परिश्रम व लगन से मिली सफलता:अचल प्रियदर्शी

युवा लेखक की बेहतरीन रचना

झारखंड प्लस :ज्ञान का अलौकिक भंडार

RANCHI: “जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि”, अतः ज़ाहिर है कि कलम तलवार से ज्यादा ताकतवर होती है। इसकी क्षमता अतुलनीय है। लेखनी में अपनी उपस्थिति स्थापित करने वाले रांची के युवा लेखक अचल प्रियदर्शी का मानना है कि उनकी प्रकाशित पुस्तक “झारखंड प्लस” में झारखंड आधारित सामान्य ज्ञान का भंडार व्याप्त है।

उन्होंने कोरोना के डरावनी दूसरी लहर के पीड़ितों के मदद के लिए योजना बनाई जिसके तहत अचल ने किताब लिखी। और जिन्होंने फंडिंग में मदद की उनको किताब देकर अभिनन्दन किया।

किताब छापने वाली दिल्ली की इंटीग्रिटी मीडिया के मालिक नवीन श्रीवास्तव को अचल की किताब इतनी पसंद आई कि इन्होंने बतौर दूसरे संस्करण के लिए अचल से अनुबंध किया है। अचल की दूसरी किताब द ट्राइबलपीडिया जो अक्टूबर में फ़्रंकफ़र्ट बुक शो 2022 में इंटेग्रिटी मीडिया द्वारा लॉन्च होगी।

अगले महीने झारखंड + का दूसरा संस्करण बाजार में आ जायेगा। ये किताबें जेपीएससी एवं शैक्षणिक अध्ययन के हिसाब से तैयार किये जा रहें है। इस संदर्भ में अचल कहते है कि इसके लिए उन्होनें दो रिसर्च आर्टिकल भी यूजीसी जर्नल में प्रकाशित करवाये है।

इसके अलावा वो अभी जनजातीय अनुसंधान संस्थान, राँची के लिए संथाल जनजाति के ऊपर काम कर रहे है। यहाँ से उन्हें झारखंड एवं यहाँ की जनजातियों के बारे में प्रगाढ़ समझ बढ़ाने में काफी सहायता मिली, जिसे आगामी पुस्तकों में इस्तेमाल किया गया है।

बतौर लेखक उन्होंने एक-एक रचनाओं को नई ऊर्जा प्रदान की है। जिसकी परिणति हमारे सामने है। लेखनी की दुनियाँ में बखूबी पहचान रखने वाले अचल कहते है कि घुमा-फिर कर लिखने के बजाय, रचना का स्वरूप स्पष्ट होना चाहिए। अचल अपने तीनों किताबों के साथर्कता के लिए अपने माता-पिता, भाई अमल, भार्या मधु और गुरु नवीन के सहयोग को अभूतपूर्व मानते है।

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

खबरें एक नजर में….