आज समाज में मैं , कितनी सुरक्षित हूं – एक मासूम बेटी

(खंडवा) : कहते है रिश्ता खून का होता है ,यदि ये सच है तो कैसे

खंडवा (Khandva) में एक पिता ने अपनी ही  8 साल की बेटी के साथ हद पार करदी है।जब  वह कमरे में अकेली रोते बिलखते तथा खून से लहूलुहान अपनी मां को मिली। तथा जब मां ने उसका हाल पूछा तो उसने आपने ही पिता के द्वारा लिए गए कुकर्म का हाल अपनी मां को  सुनाया।इस के साथ उसने यह भी कहा कि उन्होंने मेरे साथ इससे पहले भी मेरा शोषण किया है ।ये शर्मनाक घटना बताती है कि जब एक बेटी आपने ही घर और जिसने उसे जन्म दिया है आज वही उसका रेप कर रहा है। शायद अब न हीं वो संस्कृति है न हीं वो संस्कार ।अब सवाल आता है कि आखिर इस समाज का होगा क्या जिसमें इस प्रकार की घटनाएं हो रही हो ।

हम कहते है आपनी बेटी फिर दरिंदगी क्यों

भारत एक सांस्कृतिक देश है , जहां हम आपने संस्कारो के दायरे में रहकर ही जीवन यापन करते है ।लेकिन इस प्रकार की खबरों से नहीं लगता है कि अब भारत की बो संस्कृति आज भी लोगों में है ,जिसको पहले हम प्यार है पालते है फिर उसका रेप ये कोन सा समाज है या कोनसा पिता ।आज मासूम सी बेटी को अपने ही घर में आपने ही पिता का डर है ,जिसने उसे जन्म दिया ।अब वह जब सड़को पर चले तो उसे किसका डर नहीं सताता होगा।कोन होगा इसका जबाव देह।समाज य समजिक संस्कार। इस प्रकार की घटना पहली बार नहीं हुई है ,इससे पहले कई बार आप ने अखबारों में पड़ा तो होगा ही।लेकिन अब सवाल है कि जब बेटी को जिस पर अपनी सुरक्षा का विश्वास है वहीं इस प्रकार का काम करे तो कहा तक इस देश की बेटी सुरक्षित होगी।

रिपोर्ट

Ravnesh Vishwakarma

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