रूस ने किया यूक्रेन का बंटवारा

Russia-Ukraine crisis

 

रूस और यूक्रेन के बीच तनाव बढ़ गया है। यूक्रेन मसले पर बड़ा कदम उठाते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार देर रात पूर्वी यूक्रेन के विद्रोही इलाकों-डोनेस्क और लुहांस्क को स्वतंत्र देश की मान्यता दे दी। साथ ही उनके साथ रूस के सुरक्षा समझौते का भी एलान कर दिया। इस एलान के साथ ही पुतिन ने यूक्रेन की सेना को दोनों इलाकों पर गोलाबारी रोकने के लिए कहा। कहा कि सुरक्षा समझौते के तहत अब इनकी सुरक्षा की रूस की जिम्मेदारी है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस समेत पश्चिमी देशों ने रूस के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।

UNSC में भारत ने रखा अपना पक्ष

रूस की इस मनमानी के खिलाफ छह देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपातकालीन बैठक बुलाई गई है। बैठक में भारत के प्रतिनिधि पीएस त्रिमूर्ति ने पक्ष रखा। त्रिमूर्ति ने कहा कि देश देश संयम बरतें और बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की कोशिश करें। भारत की नजर में नागरिकों की सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है।

पढ़िए राष्ट्र के नाम संबोधन में क्या कहा पुतिन ने

इससे पहले पुतिन ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि रूस को अपनी सुरक्षा का अधिकार है और हम इस जिम्मेदारी को संभालेंगे। पश्चिमी देशों ने नाटो का विस्तार कर लगातार दबाव बनाने और ब्लैकमेल की कोशिश की है। हाल के दौर में यूक्रेन परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश कर रहा है। जाहिर है इससे रूस के लिए खतरा बढ़ेगा। पुतिन ने कहा, सन 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से नाटो में रूस के शामिल होने की संभावना पर बात की थी। लेकिन शीतयुद्ध की मानसिकता से ग्रस्त अमेरिका ने उस प्रस्ताव पर गौर नहीं किया। अमेरिका रूस जैसे बड़े और शक्तिशाली देश को नाटो में लेने के लिए तैयार नहीं हुआ। अमेरिका को छोटे और कमजोर देशों की जरूरत है। लेकिन अब हमें अपनी सुरक्षा के लिए भरोसे की जरूरत है। नाटो का विस्तार न होने का हमें स्पष्ट आश्वासन चाहिए।

इससे पहले राष्ट्रपति पुतिन ने सोमवार को रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के साथ बैठक कर यूक्रेन के विद्रोहियों के कब्जे वाले दो इलाकों को अलग देश की मान्यता देने पर विचार किया। रूस की योजना इन इलाकों को अलग देश की मान्यता देते हुए उनके साथ सुरक्षा समझौता करने की है। पूर्वी यूरोप के डोनेस्क और लुहांस्क इलाकों पर रूस समर्थित विद्रोहियों का पिछले आठ वर्ष से कब्जा है। रूसी भाषी लोगों की बहुलता वाले इन दोनों इलाकों में यूक्रेन सरकार का नियंत्रण नहीं है। इन्हीं दोनों इलाकों में काबिज विद्रोहियों का इन दिनों यूक्रेन की सेना से संघर्ष चल रहा है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ने की स्थिति में ये विद्रोही रूसी सेना के साथ लड़ सकते हैं।

यूक्रेन के सैन्य वाहन घुसने की कर रहे कोशिश

रूस ने कहा है कि यूक्रेन के सैन्य वाहन रूसी इलाके में दाखिल होने की कोशिश कर रहे हैं। कई स्थानों पर उन्हें रोका गया है। यूक्रेन ने रूस के इस आरोप का खंडन किया है और इसे झूठी खबर करार दिया है। रूस की ओर से आए इस बयान के बाद यूक्रेन और पश्चिमी देश सतर्क हो गए हैं। अमेरिका और पश्चिमी देश हाल के दिनों में आशंका जताते रहे हैं कि रूस खुद पर फर्जी हमला कराकर यूक्रेन पर जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है।