आज है मासिक शिवरात्रि, भगवान शिव की पूजा में करें ये काम, बरसेगी कृपा

नई दिल्ली. मासिक शिवरात्रि का हिन्दू धर्म में खास महत्व है. साल में एक बार महाशिवरात्रि बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है. वहीं भोलेनाथ की आराधना में प्रत्येक महीने एक मासिक शिवरात्रि मनाने की भी परंपरा है. माघ मास की मासिक शिवरात्रि के लिए आज 30 जनवरी को शिवजी की पूजा की जाएगी. मान्यत है कि इस दिन विधि विधान से शिवजी की पूजा से शुभ फल की प्राप्ति होती है साथ ही शिवजी प्रसन्न होकर अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं.

जरूर करें शिव चालीसा का पाठ
मासिक शिवरात्रि के दिन शिव चालीसा का बहुत महत्व होता है. शिव चालीसा के सरल शब्दों से भगवान शिव को प्रसन्न किया जा सकता है. शिव चालीसा के पाठ से कठिन से कठिन कार्य को बहुत ही आसानी से किया जा सकता है. शिव चालीसा की 40 पंक्तियां सरल शब्दों में विद्यमान हैं, जिनकी महिमा बहुत ही ज्यादा है. मान्यता है कि शिव चालीसा का पाठ करने वालों के सभी भय खत्म हो जाते है.

ऐसे करें शिव चालीसा का पाठ
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. अपना मुंह पूर्व दिशा में रखें और कुशा के आसन पर बैठें. पूजन में सफेद चंदन, चावल, कलावा, धूप-दीप, पीले फूलों की माला और हो सके तो सफेद आक के 11 फूल भी रखें. शुद्ध मिश्री को प्रसाद के लिए रखें. पाठ करने से पहले धूप दीप जलायें और एक लोटे में शुद्ध जल भरकर रखें. भगवान शिव की शिव चालिसा का तीन या पांच बार पाठ करें. पाठ पूरा हो जाने पर लोटे का जल सारे घर मे छिड़क दें. थोड़ा सा जल स्वयं पी लें और मिश्री प्रसाद के रूप में खाएं और बच्चों में भी बांट दें.

पूजा विधि
1- मासिक शिवरात्रि वाले दिन आप सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि कर लें.
2- मंदिर में जा कर भगवान शिव और उनके परिवार (पार्वती, गणेश, कार्तिक, नंदी) की पूजा करें.
3- शिवलिंग का रुद्राभिषेक जल, शुद्ध घी, दूध, शक़्कर, शहद, दही आदि से करें.
4- शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और श्रीफल चढ़ाएं. ध्यान रहे कि बेलपत्र अच्छी तरह साफ़ किये होने चाहिए.
5- भगवान शिव की धुप, दीप, फल और फूल आदि से पूजा करें.
6- शिव पूजा करते समय आप शिव पुराण, शिव स्तुति, शिव अष्टक, शिव चालीसा और शिव श्लोक का पाठ करें

नोट– उपरोक्त दी गई जानकारी व सूचना सामान्य उद्देश्य के लिए दी गई है. हम इसकी सत्यता की जांच का दावा नही करतें हैं यह जानकारी विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, धर्मग्रंथों, पंचाग आदि से ली गई है. इस उपयोग करने वाले की स्वयं की जिम्मेंदारी होगी.