झारखंड आईएमए ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, स्वास्थ्य विभाग के आदेश को अविलंब विलुप्त करने का किया आग्रह

RANCHI:  झारखंड आईएमए ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आदेश को अविलंब विलुप्त करने का आदेश देने का आग्रह किया है.

झारखंड आईएमए के अध्यक्ष डॉ एके सिंह एवं महासचिव डॉ प्रदीप कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कर बताया है कि विभाग द्वारा जारी आदेश से चिकित्सकों के मनोबल पर विपरीत असर होगा.

विभाग के नये फरमान में सरकारी चिकित्सकों को ड्यूटी अवधि के बाद प्राइवेट अस्पताल में केवल ओपीडी में मरीजों को देखेंगे अस्पताल में  भर्ती मरीजों का इलाज नहीं करेंगे.

ऐसा प्रतीत होता है कि स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी चिकित्सकों को प्रताड़ित करने का निर्णय ले रखा है

एक तरफ सरकार को ढूढने से भी चिकित्सक नहीं मिल रहें हैं चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा बढाया जा रहा है,

उसके बाद इस तरह का बेतुका, जनहित विरोधी छोटे क्लिनिक्स एवं अस्पतालों को बंदी की ओर धकेलने वाला निर्णय लिया जा रहा है.

कोविड काल में जब पूरी व्यवस्था चरमरा गयी थी

तब इन्ही सरकारी चिकित्सकों एवं निजी चिकित्सकों ने अपनी जान की परवाह किये बिना अपने लोगों की निस्वार्थ सेवा की थी

सरकारी एवं निजी चिकित्सकों ने महामारी को आपदा समझा ना की पैसा कमाने का मौका.

रिम्स, रांची को छोड़कर सरकारी चिकित्सकों को नन प्रैक्टिसिंग भत्ता नहीं दिया जाता है फिर उन्हें ड्यूटी अवधि के बाद प्राइवेट अस्पताल में मरीजों के इलाज करने से क्यों रोका जा रहा है?

स्वास्थ्य विभाग के उक्त निर्णय एवं आदेश से राज्य के सभी सरकारी चिकित्सकों में रोष व्याप्त है.

झारखंड आईएमए ने मुख्यमंत्री से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अविलंब स्वास्थ्य विभाग के आदेश को विलुप्त करने का आदेश देने का आग्रह किया है.

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