मंकीपॉक्स को लेकर झारखंड में अलर्ट जारी,अपर मुख्य सचिव ने जारी किये निर्देश

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 74 देशों में फैल चुका,दुनियाभर में 16 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके

 

RANCHI:  झारखंड में मंकीपॉक्स बीमारी के बचाव और उसके  नियंत्रण एवं जांच को लेकर राज्य के अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य विभाग अरुण कुमार सिंह ने मंगलवार को अलर्ट जारी किया है। पत्र के माध्यम से राज्य के रिम्स रांची के निदेशक सहित सभी मेडिकल कालेजों  के प्राचार्य एवं अधीक्षक को पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिये हैं।

पत्र के माध्यम से बताया गया है कि मंकीपॉक्स एक संक्रामक बीमारी है तथा मंकीपॉक्स वायरस के कारण होती है। एवं मनुष्यों में जानवरों से फैला है।

मंकीपॉक्स एक विषाणु(DNA वायरस) फैलने वाला रोग है, जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 74 देशों में फैल चुका है।

एवं मई 2022 के बाद से अबतक दुनियाभर में 16 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं।

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि  विगत दिनों केरल से तीन ,तेलंगाना से एक तथा दिल्ली से दो मरीजों में मंकी पॉक्स की पुष्टि की जा चुकी है।

झारखंड राज्य में अभी तक मंकीपॉक्स का कोई मामला नहीं मिला है। लेकिन उक्त रोग के प्रति सतर्कता एवं जन सामान्य को इस रोग के प्रति जागरुक करना आवश्यक है।

ताकि इसके संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। मंकीपॉक्स के बचाव, रोकथाम, नियंत्रण, जांच तथा इलाज हेतु सतत निगरानी के दृष्टिकोण से कार्य करना सुनिश्चित किया जा सके।

मंकीपॉक्स के लक्षण

मंकीपॉक्स जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारी है। जिसके लक्षण चेचक जैसे दिखते हैं।

बुखार,सिरदर्द, मांसपेशी में दर्द, पीठ दर्द,थकान महसूस होना,लिर्फ नोड में सूजन और शरीर पर चकते, जो तीन सप्ताह तक रह सकते हैं।

संक्रमित मरीज के खांसने, छींकने से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स से यह वायरस दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है।

संक्रमित व्यक्ति के कपड़े से भी फैल सकता है।विदेश  यात्रा से  लौटने के बाग अगर 21 दिनों के भीतर बुखार, सिर्दर्द,शरीर में दर्द और कमजोरी महसूस होती है तो इस परिस्थिति में बिना देर किये जांच करवाने के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर जाना चाहिए।

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