झारखंड में प्रदूषण मानकों का पालन नहीं करने वाले 267 उद्योगों पर हुई कार्रवाई: भूपेन्द्र यादव

 

संसद सत्र के पहले दिन लोस में सांसद संजय सेठ के सवाल पर केंद्रीय मंत्री का जवाब

RANCHI: झारखंड में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले 267 उद्योगों पर क्षतिपूर्ति की कार्रवाई की गई है। पर्यावरण संरक्षण बेहतर तरीके से हो, प्रदूषण का स्तर कम हो, इसके लिए भारत सरकार कई अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार काम कर रही है।

उक्त आशय की जानकारी केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री  भूपेंद्र यादव ने आज लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान दी। लोकसभा सत्र के पहले दिन प्रश्नकाल के दौरान रांची के सांसद श्री संजय सेठ ने पूछा था कि बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कोई योजना बनाई गई है या नहीं। वनों की कटाई और नए वृक्ष लगाए जाने से संबंधित सवाल भी सांसद ने पूछे थे। सांसद श्री सेठ ने यह भी जानना चाहा था कि विभिन्न माध्यमों से बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार के द्वारा क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

सांसद श्री सेठ के सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने सदन में बताया कि पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रण करने के लिए मंत्रालय के द्वारा केंद्र स्तर पर कई क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। जिसमें प्रदूषण नियंत्रण योजना, खतरनाक पदार्थों के लिए प्रबंधन संरचना का निर्माण, अनुसंधान और जनसंपर्क कार्यक्रम, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम जैसे योजनाओं के माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण पर काम किया जा रहा है।

इन योजनाओं की शुरुआत वर्ष 2017-18 से की गई है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि व्यापारिक पत्रों के माध्यम से परिसंपत्ति का संधारणीय प्रबंधन, रसायनों और अपशिष्ट का पर्यावरण के अनुकूल प्रबंधन के संबंध में सरकार ने स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं।

सांसद के सवाल के जवाब पर मंत्री ने बताया कि देश में वृक्ष आवरण की वृद्धि के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के साथ मिलकर विभिन्न योजनाएं क्रियान्वित करती है। वनों की कटाई के बदले अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाएं, इसके लिए मनरेगा, राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति और कृषि वानिकी संबंधित मिशन, राष्ट्रीय बांस मिशन, राष्ट्रीय सन्धारणीय कृषि मिशन के तहत कई प्रकार के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

देश में प्रदूषण का स्तर कम हो और इसे नियंत्रण में लाया जाए, इसके लिए सरकार ने अब कई विकल्पों पर भी काम करना शुरू किया है। जिसमें सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। अप्रैल 2020 से इंधन और वाहनों के लिए bs6 मानक की शुरुआत की गई है।

ई-वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। पीएनजी जैसे स्वच्छता इंधन का उपयोग, ईट भट्ठा के लिए मिश्रित प्रौद्योगिकी का उपयोग, प्लास्टिक और अपशिष्ट के प्रबंधन हेतु विस्तारित उत्पादक दायित्व (ईपीआर) को सख्ती से लागू किया गया है। प्रमुख औद्योगिक सेक्टरों की वास्तविक समय निगरानी भी की जा रही है।

इसके अतिरिक्त मंत्रालय के द्वारा अपशिष्ट नियम व चिकित्सकीय नियम जैसे कई अन्य क्षेत्रों से भी जुड़कर बेहतर काम किया जा रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्यों में काम करने वाला राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समय-समय पर इन सब की निगरानी भी करता है।

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