झारखंड अंगदान मामले में काफी पीछे, जागरुकता जरुरी:डॉ कामेश्वर प्रसाद

 

रिम्स निदेशक ने विश्व अंगदान दिवस पर किया सेमिनार का उद्घाटन

RANCHI:  ट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (सोटो) झारखंड द्वारा शनिवार को विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया।

हर साल 13 अगस्त को विश्व अंगदान दिवस मनाया जाता है

जिसका मुख्य उद्देश्य अंगदान के बारे में जागरूकता फैलाना है, ताकि मृत्यु के बाद लोग अपने स्वस्थ अंगों को दान कर के दूसरों को नया जीवन देने के लिए प्रोत्साहित हों।

सेमिनार को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ) कामेश्वर प्रसाद, निदेशक रिम्स ने कहा कि झारखंड अंगदान के मामले में काफी पीछे है इसलिए राज्य में जागरूकता लाने की ज़रूरत है।

उन्होंने कहा, “किसी भी प्रकार के दान के लिए मन में परोपकारिता के भाव लाने की ज़रूरत है ताकि दूसरों की मदद बदले में बिना किसी चीज़ की अपेक्षा किये कर सकें। अंगदान से कई लोगों को फायदा होगा।”

डॉ प्रज्ञा पंत,सहायक प्रोफेसर, नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट ने बताया अंग प्रत्यारोपण की ज़रूरत किसे और क्यों ज़रूरत पड़ती है।साथ ही

उन्होंने बताया मानव शरीर के कीमती अंग इंसान की मौत के बाद दूसरे में ट्रांसप्लांट करने से उसकी जिंदगी को बचाया जा सकता है।

न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ सुरेंद्र ने सेमिनार के दौरान ब्रेन स्टेम डेथ के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

वहीं डॉ राजीव कुमार गुप्ता, आंख के विभागध्यक्ष ने राज्य में कॉर्निया दान की मौजूदा स्थिति के बारे में अवगत कराया।

डॉ राणा प्रताप सिंह, सहायक प्रोफेसर यूरोलॉजी विभाग ने जीवित अंगदान से जुड़े कई पहलू पर प्रकाश डाला।

डॉ राजीव रंजन,नोडल पदाधिकारी, सोटो झारखंड ने अंगदान से जुड़े कानूनी पहलू के बारे में बताया,

साथ ही अंगदान और प्रत्यारोपण में सोटो की भूमिका पर भी विस्तार से बताया।

समारोह के दौरान पोस्टर प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित भी किया गया।

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