बीएयू में 42 वीं खरीफ फसल रिसर्च कौंसिल की बैठक का समापन

कुलपति ने किसान हित में शोध व प्रसार कार्यो में बेहतर समन्यवय एवं सहयोग पर जोर दिया

RANCHI : बीएयू कुलपति डॉ ओंकार नाथ सिंह की अध्यक्षता में 42 वीं खरीफ रिसर्च कौंसिल की बैठक का समापन बुधवार संपन्न हुआ.

अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति ने विश्वविद्यालय के शोध एवं प्रसार कार्यक्रमों से जुड़े वैज्ञानिकों को बेहतर तालमेल, समन्वय एवं सहयोग से किसान हित में कार्य करने पर जोर दिया.

उन्होंने कहा कि विगत दो वर्षो में वैज्ञानिकों ने फसल सुधार के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया है. इस कार्य में निरंतरता बनाये रखने की आवश्यकता है.

उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि में नित्य नये तकनीकी शामिल हो रही है. इसे प्रदेश के उपयुक्त और किसानों के त्वरित लाभ के लिए शोध में तेजी लानी होगी.

हाल में विकसित फसल किस्मों को कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से राज्य के किसानों के बीच प्रचलित करने के दिशा में प्रयास करने होंगे.

ताकि विवि तकनीकी का सही समय पर सही लाभ किसानों को मिल सकें. कुलपति ने कार्यक्रम में भाग ले रहे दो किसानों को विवि द्वारा हाल में विकसित सभी फसल किस्मों के बीज प्रदान की और फसल प्रदर्शन से किसानों को अवगत कराने को कहा.

मौके पर हाल में विकसित 4 फसल किस्मों के विकास से जुड़े वैज्ञानिकों को सम्मानित किया. साथ ही अगले महीने सेवानिवृत्त होने वाले वरीय वैज्ञानिक डॉ रबिन्द्र प्रसाद को सम्मानित किया गया.

कौंसिल के एग्रीकल्चर एक्सपर्ट डॉ बीएन सिंह ने विवि अधीन कार्यरत तीन क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्रों में बेहतर प्रदर्शन कर रही फसल प्रजाति को क्षेत्रीय स्तर पर विकसित करने तथा राज्य वेरायटल रिलीज़ कमिटी से उस सबंधित क्षेत्र के उपयुक्त अनुशंसित जर्ने की आवश्यकता पर जोर दिया

उन्होंने उपराऊ भूमि के उपयुक्त अनेकों फसल किस्मों के स्थान पर दो प्रमुख बेहतर फसल किस्मों को प्रोत्साहित करने पर बल दिया.

साथ ही बेहतर प्रदर्शन वाली एक-दो काजू किस्मों को चिन्हित कर विकसित करने तथा वेरायटल रिलीज़ कमिटी अनुशंसा प्राप्त करने को कहा. बागवानी शोध क्षेत्र में अन्य संस्थानों से विकसित किस्मों को प्रोत्साहित करने के स्थान पर विवि उद्यान विभाग द्वारा राज्य के उपयुक्त बागवानी फसलों के किस्मों को विकसित करने की सलाह दी.

राज्य में करंज की बहुलता एवं मांग को देखते हुए करंज पर शोध शूरूआत करने को कहा.

वेटनरी एक्सपर्ट डॉ एके ईश्वर ने जैविक मिल्क उत्पादन को बढ़ावा, अंडा में कोलस्ट्रोल की उपस्थिति और इसे दूर करने, ए 2 मिल्क पर विशेष कार्य की दिशा में शोध करने पर बल दिया. उन्होंने उन्नत नस्ल झारसुक एवं झारसीम के अगले अनेक वर्षो तक रिवाइवल के लिए शोध तथा शोध कार्यक्रमों को लंबी अवधि तक शोध जारी रखने पर बल दिया. मौके पर किसानों में सिबन कुमार महतो एवं शैलेश मुंडा ने देशी खेती एवं आधुनिक कृषि पर अपने विचारों को रखा.

कौंसिल बैठक में कृषि कार्यो में कृषि वानिकी को बढ़ावा देने, गर्मी की अपेक्षा सर्दियों में वन व पौधे की विशेष देखभाल तथा मध्य मई माह में 50 से. मी. x 50 से. मी. की गहराई में पौधा रोपण से अधिक जड़ प्राप्त करने तथा अश्वगंधा में 5 टन प्रति हेक्टेयर कम्पोस्ट तथा 7.5 टन प्रति हेक्टेयर नीम केक के प्रयोग को अनुशंसा प्रदान की. बैठक के दौरान एग्रीकल्चर की रिपोर्टिंग डॉ नीरज कुमार, वेटनरी की रिपोर्टिंग डॉ नंदिनी कुमारी तथा फॉरेस्ट्री की रिपोर्टिंग डॉ कौशल कुमार ने की.

स्वागत भाषण में निदेशक अनुसंधान डॉ एसके पाल ने खरीफ रिसर्च कौंसिल की प्रमुख बिंदुओं और अनुशंसाओं पर प्रकाश डाला और आगामी खरीफ कार्यक्रमों की रणनीति पारित करने हेतु कुलपति, एक्सपर्ट एवं वैज्ञानिकों का आभार जताया. धन्यवाद उप निदेशक अनुसंधान डॉ सीएस महतो ने दी.
मौके पर डॉ एमएस यादव, डॉ सुशील प्रसाद, डॉ एमएस मल्लिक, डॉ एमके गुप्ता, डॉ नरेंद्र कुदादा, डॉ एमएस मल्लिक, डॉ डीके शाही, डॉ सोहन राम एवं डॉ एस कर्माकार. किसानों में सिबन कुमार महतो एवं शैलेश मुंडा सहित विवि के विभिन्न विभागों, कृषि विज्ञान केन्द्रों तथा क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्रों के वैज्ञानिक भी मौजूद थे.

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