जलवायु परिवर्तन के लिये 3000 करोड़ का एक्शन प्लान कागज पर ही सिमटा

RANCHI : सरकारी शिथिलता का नमूना एक से बढ़कर एक है, उनमें से एक यह भी है। झारखंड में जलवायु परिवर्तन को लेकर बनाये गए 3,000 करोड़ का एक्शन प्लान केवल कागज पर सिमट कर रह गया है। आज तक इसपर काम नहीं हुआ। जबकि इस एक्शन प्लान को केंद्र की भी स्वीकृति मिल चुकी थी। यही नहीं, झारखंड में जलवायु परिवर्तन को लेकर जो निदेशालय का गठन किया जाना था, वह नहीं हो पाया।

इस प्लान के तहत झारखंड में जलवायु परिवर्तन के अनुसार योजनाएं तैयार की जानी थी। कृषि की योजना, स्वास्थ्य क्षेत्र की योजना, शहर के विकास की योजन जल प्रबंधन, वैकल्पिक ऊर्जा के स्त्रोत की योजना, भू-गर्भ जलस्तर के दोहन को रोकने की योजना के अलावा जल संचयन और जल स्त्रोतों के संरक्षण की योजना पर काम किया जाना था. लेकिन निदेशालय के गठन नहीं होने के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस योजना के तहत बिजली के क्षेत्र में 333.25 करोड़, उद्योग के क्षेत्र में 68 करोड़, कृषि के क्षेत्र में 518 करोड़, फॉरेस्ट्री में 496 करोड़,थे।

छह अलग-अलग कमिटियां भी बनी

जलवायु परिवर्तन पर राज्य का ‘एक्शन प्लान'(ACTION PLAN) तैयार करने को वन एवं पर्यावरण विभाग ने छह अलग-अलग कमेटियां गठित की थीं. जल, कृषि, वानिकी, खनन, ऊर्जा व उद्योग से संबद्ध इस ‘सेक्टरल वर्किंग ग्रुप’ में संबंधित विभागों के सचिव समेत अन्य पदाधिकारी शामिल किए गए थे. संबंधित कमेटी अपने कार्य क्षेत्र से डाटा प्राप्त कर राज्य जलवायु परिवर्तन एक्शन प्लान तैयार करने में सरकार की मदद करनें की जिम्मेवारी सौंपी गई थी।

स्टेयरिंग कमेटी के गठन की भी बात कही पर हुआ कुछ नहीं

कहा गया था कि स्टेट एक्शन प्लान स्टेयरिंग कमेटी का गठन भी किया जायेगा। झारखंड सरकार के मुख्य सचिव इसके अध्यक्ष होंगे। जल संसाधन विभाग, वित्त, वन एवं पर्यावरण विभाग, पेयजल एवं स्वच्छता, कृषि एवं पशुपालन, नगर विकास, खान, ऊर्जा एवं उद्योग विभाग के सचिव सदस्य होंगे। इसके अतिरिक्त जल संसाधन विभाग के अभियंता प्रमुख, आइआइटी धनबाद के नामित सदस्य, मुख्य अभियंता योजना एवं मॉनिटरिंग, अधीक्षण अभियंता गेट रूपांकन, निदेशक भूगर्भ जल निदेशालय, निदेशक केंद्रीय जल आयोग, निदेशक आइएमडी, निदेशक नाबार्ड व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नामित पदाधिकारी इसके सदस्य होंगे। पर, आज तक इस पर किसी प्रकार की पहल ही नहीं की गयी।

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