मेड सुनीता के साथ अमानवीय अत्याचार करने वाली भाजपा नेत्री को गिरफ्तार करे पुलिस प्रशासनःविजय शंकर नायक

भाजपा नेत्री सीमा पात्रा का पुत्र ने जब विरोध किया तो उसे पागल करार देकर रिनपास में भर्ती कराया

 

RANCHI:  मेड सुनीता खाखा के साथ अमाानवीय पाशविक अत्याचार करने वाली रिटायर्ड आईएएस महेश्वर पात्रा की पत्नी और भाजपा नेत्री सीमा पात्रा को एससी एसटी एक्ट के तहत एवं विभिन्न भारतीय दंड विधान की धारा को लगाकर अविलंब गिरफ्तारी की जाए अन्यथा उनके घर की घेराबंदी अशोकनगर में की जाएगी

जिसकी जिम्मेवारी जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन पर होगी ।

उपरोक्त बातें झारखंडी सूचना अधिकार मंच के केंद्रीय अध्यक्ष
– सह- हटिया विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी विजय शंकर नायक ने आज कहीं

इन्होंने यह भी कहा भाजपा नेत्री सीमा पात्रा ने मानवता को शर्मसार किया है और आदिवासी बेटी पर जुल्म का इंतहा पार किया है जो माफी योग्य नही है जिसकी जितनी निंदा किया जाय कम है ।

इन्होने यह भी कहा कि हद तो यह है कि इस अमानवीय पाशविक अत्याचार एंव व्यवहार करने से उनके अपने पुत्र आयुष्मान पात्रा ने जब विरोध किया

और उसने मां से ऐसा अमानवीय अत्याचार नहीं करने को कहा तो सीमा पात्रा ने उल्टे उसे मानसिक रोगी करार देते हुए रिनपास में भर्ती करा दिया

आयुष्मान पात्रा अभी भी रिनपास में भर्ती है जो इस बात को दर्शाता है की भाजपा नेता सीमा पात्रा एक निहायत ही अपराधिक षड्यंत्रकारी शातिर मानसिकता की महिला है ऐसी महिला को समाज में रहने का कतई अधिकार नहीं है।

श्री नायक ने आगे कहा कि सुनीता खाखा के मुताबिक उसे एक कमरे में बंद कर दिया जाता था

और उसे खाना-पीना तक बंद कर दिया जाता था बिना बात के उसके साथ मार-पीट किया जाता था ।

उसके आगे के तीनों दांत कठोर वस्तु से प्रहार कर तोड़ दिए गए. बेरहमी इतनी कि इस घर में काम करने आई अच्छी-भली सुनीता खाखा अपने पांवों पर खुद खड़ी नहीं हो पाती है और वह फर्श पर घिसट-घिसट कर चलती लगी ।

बंद कमरा ही उसका अब बेडरूम और बाथरूम था। अगर गलती से सुनीता का पेशाब कमरे से बाहर चला जाता तो उसे अपने मुंह से उसे चाट कर साफ करना पड़ता था. घिसट-घिसट कर वो किसी तरह वो ये काम भी करती थी. उसके जिस्म पर बेहिसाब जख्म हैं ।

श्री नायक ने यह भी कहा कि सुनीता के मुताबिक उसे गर्म तवे से कई बार दागा गया।

उसके चेहरे, हाथ, पांव, पेट, पीठ हर जगह जख्म हैं.

सीमा पात्रा का बेटा आयुष्मान एक जीनियस स्टूडेंट हुआ करता था. बीआईटी मेसरा के 2002 बैच में बीटेक (मेकनिकल) ब्रांच में उसका दाखिला हुआ।

अत्याचार की इस कहानी को बंद कमरे से निकालकर पुलिस तक पहुंचाने वाले और सुनीता पर हो रहे अत्याचार की लिखित कंप्लेन पुलिस में दर्ज कराने वाले आनंद विवेक बास्के से उसकी दोस्ती वहीं हुई ।

विवेक बास्की इन दिनों झारखंड सरकार के सचिवालय में कार्मिक एवं राजभाषा विभाग में प्रशाखा पदाधिकारी हैं।

आनंद विवेक के अनुसार वे दोनों एक दूसरे के घर आना-जाना करते थे. विवेक ही वो शख्स हैं, जिन्होंने सुनीता पर हो रहे जुल्म की सूचना पुलिस-प्रशासन तक पहुंचाई थी ।

अमानवीय अत्याचार को पुलिस तक पहुंचाने एवं भंडाफोड़ करने के लिए झारखंडी सूचना अधिकार मंच विवेक बास्की को बधाई देता है कि उन्होंने एक आदिवासी बेटी के ऊपर हो रहे जुल्म अत्याचार के खिलाफ एक अच्छी लड़ाई लड़ी जो कामयाब रही ।

श्री नायक ने राज्य के मुख्यमंत्री  हेमंत सोरेन एवं स्वास्थ्य मंत्री  बन्ना गुप्ता से मांग किया इस अत्याचार कि शिकार हुइ आदिवासी बेटी सुनीता खाखा के इलाज में किसी तरह की कोताही ना बरतें और उसे अच्छा से अच्छा इलाज करने का निर्देश रिम्स प्रशासन को देने का कार्य करें ताकि सुनीता खाखा आदिवासी की बेटी जल्द से जल्द स्वस्थ हो सके

और राज्य में घरेलू कामगार महिलाओं की सुरक्षा हेतु श्रम मंत्री श्री सत्यानंद भोक्ता जी एक ऐसा ठोस पहल कर एक ऐसा कानून बनाने का काम करें

ताकि पुन: किसी आदिवासी की बेटी मूलवासी की बेटी गरीब की बेटी पर यह अत्याचार जुल्म सितम की घटना ना हो और घटना की पुनरावृत्ति ना हो सके ।

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