केजीबीवी में 238 शिक्षिकाओं की निकली वेकैंसी

 

 

प्रवीण उपाध्याय

203 विद्यालय, 90,000 बेटियां व टीचर सिर्फ 1015

RANCHI: गुरु बिनु ज्ञान कहां जग माही’ कहते हैं बिना गुरु के ज्ञान प्राप्त नहीं होता, अतः समृद्ध राष्ट्र के निर्माण में शिक्षक एवं शिक्षिकाओं की भूमिका सार्थक होती है। टीचर बनने के लिये महिला अभ्यार्थियों के समक्ष बेहतरीन मौका है।

राज्य के 203 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 238 रिक्त पदों पर वेकैंसी निकली है। इसके तहत तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उक्त जानकारी राज्य शिक्षा परियोजना के प्रशासी पदाधिकारी जयंत कुमार मिश्रा ने दी।

राज्य में शिक्षा के बुनियादी ढ़ांचे में जो बेशुमार कमियां और खामियां हैं,उन्हें दूर करने पर तत्काल चिंतन-मनन शुरू किया जाना चाहिए। सूबे के 203 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 90,000 बेटियां अध्ययनरत होते हुए भी सिर्फ 1015 टीचर पठन-पाठन कार्य में योगदान दे रही हैं।

जीवन में सफलता हासिल करने और कुछ अलग करने के लिए शिक्षा सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण उपकरण है। ऐसे में शिक्षकों की कमी से सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत नौनिहालों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा कैसे ग्रहण हो सकेगा।

89 मॉडल स्कूल, 9,000 नौनिहाल व केवल टीचर 130

वर्तमान में शिक्षा का आधुनिकरण सुनते ही हमारे जेहन में नवीन तकनीकी माध्यम से पठन-पाठन, स्मार्ट क्लास एवं इंटरनेट की सभी सुविधाओं से सम्पन्न विद्यालय की कल्पना उभरती है।

इसके बावजूद राज्य भर के 89 मॉडल स्कूलों में 9,000 नौनिहालों के पठन-पाठन कार्य का जिम्मा केवल 130 टीचर्स उठा रहे हैं। वस्तुत:राज्य में स्कूली शिक्षा के पूरे ढ़ांचे को संसाधन सम्पन्न करने और कुशल नेतृत्व एवं प्रबंधकीय दक्षता के साथ इसमें व्यवहारिक तथा परिणामदायक परिवर्तन की जरूरत है।

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