चैत्र नवरात्रि में इस दिन हैं अष्टमी-नवमी, मां दुर्गा को प्रसन्‍न करने के लिए इस तरह करें पूजा

नई दिल्ली. चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) में पूरे नौ दिन मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की उपासना का विधान है. नवरात्रि में अष्टमी-नवमी(Ashtami-Navami) का खास महत्व होता है. अष्टमी के दिन महागौरी और नवमी के दिन सिद्धिदात्री मां का पूजन(worship) किया जाता है. अष्टमी और नवमी दोनों दिन कन्या पूजन करना विशेष फलदायी माना जाता है. कन्या पूजन के बाद ही भक्तों के नवरात्रि व्रत संपन्न माने जाते हैं. इसमें 2 से 11 साल की बच्चियों की पूजा की जाती है. माना जाता है कि अलग-अलग रूप की कन्याएं देवी के अलग-अलग स्वरूप को दर्शाती हैं.

अष्टमी-नवमी की तिथि और शुभ मुहूर्त (Ashtami-Navami date and Subh muhurt)
अष्टमी तिथि (Ashtami Date 2022) 09 अप्रैल शनिवार के दिन पड़ रही है. इसे दुर्गा अष्टमी (Durga Ashtami 2022) भी कहते हैं. अष्टमी की शुरुआत 8 अप्रैल को रात 11 बजकर 05 मिनट से हो रही है. इसका समापन 9 अप्रैल की देर रात 1 बजकर 23 मिनट पर होगा. दिन का शुभ मुहूर्त 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक है. इस शुभ मुहूर्त में कन्या पूजन (Kanya Pujan 2022) किया जा सकता है. कुछ लोग नवमी (Navami Date 2022) के दिन भी कन्या पूजन करते हैं. नवमी तिथि 10 अप्रैल की रात्रि 1बजकर 23 मिनट से शुरू हो रही है जो 11 अप्रैल सुबह 3 बजकर 15 मिनट पर समाप्त होगी. इस दिन रवि पुष्य योग, रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन है. इसलिए इस दिन सुबह से ही कन्या पूजन कर सकते हैं.

अष्टमी-नवमी की पूजा में रखें इन बातों का ध्यान (Ashtami-Navami Pujan Vidhi)
इन दोनों दिन सूर्योदय से पहले उठें. अगर आप व्रत नहीं भी है तो भी उठकर स्नान करें और पूजा जरूर करें. पूजा के लिए साफ कपड़े पहनें. इस दिन शुभ मुहूर्त में ही पूजा करने का प्रयास करें. मुहूर्त बीतने के बाद पूजा का महत्व नहीं रह जाता है. संधि काल का समय दुर्गा पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है. संधि काल के समय 108 दीपक जलाए जाते हैं. अष्टमी के दिन संधि काल में ही दीपक जलाना शुभ माना जाता है. संधि काल का ध्यान रखें. हवन के बिना नवरात्रि की पूजा अधूरी मानी जाती है. इसलिए इन दोनों में से किसी एक दिन हवन जरूर करें.

अगर आपने नवरात्रि के पूरे व्रत रखे हैं तो आखिरी दिन किसी भी तरह की हड़बड़ी ना दिखाएं. कई लोग अष्टमी की रात 12 बजते ही व्रत पारण करना गलत माना जाता है. नवमी के दिन सुबह पूरे विधि-विधान के साथ ही व्रत खत्म करें. इस दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के बाद पूरे विधि से हवन करें और कन्याओं को भोजन कराने के बाद ही इसका समापन करें. अष्टमी के दिन तुलसी जी के पास नौ दिये जलाकर और उनकी परिक्रमा करने से घर-परिवार में सुख समृद्धि आती है.

कन्या पूजन विधि (Kanya pujan vidhi )
शास्त्रों के मुताबिक कन्‍याओं को एक दिन पूर्व ही उनके घर जाकर निमंत्रण दें. गृह प्रवेश पर कन्याओं का पूरे परिवार के साथ पुष्प वर्षा से स्वागत करें और नव दुर्गा के सभी नामों के जयकारे लगाएं. अब इन कन्याओं को आरामदायक और स्वच्छ जगह बिठाएं. सभी के पैरों को दूध से भरे थाल में रखकर अपने हाथों से उनके पैर स्‍वच्‍छ पानी से धोएं. कन्‍याओं के माथे पर अक्षत, फूल या कुमकुम लगाएं फिर मां भगवती का ध्यान करके इन देवी रूपी कन्याओं को इच्छा अनुसार भोजन कराएं. भोजन के बाद कन्याओं को अपने सामर्थ्‍य के अनुसार दक्षिणा, उपहार दें और उनके पैर छूकर आशीष लें.

नोट– उपरोक्‍त दी गई जानकारी व सुझाव समान्‍य जानकारी के लिए हैं हम इसकी सत्‍यता व सटीकता की जांच का दावा नही करते हैं.