बीएयू में नैनो यूरिया का फसल पर शोध का परिणाम उत्साह जनक: डॉ ओंकार नाथ सिंह

RANCHI: बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ ओंकार नाथ सिंह बताते है कि मृदा वैज्ञानिकों द्वारा लगातार तीन वर्षो तक के शोध में नैनो यूरिया का फसल पर प्रभाव बेहतर एवं उत्साहजनक पाया गया है.

राज्य के किसान काफी जागरूक हैं. लाभ दिखने पर किसी तकनीक को अपनाने में हिचकिचाते नहीं दिखाते है. नैनो यूरिया एक तरल उर्वरक है, इसके उपयोग से उर्वरक लागत में कमी व अधिक उपज मिलने के साथ-साथ प्रदूषण का प्रभाव भी कम पाया गया है.

इसके प्रयोग से अन्य उर्वरकों की उपयोगिता क्षमता एवं उपज क्षमता में बढ़ोतरी के साथ फसल गुणवत्ता में सुधार भी देखा जा रहा है. सही मायने में नैनो यूरिया तरल उर्वरक आने वाले वर्षो में झारखण्ड के गरीब किसानों के लिए भी वरदान साबित हो सकती है.

राज्य में इस उर्वरक का फसलों पर प्रभाव का प्रदर्शन अधिकाधिक किसानों के खेतों में किये जाने की जरूरत है. उक्त बातें बीएयू कुलपति डॉ ओंकार नाथ सिंह ने प्रधानमंत्री द्वारा गुजरात में विश्व के प्रथम नैनो यूरिया (तरल) उर्वरक संयंत्र के लोकार्पण के आलोक में कही.

बीएयू के मृदा विज्ञान विभाग के अध्यक्ष एवं इफको नैनो उर्वरक शोध कार्यक्रम के परियोजना अन्वेंषक डॉ डीके शाही ने बताया कि विभाग में वर्ष 2019-20 से इफको के सौजन्य से नैनो यूरिया (तरल) का गेहूँ फसल पर प्रभाव पर अनुसंधान कार्यक्रम चलाया जा रहा है.

तीन वर्षो के शोध में इस उर्वरक के प्रभाव का परिणाम बढ़िया रहा है. उन्होंने कहा कि अनुशंसित मात्रा (75 प्रतिशत रासायनिक एवं 25 प्रतिशत जैविक खाद) में उर्वरकों के प्रयोग के साथ 4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर चूना के प्रयोग से अच्छा उपज मिलता है.

बुवाई के समय प्रयोग के बाद यूरिया की जगह दो बार नैनो यूरिया (तरल) उर्वरक के छिड़काव से उपज में 10-15 प्रतिशत तक अधिक उपज पाया गया है, भूमि पर इसके कोई दुष्प्रभाव देखने को नहीं मिला.

शोध परिणाम के मुताबिक नैनो यूरिया (तरल), जो 50 प्रतिशत तक दानेदार यूरिया को रीप्लेस कर सकता हैं. 50 प्रतिशत दानेदार यूरिया के प्रयोग के साथ नैनो यूरिया (तरल) का दो बार छिड़काव करने से अच्छा फसल प्रदर्शन देखने को मिला. इसमें पहला छिड़काव बुवाई के 30 दिनों के बाद तथा पहली छिड़काव के 20 दिनों के बाद दूसरा छिड़काव किया गया.

इस उपचार से फसल उपज में 10 से 15 प्रतिशत तक अधिक उपज प्राप्त हुआ.
डॉ शाही बताते है कि नैनो यूरिया (तरल) का 4 मि. ली. मात्रा से एक लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना फायदेमंद होता है. यह छिड़काव साफ मौसम में सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक किया जा सकता है.

नैनो यूरिया (तरल) का प्रयोग सभी फसलों पर की जा सकती है. दरअसल फसलों की पत्तियों में स्टोमाटा खुला रहता है, जो नैनो यूरिया के कण को अवशोषित करता है. पत्तियों के माध्यम से यह कण पौधे के अन्य भागों में पहुँच जाता है.

इफको ने देश के 20 शोध केन्द्रों एवं 11 हजार किसानों के खेतों में तकनीकी परीक्षण के बाद इस तरल उर्वरक को किसानों के लिए हाल में लांच किया है. इस तरल उर्वरक का एक बोतल करीब एक बोरी यूरिया के बराबर है. एक बैग दानेदार यूरिया का मूल्य 2600 रूपये है और सब्सिडी के उपरांत यह 266 रूपये प्रति बैग की दर से किसानों को मिलता है.

जबकि एक बोतल नैनो तरल यूरिया का मूल्य 240 रूपये है, जो एक बैग दानेदार यूरिया के बराबर होता है.
इफको नैनो तरल यूरिया कम लागत में ज्यादा फायदेमंद हो सकती है. इसके उपयोग से कृषि उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि, जल, वायु एवं मृदा प्रदूषण में कमी के साथ उपज की गुणवत्ता में वृद्धि होगी. यह परिवहन व भंडारण में किफायती एवं सुविधाजनक, सस्ता एवं प्रभावी तथा सभी के लिए सुरक्षित होगी.

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