इंग्लिश मे बात कर के भोपाल के एमपी नगर मे घूम – घूमकर बेचता है डायरी और कलम, आगे पायलट बनना चाहता है; पढ़िये 13 साल के उदय की कहानी:

भोपाल: आपने अक्सर ऐसे बच्चों को देखा होगा जो कलम वगैरह बेचकर कुछ पैसे कमाते हैं, मगर कभी ऐसे गरीब बच्चे को इंग्लिश मे बात कर के कलम बेचते हुए देखा है? इस बच्चे का नाम उदय कुमार मिश्रा है जो दिनभर मे कुछ पैसे कमाने के लिए भोपाल के एमपी नगर मे घूम – घूमकर डायरी और कलम बेचता है। सबसे बड़ी बात यह है कि ये इंग्लिश बोलते हुए अपने डायरी की मार्केटिंग करता है। उदय मूलतः उत्तरप्रदेश के प्रयागराज जिले के रहने वाला है जिसका परिवार पिछले कई सालों से भोपाल रेलवे स्टेशन के पास रहता है। पारिवारिक स्थिति खराब होने के बावजूद भी ये भोपाल के संत जेवियर्स स्कूल मे पढ़ाई करता है। जब हमने उदय से बात कि तो इसने कई सवालों के जवाब दिये और अपने बारे मे बताया कि कैसे उसने इंग्लिश सीखी और डायरी बेचने के साथ कैसे अपनी पढ़ाई करता है।

घर की स्थिति अच्छी नही है:
परिवार के बारे मे पुछने पर उदय ने बताया कि उसके घर मे वो, उसकी माँ और उसकी एक छोटी बहन है। उदय के पिताजी कुछ साल पहले फेफरे की बीमारी के वजह से गुज़र गए। माँ घर मे सिलाई का काम करती है और छोटी बहन पढ़ाई करती है। पिताजी के गुज़र जाने के बाद घर मे पैसे की समस्या और बढ़ गई और इसने बाजार मे डायरी बेचना शुरू कर दिया, और ये पिछले 3 सालों से घूम – घूमकर डायरी बेच रहा है। उदय ने बताया कि एक पॉकेट डायरी और एक कलम का वो 20 रुपए लेता है और दिनभर मे वो 7 से 8 डायरी बेच पाता है। कई लोग खरीदते भी हैं और कई लोग उससे बचकर निकालने के फिराक मे रहते हैं। वो बताता है कि उसके पास कोई फोन नहीं है और घर मे भी कोई फोन नहीं है। जब हमने उससे पूछा कि कभी देरी से घर पहुँचने के कारण माँ परेशान नहीं होती? इसका जवाब देते हुए वो कहता है कि वो समय होते – होते तक घर पहुँच जाता है। एमपी नगर से भोपाल स्टेशन की दूरी लगभग 6 किलोमीटर है और वो हर रोज शाम को बस से घर वापस चला जाता है। उसका इंग्लिश बोलना लोगों को ज्यादा आकर्षित करता है।

स्कूल मे सीखा इंग्लिश बोलना, आगे चलकर पायलट बनना चाहता है:
उदय भोपाल के ही संत जेवियर्स स्कूल मे पढ़ता है और वो अभी सातवीं क्लास मे है। पढ़ाई मे तेज होने के कारण उदय के स्कूल वाले भी इसकी मदद करते हैं। हालांकि इसके परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के बादजूद भी ये कान्वेंट स्कूल मे पढ़ता है और इंग्लिश बोलना सीखता है, जो कि किसी गरीब बच्चे के लिए बहुत बड़ी बात है। उदय इसके बावजूद भी अपनी सोच ऊंची रखता है और आगे एयरफोर्स मे पायलट बनने की चाह रखता है। पसंदीदा विषय पुछने पर वो बताता है कि उसे इतिहास बहुत पसंद है। उदय की माँ खुद ना पढ़ी होने के बावजूद भी अपने दोनों बच्चों को पढाकर आगे बढ़ाना चाहती हैं। स्कूल के फीस के बारे मे बताते हुए वो कहता है कि, प्रिन्सिपल सर ने उसे इस परीक्षा मे कम से कम 82% मार्क्स लाने को कहा है ताकि उसके फीस माफ हो सके, वरना उसे पूरा फीस (10,000 रुपए) भरना पड़ेगा। इनदिनों उसके स्कूल मे परीक्षाएँ समाप्त हुई है जिसके वजह से स्कूल की छुट्टी रहती है और वो हर दिन डायरी बेच पाता है। जब उसके स्कूल खुले रहते हैं तब वो बाँकी दिन स्कूल मे पढ़ाई करता है और रविवार को डायरी बेचता है।

छोटी उम्र मे ही मानसिक रूप से बहुत परिपक्व है उदय:
महज़ 13 साल के उदय ने बहुत दुनियाँ देखी है। बचपन मे ही पिताजी के चले जाने का दुख और भाई – बहन मे सबसे बड़ा होने का दायित्व इस छोटे से कंधे पर बहुत जल्द आ गया। तरह – तरह के लोगों से मिलना, बातें करना, घर की स्थिति को खेलने – कूदने के उम्र मे ही समझ जाना किसी बच्चे का बचपना छीन लेती है। आँखों मे सपने और हाथों मे डायरी – कलम लिए उदय शायद एकांत मे लिखता होगा अपनी पीड़ा को और छिपा लेता होगा अपनी जेब मे ताकि ये दुनियाँ उसे ना पढ़ सके, वही दुनियाँ जिसे इसके सपने देखने और ना देखने से कोई फर्क नहीं पड़ता। ना जाने कितने उदय होंगे इस दुनियाँ मे जिनके सपने, बचपन, हंसी, खुशी सब एकपल मे उजड़ जाता है। मगर इस स्थिति मे भी उदय का बड़ा सपना देखना बताता है कि चाहे हमारे पास कितना भी कम कुछ क्यों ना हो, हमे हमेशा ऊंचा सोचना है।

रीपोर्ट- सचिन सिंह ‘प्रभात’

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