श्रमिक हड़ताल कहाँ कितना असर पढ़िए

(भोपाल) : केंद्रीय श्रमिक संघों (सीटू) की दो दिन की हड़ताल का असर देश के कई हिस्सों में देखा गया जबकि कई हिस्से इससे पूरी तरह से अप्रभावित रहे।
प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना, कर्नाटक, असम और त्रिपुरा 24 घंटे की हड़ताल से प्रभावित रहे जबकि दिल्ली, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, पंजाब, बिहार, झारखंड, गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, जम्मू कश्मीर तथा लददाख पर कोई असर नहीं हुआ। सीटू ने कहा है कि हड़ताल मे करोड़ों श्रमिकों ने भागीदारी की और केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों के प्रति रोष जताया। बीमा एवं बैकिंग क्षेत्र के कर्मी हड़ताल में पूरी तरह से सक्रिय रहे। इसके अलावा सड़क परिवहन, बिजली, खनन, रेल और बाजारों में कामकाज प्रभावित रहा।
भारतीय जनता पार्टी नीत केंद्र सरकार की कथित मजदूर विरोधी नीतियों, सार्वजनिक उपक्रमों में विनिवेश, निजीकरण और महंगाई के विरुद्ध आहूत की गयी सीटू की इस हड़ताल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध भारतीय मजदूर संघ शामिल नहीं हुआ।
श्रमिकों के समर्थन में वामपंथियों और द्रविड़ मुनेत्र कषगम ने संसद परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने श्रमिक हड़ताल को पूरी तरह से सफल बताया।


सीटू के महासचिव तपन सेन ने कहा कि हड़ताल को दो दिन जबरदस्त प्रतिदान मिला। हड़ताल के सफल होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रमिक अपनी मांगों के समर्थन में ही नहीं बल्कि केंद्र सरकार की ‘राष्ट्र विरोधी विध्वंसक’ नीतियों के विरुद्ध सड़क पर उतरे हैं।
बीएसएनएल के कर्मचाारियों ने भी हड़ताल में भागीदारी की। बेंगलुरु में निजी औद्योगिक इकाइयों भी कामकाज नहीं हुआ।
सीटू ने बैकिंग और बीमा क्षेत्र में हड़ताल का सफल बताया है। केंद्र और राज्य सरकारों के संबंधित संस्थानों के कर्मचारी भी हड़ताल पर हैं। इसके अलावा दूरसंचार, बंदरगाह, पेट्रोलियम, इस्पात, सीमेंट, कोयला और बिजली में पूर्ण हड़ताल रही और कोई कामकाज नहीं हुआ। कपड़ा और परिधान क्षेत्र में भी कामकाज नहीं हुआ। पश्चिम बंगाल में कई स्थानों से छिटपुट हिंसा और पुलिस के साथ झड़प की खबरें मिली हैं। कुछ स्थानों पर श्रमिक नेताओं को हिरासत लेने के समाचार भी मिले हैं।


सीटू ने कहा कि लगभग 80 लाख आंगनवाडी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं और मिड-डे मील कार्यकर्ताओं ने भी हड़ताल का समर्थन किया है। इसके अलावा निर्माण मजदूरों, बीड़ी श्रमिकों, रेहड़ी पटरी दुकानदारों, घरेलू कामगारों और सफाई कर्मियों ने भी हड़ताल में भाग लिया। ग्रामीण क्षेत्र में खेतिहर मजदूरों और मनरेगा मजदूरों ने भी हड़ताल का समर्थन किया।
केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने बिजली ग्रिड का कामकाज सुचारु रखने के लिए राज्यों और विद्युत क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों को जरूरी निर्देश दिए हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपनी सभी शाखाओं और कार्यालयों में सामान्य कामकाज सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रबंध किए हैं।
देशव्यापी श्रमिक हड़ताल में लगभग चार लाख बैंक कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) ने भी बैंकिग क्षेत्र की मांगों को ध्यान में रखते हुए इस हड़ताल को समर्थन की घोषणा की है। एआईबीईए के महासचिव सी एच वेंकटचलम ने कहा कि हड़ताल में सार्वजनिक, निजी, विदेशी, सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण सभी प्रकार के बैंकों के कर्मचारी हिस्सा लिया। विभिन्न राज्यों से आ रही रिपोर्टों के अनुसार हड़ताल पूरी तरह से सफल है। कर्मचारी बढ़-चढ़कर इसमें हिस्सा ले रहे हैं और विभिन्न जिलों और शहरों में रैली और प्रदर्शन मे भागीदारी कर रहे हैं। यह हड़ताल मंगलवार को भी जारी रहेगी। असम के प्रमुख शहर गुवाहाटी में के भीतर यातायात के लिए चलने वाली बसें और अन्य साधन भी इस दौरान सड़कों से नदारद रहे। डिब्रूगढ़ और सिलचर में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने बताया कि सभी राज्यों के तमाम बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की निजीकरण की नीतियों के विरोध में हड़ताल रही। बिजली कर्मियों ने देश भर में जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन किए। मुम्बई, चेन्नई, कोलकाता, लखनऊ, हैदराबाद, विजयवाड़ा, बेंगलुरु, त्रिवेन्द्रम, भोपाल, पटियाला, शिमला, जम्मू, पटना, रांची, देहरादून में भी श्रमिक संगठनों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन कर निजीकरण की नीति वापस लेने की।