चिंता इस अमृत काल में भारत को अनुसंधान और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए विभिन्न मोर्चों पर एक साथ कार्य कर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपने शोध को स्थानीय स्तर पर ले जाने की है।

वैज्ञानिकों से भी आह्वान किया कि आप बेहतर इलाज करने का तरीका साइंस एवं टेक्नोलॉजी में ढूंढ सकते हैं।

प्रधानमंत्री का कहना है कि हमें दुनिया में लीडरशिप लेनी है और अपने संकल्पों को पूरा करके दिखाना है। हमें समय के अनुरूप समस्याओं का समाधान करने होंगे, वह भी समय सीमा के अंदर।

इनका साफ मत है कि हमें दुनिया में प्रतिस्पर्धा नहीं करनी है श्रेष्ठता दिखानी है। हमें देश को उस स्तर पर ले जाना है जिससे दुनिया भारत के पीछे चले।

पीएम मोदी ने न केवल देश की राजनीति और शासन-प्रशासन की कार्यशैली को बदला, बल्कि अपने कूटनीतिक कौशल से विश्व में देश का मान सम्मान भी बढ़ाया।

यूक्रेन संकट के दौरान दुनिया ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताकत को देखा है।

भारत एकमात्र ऐसा देश है, जिसने अपने एक-एक नागरिक को यूक्रेन से सुरक्षित स्वदेश वापस ला सका है।

अभी हाल ही में ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। एक दशक पहले भारत सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में 11वें नंबर पर था जबकि ब्रिटेन पांचवें नंबर। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं हैं इसे इस नजरिए से देखिए कि भारत ने उस देश को पीछे छोड़ा जिसने हम पर 250 साल तक हुकूमत की।

अब देश के सामान्य नागरिक की बुनियादी जरूरत सिर्फ रोटी, कपड़ा और मकान नहीं हो सकती। 21वीं सदी में इन सबके अलावा कनेक्टिविटी चाहिए, अच्छी शिक्षा चाहिए, चिकित्सा सुविधा चाहिए, पीने का स्वच्छ जल चाहिए, बिजली चाहिए, इंटरनेट चाहिए, शौचालय चाहिए, सुरक्षा चाहिए, सम्मान चाहिए और विकास में भागीदार बनने के नए अवसर चाहिए। इसी लक्ष्य को पाने के लिए सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के सोच को केंद्र में रखकर मोदी सरकार ने अपनी यात्रा की शुरुआत की।

भारत के प्रति विश्व की दृष्टि में भी आमूलचूल परिवर्तन हुआ है। दुनिया के कोने-कोने में रहने वाले लाखों भारतीय इसका प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं।

जय अनुसंधान के नारे के समय प्रधानमंत्री के लंबे भाषण के इस अंश पर गौर फरमाइए- ‘जब भारत 2047 में अपनी स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ मनाएगा, तब युवा, जो आज अपनी 20-25 वर्ष की आयु में हैं, वे 45 से 50 की उम्र में होंगे।

आपके जीवन के आने वाले 25 वर्ष देश के संकल्पों को पूरा करने का समय है। मेरे साथ शपथ लो, इस तिरंगे की शपथ लो कि 100वीं वर्षगांठ पर हमारा देश एक विकसित राष्ट्र होगा।

प्रधानमंत्री का यह सपना सामूहिक प्रयास से ही साकार होगा। सभी को अपनी जिम्मेवारियों का ईमानदारी से निर्वहन करना होगा। चुनौतियां थोड़ी बड़ी जरूर हैं। सफर अभी लंबा है। कहते हैं ना कि हर चुनौती में अपनी क्षमता साबित करने का एक अवसर भी छिपा होता है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने कहा था कि भारत माता की जय का अर्थ समाज जीवन के सभी क्षेत्रों में भारतीय चिंतन के आधार पर नीतियों का क्रियान्वयन है। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में हम सभी के समक्ष उनसे प्रेरणा लेकर इस संकल्प को पूर्ण करने का एक सुनहरा मौका है।

आज वही मौका हमारा इंतजार कर रहा है कि हम दुनिया को दिखा सकें कि हममें विश्व गुरू बनने की क्षमता है। सबके प्रयास से नरेन्द्र मोदी भारत को दुनिया का सिरमौर बनाने की दिशा में अग्रसर हैं

 

 

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